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कश्मीर में बाढ़ का ऐसा मंजर कि दिल दहल जाए

Tue, 09 Sep 2014 05:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 09 Sep 2014 05:27 PM IST
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rescue operation of kashmir flood victims by air force

श्रीनगर की बाढ़ में फंसे 67 लोगों को एयरफोर्स के विमान एल-76 द्वारा सोमवार को सुरक्षित चंडीगढ़ पहुंचाया गया। यहां से उन्हें बस और रेल के माध्यम से उनके शहरों के लिए रवाना कर दिया गया।

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बाढ़ से बचकर निकले श्रीनगर के जवाहर नगर निवासी सेंट्रल बैंक के असिस्टेंट मैनेजर पूरन वर्मा अपनी सुरक्षित वापसी को मौत के मुंह से लौटने के समान बताते हैं। उन्होंने बताया कि वे जिस तीन मंजिला मकान में रह रहे थे, उसके दो फ्लोर पानी में डूब चुके थे। जान बचाने के लिए आसपास के लोग भी मकान में पहुंचे हुए थे।
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करीब 60 लोग उस समय छत पर मौजूद थे। पानी तीसरी मंजिल की ओर धीरे-धीरे बढ़ रहा था। उन्होंने बताया कि तीसरी मंजिल पर केवल एक टीन का शेड था। सभी लोग छत पर चढ़ गए थे ताकि रेस्क्यू आपरेशन के हेलीकाप्टर उन्हें देख सकें।
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लाल दुपट्टे ने बचाई जान

rescue operation of kashmir flood victims by air force

पूरन वर्मा ने बताया कि काफी देर बाद एयरफोर्स का एक हेलीकाप्टर उन्हें दिखाई। शेड पर चढ़े लोग एक लाल रंग का दुपट्टा लहराने लगे जिसे देखकर हेलिकाप्टर चालक मकान के ऊपर रुक गया।

हेलीकाप्टर से जवानों ने छत पर रस्सी फेंकी और लोगों को ऊपर चढ़ने का इशारा किया। रस्सी के सहारे करीब 40 लोग सुरक्षित हेलीकाप्टर में पहुंचे। पूरन वर्मा ने बताया कि कुछ लोग रह गए थे, लेकिन हेलीकाप्टर में जगह नहीं थी। अंधेरा भी होता जा रहा था। पूरन के मुताबिक, वे छह महीने पहले श्रीनगर आए थे। उनका सारा सामान बह गया।

गनीमत थी कि उनका परिवार दिल्ली में रहा। यदि एयरफोर्स के जवान नहीं होते तो वे जिंदा नहीं बचते। उनके पास पहनने के लिए कपड़े तक नहीं थे। एयरफोर्स के जवानों ने ही उन्हें कपड़े दिए।

बॉस और बच्चों का क्या हुआ पता नहीं

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बाढ़ से प्रभावित यूपी के जौनपुर निवासी देवेंद्र गिरी श्रीनगर के नूरबाग स्थित वागनपुरा स्थित जियो मिलर में असिस्टेंट सिविल इंजीनियर के पद पर तैनात हैं।

उन्होंने बताया कि उनके साथ यूपी के झांसी जिले के नीरज पंडित, बच्चे और उनकी पत्नी भी साथ थीं। हेलीकाप्टर आने पर नीरज पंडित नीचे अपने बच्चे और पत्नी को लेने चले गए, जब तक वे ऊपर आए तब तक हेलीकाप्टर में जगह नहीं बची थी और शाम भी होने लगी थी।

देवेंद्र के मुताबिक ,उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। उनके साथ क्या हुआ। कुछ भी पता नहीं लग पा रहा।

तैरती लकड़ियों के सहारे बचाई जान

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देवेंद्र गिरी व अन्य लोगों ने बताया कि वे दो मंजिला मकान में रहते थे। शनिवार रात दो बजे पता चला कि इलाके में पानी आ रहा है। रात में ही वे दूसरी मंजिल पर पहुंच गए, लेकिन अगले दिन रविवार सुबह पानी दूसरी मंजिल की छत तक पहुंच गया था।

उन्होंने व अन्य लोगों ने पानी पर तैर रही लकड़ियों और ड्रम बांधकर नाव बनाई और एक तीन मंजिला मकान में पहुंचे।

वहां से उन्हें हेलीकाप्टर से श्रीनगर एयरफोर्स स्टेशन पर पहुंचाया गया। वहां से चंडीगढ़ एयरफोर्स का विमान एएल-76 उन्हें लेकर सिटी ब्यूटीफुल पहुंचा।

ट्रेन से भेजा जाएगा गोरखपुर

rescue operation of kashmir flood victims by air force

श्रीनगर की बाढ़ में फंसे जिन 67 प्रवासियों को चंडीगढ़ एयरफोर्स के विमान से चंडीगढ़ लाया गया है, उनमें से 58 प्रवासी उत्तर-प्रदेश के गोरखपुर के हैं।

यूटी प्रशासन ने इन सभी लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए सोमवार को रेलवे से संपर्क किया। रेलवे की ओर से इन सभी प्रवासियों के लिए एक अलग विशेष कोच लगाकर उन्हें गोरखपुर भेजा जाएगा।

बाकी के नौ प्रवासियों के लिए उपायुक्त ने डिस्ट्रिक्ट रिलीफ फंड से दो दो हजार रुपये देने की घोषणा की है, ताकि यह लोग भी अपने घरों तक पहुंच सकें।

डायलिसिस के लिए पहुंचे चंडीगढ़

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श्रीनगर में बाढ़ से गंभीर मरीजों पर आफत टूट पड़ी है। श्रीनगर से एयरफोर्स के विमान से चंडीगढ़ पहुंचे 65 वर्षीय फतेह मोहम्मद की किडनी खराब है। हास्पिटल बंद हो जाने से उनकी डायलिसिस भी रुक गई है।

वे पिछले तीन दिन से परेशान थे। परिजन उन्हें श्रीनगर के कई हास्पिटल में लेकर गए, लेकिन जहां भी जाते, उन्हें हास्पिटल बंद ही मिलता। दिन-ब-दिन उनकी तबियत बिगड़ती जा रही थी।

परिजनों ने श्रीनगर एयरफोर्स के आफिसरों से बातचीत की। अधिकारियों ने तुरंत उन्हें अपने विमान पर चढ़ा दिया और उन्हें शाम साढ़े सात बजे चंडीगढ़ लेकर आ गए।

एयरफोर्स के रिलीफ कैंप में उन्हें नाश्ते करवाकर आर्मी के वैन से मोहाली के फोर्टिस हास्पिटल ले गए। गुलजार का कहना है कि श्रीनगर में दो मुख्य हास्पिटल हैं। फ्लोरेंस और खाइबर। दोनों के सेकेंड फ्लोर पानी से पूरी तरह से डूब चुके हैं।

जिंदगी खतरे में देखकर सैलरी छोड़ दी

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श्रीनगर के हुमामा चौक में अपने साथियों के साथ रह रहे अवधेश प्रसाद ने बताया कि वे पिछले छह दिन से फंसे हुए थे। स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई भी मदद नहीं मिल रही थी।

जब उन्हें पता चला कि श्रीनगर एयरफोर्स से प्रभावितों को लेकर चंडीगढ़ पहुंचाया जा रहा है तो वे सीधे वहां पहुंच गए। पेशे से राजमिस्त्री अवधेश ने बताया कि जिंदगी खतरे में देखकर वे अपनी डेढ़ महीने की सैलरी भी छोड़कर आ गए हैं।

जो रुपया बचा था, वो सारा सब्जियों और खाने-पीने की चीजों में खर्च हो गया। वहां पर आलू 100 रुपये किलो और चावल 60 रुपये किलो में बिक रहा है।

वायुसेना ने वि‌देशियों समेत 310 की बचाई जान

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चंडीगढ़ स्थित 12वीं एयरफोर्स ने एक रिलीफ कैंप खोला गया है। सोमवार को दो विमानों से श्रीनगर के 310 प्रभावितों को एयरफोर्स में लाया गया। प्रभावित लोगों की मदद कर रहे ग्रुप कैप्टन एसके बिष्ठ, अमिताभ भल्ला व एमके शर्मा ने बताया कि 12वी विंग में एक रिलीफ कैंप खोला गया है।

श्रीनगर से आने वाले लोगों को मेडिकल सुविधा, खाना-पीना और उन्हें बस अड्डे व रेलवे स्टेशन तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। सुबह विमान से 67 लोगों को लाया गया था, जबकि शाम को 243 लोगों को लाया गया।

इनमें 225 आम लोग, 14 आर्मी, दो एयरफोर्स और दो कोरियन नागरिक थे। इसके अलावा जिन लोगों के पास रुपये नहीं है, उनके किराए की भी व्यवस्था की जा रही है। लोकल प्रशासन से को-आर्डिनेट कर उनके लिए ट्रेन और बस की टिकट दिलवाई जा रही है।

'आज से एयरफोर्स की ही पूजा करेंगे'

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12वी विंग के रिलीफ कैंप में पहुंचे गुड़गांव निवासी रिटायर्ड मेजर जनरल एसके दीवान ने बताया कि बादामी बाग का कैन्टोनमेंट एरिया पूरा पानी-पानी हो गया है। बिजली और पानी पूरी तरह से ठप हो चुका है।

मोबाइल के सिग्नल भी नहीं मिल रहे हैं। इसके बावजूद आर्मी के जवान लोगों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एयरफोर्स की काबिलेतारीफ है। वे किसी को भी मना नहीं कर रहे हैं। वे प्रभावित लोगों से पूछ रहे हैं कि उन्हें कहां जाना है। यदि कोई कहता है कि वे पठानकोट जाना चाहते हैं तो वे उसे पठानकोट के विमान में बैठा देते हैं।

यदि किसी को जम्मू जाना है तो उसकी वे जम्मू में व्यवस्था करा देते हैं। जौनपुर निवासी देवेंद्र गिरी ने बताया कि वे आज से एयरफोर्स की ही पूजा करेंगे। यदि वे नहीं होते तो उनकी जिंदगी नहीं बचती।

करनाल के मॉडल टाउन निवासी रिटायर्ड मेजर बलजीत ने बताया कि वहां पर पीने के पानी की सबसे ज्यादा किल्लत हो गई है। साफ पानी के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। आर्मी वाले बोट से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं।

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