सियासी दांव: अशोक तंवर ने क्यों छोड़ी AAP? अब भाजपा में होंगे शामिल, पढ़ें- इस्तीफे का कांग्रेस कनेक्शन
हरियाणा में गुरुवार को आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा। अशोक तंवर ने पार्टी को अलविदा कह दिया। तंवर के आप छोड़ने की चर्चा पिछले दो सप्ताह से हरियाणा के सियासी गलियारों में थी। अब वह भाजपा का दामन थामेंगे। तंवर ने आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजे अपने इस्तीफे में इसकी वजह भी बताई है।
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आम आदमी पार्टी (आप) के हरियाणा चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष अशोक तंवर ने गुरुवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। तंवर ने अपने इस्तीफे के पीछे का कारण कांग्रेस-आप के गठबंधन को बताया है। वह शनिवार को नई दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में पार्टी में शामिल होंगे। हालांकि उनके इस्तीफा देने की चर्चा काफी दिन से चल रही थी। तंवर के इस्तीफे से आम आदमी पार्टी को एक महीने में यह दूसरा बड़ा झटका लगा। इससे पहले 28 दिसंबर को पार्टी के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव निर्मल सिंह और उनकी बेटी व उपाध्यक्ष चित्रा सरवारा इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
तंवर का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब पार्टी हरियाणा में लोकसभा के साथ विधानसभा का चुनाव लड़ने की तैयारी में पुरजोर तरीके से जुटी है। केजरीवाल को भेजे पत्र में तंवर ने लिखा है कि मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य और कांग्रेस के साथ आपके गठंधन को देखते हुए मेरी नैतिकता मुझे पार्टी की चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष के रूप में बने रहने की अनुमति नहीं देगी। इसलिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अन्य सभी जिम्मेदारियों से मेरा इस्तीफा स्वीकार करें।
पत्र में उन्होंने लिखा है कि वह हरियाणा व भारत के लोगों की भलाई के लिए अपना काम जारी रखेंगे। तंवर के इस्तीफ से पहले उनके कई सहयोगी भी पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। करीब डेढ़ हफ्ते पहले उनके सहयोगी व कुरुक्षेत्र से आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष जगबीर जोगनाखेड़ा ने पार्टी में तंवर की अनदेखी पर इस्तीफा दे दिया था। आप से जुड़े सूत्रों का दावा है कि वह पार्टी के टिकट पर राज्यसभा जाना चाहते थे। मगर पार्टी इस बात के लिए राजी नहीं हुई। इस वजह से तंवर नाराज चल रहे थे।
कभी राहुल गांधी के करीबियों में होती थी गिनती
अशोक तंवर ने साल 2022 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में पार्टी का दामन थामा था। इससे पहले वह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पार्टी में थे। टीएमसी से पहले वह कांग्रेस में थे, जहां उन्होंने एक लंबी पारी खेली थी। एक समय में उनकी गिनती राहुल गांधी के करीबियों में होती थी। राहुल गांधी ने ही उन्हें फरवरी 2014 में हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया था। कांग्रेस में वह राष्ट्रीय सचिव व यूथ कांग्रेस के प्रभारी भी रह चुके हैं। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच तकरार के बाद 2019 में विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। वह साल 2009 से 2014 तक सिरसा से सांसद भी रहे हैं।