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हरियाणा: अब फल-सब्जियों पर सरकार वसूल कर सकेगी ग्रामीण विकास शुल्क, विधेयक हुआ पारित

Thu, 27 Aug 2020 12:35 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 27 Aug 2020 12:35 AM IST
सार

  • सरकार ने विधानसभा में पारित कराया ग्रामीण विकास संशोधन विधेयक
  • कोराना लॉकडाउन के दौरान कैबिनेट ने लिया था निर्णय

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Rural Development Amendment Bill passed in Haryana Assembly
हरियाणा विधानसभा - फोटो : हरियाणा डीपीआर।

विस्तार

हरियाणा सरकार अब अधिसूचित मार्केट क्षेत्र में फलों, सब्जियों के बिक्री मूल्य पर एक प्रतिशत ग्रामीण विकास शुल्क वसूल सकेगी। विधानसभा में हरियाणा ग्रामीण विकास संशोधन विधेयक-2020 पारित हो गया है। सरकार ने यह शुल्क वसूलने का निर्णय कोरोना लॉकडाउन के दौरान ही ले लिया था लेकिन इसकी अधिसूचना जारी नहीं कर पाई। 

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मंत्रिमंडल में हुए निर्णय पर विधानसभा की मुहर जरूरी थी। सरकार ने कोराना के कारण पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए यह संशोधन विधेयक पारित कराया है। विधानसभा में विधेयक पारित होने पर अब इसकी अधिसूचना जारी की जाएगी। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने यह विधेयक सदन में पेश किया और इसे पारित करने का प्रस्ताव रखा। इस पर कांग्रेस विधायक जगबीर मलिक और बीबी बत्रा ने सवाल उठाए।
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जगबीर मलिक ने कहा कि इस विधेयक को वापस लिया जाए। इसमें यह स्पष्ट नहीं लिखा है कि शुल्क की वसूली कब से शुरू होगी। बत्रा ने कहा कि बिना पर्याप्त चर्चा के यह पास नहीं किया जाना चाहिए। इसे लंबित रखा जाए। ऐसी क्या आपात स्थिति बन गई है कि शुल्क लगाए बिना काम नहीं चल सकता। उन्होंने कहा कि सदन की परंपरा को क्यों बिगाड़ा जा रहा है।
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उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि इस शुल्क से ग्रामीण विकास को गति मिलेगी। अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया जा सकेगा। सरकार ने यह शुल्क लगाने का निर्णय अप्रैल महीने में मंत्रिमंडल बैठक में लिया था। इसकी अधिसूचना जारी न होने से सरकार को हर माह लगभग बीस करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा है। चूंकि, इस समय सेब व अन्य फलों का सीजन चरम पर है। पंचकूला व अन्य मंडियों में बड़े पैमाने पर सेब व अन्य फल पहुंचते हैं। यह शुल्क वसूलने की अधिसूचना जारी न होने से ग्रामीण विकास कोष में करोड़ों रुपये जमा नहीं हो पाए। 

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