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रोहतक रेप: सातों को फांसी सुनाते समय क्या बोलीं महिला जज?

Wed, 23 Dec 2015 10:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Wed, 23 Dec 2015 10:50 AM IST
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rohtak rape: comment of woman judge during decision of death penalty

नेपाली युवती से गैंगरेप और दरिंदगी से हत्या के बहुचर्चित मामले में रोहतक कोर्ट ने सभी सातों बालिग आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सीमा सिंहल की अदालत ने दोषियों को चालान में शामिल आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत अलग-अलग सजा सुनाई।

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कोर्ट की टिप्पणी-
लोग महिला को कमजोर समझते हैं। मैं इंसान होने के साथ एक महिला भी हूं। महिला होने के नाते उनका दर्द समझती हूं। मुझे न्यायिक अधिकारी होने के नाते जिम्मेदारी मिली है। मैं महिलाओं की रोने और चिल्लाने की आवाज सुन सकती हूं। जिन पर जुर्म ढाए गए। आज हमारी सभ्यता तो आगे बढ़ गई है। लेकिन हम दिमागी रूप से आज भी बहुत पीछे हैं। देश में लैंगिक पूर्वाग्रह है। थोड़ा नहीं बहुत ज्यादा।
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कुछ पुरुष समझते हैं दुष्कर्म और जघन्य जुर्म करके महिलाओं को दबाया जा सकता है। अदालत समाज में एक संदेश देना चाहती है कि महिलाएं कमजोर नहीं हैं। आज महिलाएं दबने और झुकने से साफ इनकार करती हैं। वह दामिनी या निर्भया बनने से इनकार करती है। उन्हें अपनी पहचान और निजता पर अभिमान है। वह किसी भी कीमत पर इसे छोड़ने को तैयार नहीं है।
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शर्मिंदगी तो उन पुरुषों और उनके साथियों को करनी चाहिए जो ऐसा घिनौना कृत्य करते हैं। जैसा पीड़िता के साथ हुआ। ऐसे कृत्य से महिला के शरीर ही नहीं बल्कि आत्मा पर भी घाव होते हैं। कोर्ट पीड़िता के शरीर के घाव तो नहीं भर सकती, लेकिन फैसले से उसकी आत्मा के घाव मिटाने का प्रयास किया गया है।

साथ ही यह बताने की कोशिश की है कि आज महिलाएं बेबस नहीं हैं। भविष्य में भी ऐसे जुर्म के दोषियों से अदालत सख्ती से निपटेगी। यह घटना समाज के लिए शर्मनाक है। अपने इस फैसले से मैंने समाज में एक संदेश देने का प्रयास किया है। मैंने अपने करियर में पहली बार फांसी की सजा सुनाई है। इतना कहते ही उन्होंने कलम तोड़ दी और वकीलों और पुलिस अधिकारियों से भरे कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया।

'रोहतक कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला पूरे देश के नजीर'

rohtak rape: comment of woman judge during decision of death penalty

डॉ दीपक भारद्वाजः दोषी पवन और राजेश उर्फ घुचडू के वकील ने ‌कहा, मैं माननीय कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं। मगर यह कोर्ट द्वारा सिर्फ फैसला दिया गया है। यह न्याय नहीं है। कोर्ट ने सभी दोषियों को एक तराजू में रखकर सजा सुनाई है। जैसे पीड़ित पक्ष को न्याय पाने का अधिकार है वैसे ही आरोपी पक्ष को भी न्याय पाने का पूरा अधिकार है। हम जल्दी कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।

सुरेंद्र पाहवा पीड़ित पक्ष की ओर से सरकारी वकील ने कहा, आज कोर्ट ने हमारी दलील सुनने के बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस फैसले से समाज में एक संदेश जाएगा। अब आरोपी किसी के साथ ऐसा घिनौना अपराध करने से पहले न्यायालय के फै सले के बारे में सोचेंगे। हमने अदालत से सजा पर बहस के दौरान सभी दोषियों को मौत की सजा सुनाने की अपील की थी। ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

प्रदीप मलिक, पीड़ित पक्ष के वकील ने कहा, हमने दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी। यह जघन्यतम मामला है। अदालत ने हमारी मांग को माना और सभी को फांसी की सजा सुनाई गई है। यह फैसला ऐतिहासिक है। अदालत ने किसी भी दोषी को कोई रियायत नहीं दी है। इनके पास सिर्फ अपील का ही रास्ता बचा है। एक माह में यह अपील कर सकते हैं।

देश का पहला मामला
सरकारी वकील सुरेंद्र पाहवा की मानें तो रोहतक कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला पूरे देश के नजीर है। आज तक देश के किसी भी कोर्ट ने हत्या और गैंगरेप के सात दोषियों को एक साथ कभी भी फांसी की सजा नहीं सुनाई है। इतना ही नहीं आज से पहले रोहतक की किसी भी कोर्ट ने किसी एक मामले में सात आरोपियों को सजा नहीं सुनाई है। जघन्य मामलों में यह फैसला देश के इतिहास में नजीर होगा।

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