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5 राज्यों में सीचेवाल के अनोखे माडल के सहारे ही साफ होगी गंगा, देखिए कैसे?

Fri, 15 Jul 2016 09:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़। Updated Fri, 15 Jul 2016 09:35 AM IST
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river ganga clean for Sant Balbir Singh Seechewal model
‘पर्यावरण के हीरो’ के टाइटिल से नवाजे गए संत बलबीर सिंह सीचेवाल - फोटो : amarujala
टाइम मैगजीन की ओर से ‘पर्यावरण के हीरो’ के टाइटिल से नवाजे गए संत बलबीर सिंह सीचेवाल के अनोखे ‘सीचेवाल मॉडल’ के सहारे ही केंद्र सरकार की बहुप्रतीक्षित नमामि गंगे योजना सिरे चढ़ेगी।
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योजना के तहत गंगा की सफाई के लिए केंद्र सरकार को संत सीचेवाल का तरीका ही रास आया है। यही वजह है कि गंगा को साफ करने का अभियान इसी मॉडल को अपनाते हुए शुरू किया गया है। केंद्र सरकार ने पांच राज्यों में इस मॉडल के जरिए जल संरक्षण की योजना शुरू कर दी है। 
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काली बेईं नदी को प्रदूषण मुक्त करने वाले संत सीचेवाल की तकनीक अपनाने के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से गंगा किनारे वाले गांव के लोग सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला) पहुंच रहे हैं। संत सीचेवाल का कहना है कि इस तकनीक से न्यूनतम राशि पर गंगा की सफाई की जा सकेगी। पहले चरण में पांच राज्यों के 1657 गांवों में यह अभियान चलाया जाना है। इसमें से दो सौ गांवों में अभियान शुरू हो चुका है। 
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पंजाब सरकार से नाखुश हैं संत

सीचेवाल ने बताया कि केंद्र सरकार की तरफ से उनके मॉडल को तरजीह दिए जाने के बावजूद पंजाब सरकार ने इसकी उपेक्षा की है। राज्य सरकार की ओर से इसे तवज्जो न मिलने के कारण सीचेवाल नाखुश हैं। उनका कहना है कि पंजाब सरकार पानी सफाई के लिए बड़े-बड़े प्लांट पर करोड़ों खर्च तो कर रही है, लेकिन उसे जारी रखने के लिए पर्याप्त फंड न होने के कारण योजना नाकाम हो रही हैं। 

पंजाब में 12,500 गांवों में से प्रत्येक में दो से तीन छप्पर (तालाब) हैं। उसका पानी दूषित और गंदा हैं, लेकिन वह सिंचाई के लिए उपयुक्त हैं। यदि उसका सही तरीके से ट्रीटमेंट किया जाए, तो इससे वाटर रिचार्ज भी होगा और भूजल का दोहन कम होगा। उन्होंने पंजाब सरकार को कई बार सुझाव दिया कि है वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाए। वहीं, दरिया के साथ लगने वाले गांवों में सीचेवाल मॉडल का उपयोग किया जाए, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ।

river ganga clean for Sant Balbir Singh Seechewal model
‘जल प्रबंधन चुनौतियां और कार्यनीतियां’ विषय पर आयोजित सेमीनार
ऐसा है सीचेवाल मॉडल
प्रत्येक गांव में तीन कुएं बनाए जाते हैं। पहले कुएं में गंदा पानी डाल उसे जालियों से साफ किया जाता है। इसके बाद पानी को दूसरे कुएं में पहुंचाया जाता है। पानी के साथ आया गाद पहले कुएं में ही रह जाता है। दूसरे कुएं में चिकनाहट वाले पदार्थ को रोका जाता है। उसके बाद पानी तीसरे कुएं में पहुंचता है। इस कुएं से पानी बड़े छप्पर (तालाब)में पहुंचाया जाता है, जहां सूरज की किरणों की सहायता से पानी साफ होता है और उसे सिंचाई के लिए उपयोग किया जा सकता है। इससे कृषि कार्यों के लिए जमीन से पानी निकालने की जरूरत नहीं पड़ती और जल संरक्षण संभव हो सकता है। 

जल संकट के लिए केवल सरकार को दोषी करार न दें : सीचेवाल

पंजाब और हरियाणा में लगातार भूजल स्तर गिरना एक बड़ी समस्या है। इसका मुख्य कारण दुर्व्यवस्था है। इस समस्या के निराकरण के लिए लोगों को खुद कदम उठाने होंगे। लोगों के लिए उचित यही होगा कि वे समस्या के लिए केवल सरकार को ही दोषी करार न दें। यह विचार पर्यावरण प्रेमी संत बलबीर सिंह सीचेवाल के हैं। वे बुधवार को यहां नाबार्ड की ओर से ‘जल प्रबंधन चुनौतियां और कार्यनीतियां’ विषय पर आयोजित सेमीनार को संबोधित कर रहे थे। 

संत सीचेवाल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ जब पूरी दुनिया को जल बचाने के लिए प्रेरित कर रहा था, तब पंजाब में पानी की कोई समस्या नहीं थी। पंजाबियों ने उस समय इस पर ध्यान नहीं दिया। विदेशों में पानी पेट्रोलियम पदार्थ से भी महंगा है, लेकिन भारतीय इस बात को नहीं समझ रहे हैं। पंजाब के लोगों ने लगातार नदियों और नालों को प्रदूषित करने का ही काम किया। सीचेवाल ने कहा कि सरकार विदेशों से खाद आयात कर रही है। जबकि नदियों और नालों की सफाई उचित तरीके से की जाए, तो उसके गाद से बेहतर खाद भी बन सकती है। अब पानी के संरक्षण के लिए धार्मिक स्थलों का उपयोग किया जाना चाहिए, क्योंकि लोग धर्म के नाम पर कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। 

कृषि में विविधता समय की जरूरत :  ढिल्लों
सेमीनार के मुख्य प्रवक्ता पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वीसी बीएस ढिल्लों ने कहा कि पंजाब में दिनों दिन विकराल होती पानी की समस्या का मुख्य कारण धान की खेती है। जल संरक्षण के लिए कृषि में विविधता समय की जरूरत है। किसानों को धान की बजाए स्प्रिंग सीजन में मक्का और मूंग की खेती की ओर कदम बढ़ाना होगा। इसके अलावा पंजाब के किसानों में सन फ्लावर की खेती को प्रोत्साहन देना होगा। हालांकि किसानों को इसकी कीमत काफी कम मिलती है, जिसके कारण उन्होंने इससे मुंह मोड़ा है। इसलिए किसानों को सब्सिडी देना जरूरत बन गया है। हालांकि यह सब्सिडी प्राकृतिक स्त्रोतों के दोहन के लिए नहीं उपयोग होनी चाहिए।
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