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चार माह की गर्भवती बबीता के जज्बे को सलाम.. कोविड वार्ड में तीन महीने से लगातार कर रहीं ड्यूटी

Fri, 22 May 2020 02:27 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 22 May 2020 02:27 AM IST
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Salute to the spirit of Babita, a four-month pregnant .. doing duty in Kovid ward for three months continuously
चंडीगढ़। जीएमएसएच-16 में कार्यरत सिस्टर बबीता की कहानी बाकी कोरोना योद्धाओं से थोड़ी अलग है। बबीता चार महीने की प्रेग्नेंसी के बावजूद अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती मरीजों के बीच बीते तीन महीने से लगातार ड्यूटी कर रही हैं। संक्रमण के खतरे को दरकिनार कर वह कहती हैं कि फर्ज और कर्तव्य के आगे सारे डर कमजोर पड़ जाते हैं। जहां तक प्रेगनेंसी में खतरे की बात है तो जो ऊपर वाला चाहेगा, वही होगा पर मेरा यह मानना है कि अगर मैंने इस समय हिम्मत और धैर्य से काम किया तो मेरा आने वाला बच्चा भी बहादुर और नेक इंसान होगा। बबीता की बहादुरी और इस जज्बे को अस्पताल के उच्च अधिकारी समेत उनके सहयोगी भी सलाम करते हैं। वहीं बबीता इसका सारा श्रेय अपनी सास, ससुर और जीएमएसएच की अपनी नर्सिंग इंचार्ज शोभना पठानिया को देती हैं।
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शुरू में लगा था डर पर बड़ों के प्यार ने हिम्मती बना दिया
बबीता ने बताया कि शुरुआती दौर में जब कोरोना के मरीजों के बीच ड्यूटी करने की बात पता चली तो डर लगा लेकिन फिर सास, ससुर और माता-पिता ने हिम्मत बंधाई। बबीता ने बताया कि उनकी मां हिमाचल प्रदेश में स्टाफ नर्स के पद पर तैनात हैं और पिता आर्मी से रिटायर हैं। बचपन से ही सेवा और देश भक्ति से जुड़े संस्कार मिले। उसी परवरिश का नतीजा है कि मैंने प्रेग्नेंसी की स्थिति में भी ड्यूटी करने का निर्णय लिया और आज मैं अपने निर्णय को सही मानती हूं। कोरोना को लेकर यह कहा जाता है कि वृद्ध, बच्चों और गर्भवती महिलाओं में इसके संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इस बात को जानते हुए मैं बेहद गंभीरता से अपनी सुरक्षा के सभी मानकों पूरा करके तय समय में ड्यूटी करती हूं। छोटी-छोटी बातों को गंभीरता से लेने के कारण ही तीन महीने की ड्यूटी के दौरान भी मुझे किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई।
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ससुराल का मिले सहयोग तो हर मुश्किल हो जाए आसान
बबीता खुद को बेहद खुशनसीब मानती हैं और कहती हैं कि वाकई में मैं बहुत ही खुशनसीब हूं, जो मुझे इतना अच्छा ससुराल मिला। सास ससुर ने कभी भी मायके की कमी महसूस नहीं होने दी। उनके प्यार और अपनेपन के कारण मैं आज पूरी निष्ठा के साथ अपना फर्ज अदा कर रही हूं। बबीता ने बताया कि उनकी एक पांच साल की बेटी भी है, जिसका नाम अर्शिया है और पति विकास बैंक में कार्यरत हैं। ससुराल में उनके साथ देवर देवरानी भी रहते हैं। संयुक्त परिवार में हंसते खेलते दिन कब निकल जाता है पता ही नहीं चलता। ऐसे में कोरोना महामारी के दौर में ड्यूटी के दौरान हुई थकान घर पहुंचने के बाद कुछ देर में ही मानो खत्म हो जाती है।
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