{"_id":"687336b03008b14cf001c1ae","slug":"senior-neurosurgeon-of-chandigarh-pgi-prof-rajesh-chhabra-performed-more-than-thousand-surgeries-in-7-year-2025-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"बड़ी उपलिब्ध: सात साल में की एक हजार एंडोस्कोपिक पिट्यूटरी सर्जरी, PGI के प्रो. राजेश छाबड़ा ने रचा इतिहास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बड़ी उपलिब्ध: सात साल में की एक हजार एंडोस्कोपिक पिट्यूटरी सर्जरी, PGI के प्रो. राजेश छाबड़ा ने रचा इतिहास
Sun, 13 Jul 2025 10:42 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 13 Jul 2025 10:42 AM IST
सार
पिट्यूटरी ग्रंथि हार्मोनों के प्रोडक्शन को कंट्रोल करती है। इसमें ग्रोथ, थायरॉइड फंक्शन, स्ट्रेस रिस्पोंस, रिप्रोडक्टिव हेल्थ और फ्लूड बैलेंस आदि शामिल हैं। मटर के आकार की होने के बावजूद पिट्यूटरी ग्रंथि शरीर के हार्मोन को नियंत्रित करती है। पिट्यूटरी ट्यूमर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता हैं। यह ट्यूमर तीसरा सबसे आम ब्रेन ट्यूमर है।
विज्ञापन
प्रो. राजेश छाबड़ा
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंडीगढ़ पीजीआई के सीनियर न्यूरोसर्जन प्रो. राजेश छाबड़ा ने एक एंडोस्कोपिक पिट्यूटरी एडेनोमा सर्जरी करके नई उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने बीते 7 साल में एक हजार से ज्यादा सर्जरी की हैं।
दुनियाभर में प्रो. राजेश अकेले ऐसे सर्जन बन गए हैं जिन्होंने अकेले इतनी सर्जरी की हैं। प्रो. राजेश छाबड़ा ने कहा कि मेडिसिन में प्रगति होने के बावजूद वह ऐसे बड़े पिट्यूटरी ट्यूमर वाले मरीजों को देखते रहते हैं जिनमें सीमित जागरूकता है या इलाज में देरी करते हैं। यह उपलब्धि ट्यूमर की जल्दी पहचान के महत्व और टीम के समर्पण को भी साबित करती है। उन्होंने बताया टीम के बिना यह कार्य संभव नहीं था। टीम में न्यूरोसर्जरी से डॉ. अपिंदरप्रीत सिंह, ईएनटी से डॉ. रमनदीप विर्क, एंडोक्रिनोलॉजी से डॉ. पिनाकी दत्ता, डॉ. रमा अहलूवालिया, न्यूरोरेडियोलॉजी से डॉ. चिराग कमल आहूजा और न्यूरोएनेस्थीसिया से डॉ. निधि पांडा शामिल हैं।
पिट्यूटरी ग्रंथि हार्मोनों के प्रोडक्शन को कंट्रोल करती है। इसमें ग्रोथ, थायरॉइड फंक्शन, स्ट्रेस रिस्पोंस, रिप्रोडक्टिव हेल्थ और फ्लूड बैलेंस आदि शामिल हैं। मटर के आकार की होने के बावजूद पिट्यूटरी ग्रंथि शरीर के हार्मोन को नियंत्रित करती है। पिट्यूटरी ट्यूमर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता हैं। यह ट्यूमर तीसरा सबसे आम ब्रेन ट्यूमर है। अगर इनका इलाज न किया जाए, तो इससे विजन लॉस, हार्मोनल असंतुलन, जानलेवा संकट होने के साथ मरीज कोमा में जा सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
दुनियाभर में प्रो. राजेश अकेले ऐसे सर्जन बन गए हैं जिन्होंने अकेले इतनी सर्जरी की हैं। प्रो. राजेश छाबड़ा ने कहा कि मेडिसिन में प्रगति होने के बावजूद वह ऐसे बड़े पिट्यूटरी ट्यूमर वाले मरीजों को देखते रहते हैं जिनमें सीमित जागरूकता है या इलाज में देरी करते हैं। यह उपलब्धि ट्यूमर की जल्दी पहचान के महत्व और टीम के समर्पण को भी साबित करती है। उन्होंने बताया टीम के बिना यह कार्य संभव नहीं था। टीम में न्यूरोसर्जरी से डॉ. अपिंदरप्रीत सिंह, ईएनटी से डॉ. रमनदीप विर्क, एंडोक्रिनोलॉजी से डॉ. पिनाकी दत्ता, डॉ. रमा अहलूवालिया, न्यूरोरेडियोलॉजी से डॉ. चिराग कमल आहूजा और न्यूरोएनेस्थीसिया से डॉ. निधि पांडा शामिल हैं।
विज्ञापन
पिट्यूटरी ग्रंथि हार्मोनों के प्रोडक्शन को कंट्रोल करती है। इसमें ग्रोथ, थायरॉइड फंक्शन, स्ट्रेस रिस्पोंस, रिप्रोडक्टिव हेल्थ और फ्लूड बैलेंस आदि शामिल हैं। मटर के आकार की होने के बावजूद पिट्यूटरी ग्रंथि शरीर के हार्मोन को नियंत्रित करती है। पिट्यूटरी ट्यूमर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता हैं। यह ट्यूमर तीसरा सबसे आम ब्रेन ट्यूमर है। अगर इनका इलाज न किया जाए, तो इससे विजन लॉस, हार्मोनल असंतुलन, जानलेवा संकट होने के साथ मरीज कोमा में जा सकते हैं।
विज्ञापन