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कोरोना की चपेट में आया परिवार तो 12 साल की बेटी ने दिया हौंसला, पढ़ें- वायरस पर जीत की प्रेरक कहानी

Sun, 31 May 2020 04:01 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 31 May 2020 04:01 PM IST
सार

  • बापूधाम निवासी रामनाथ चंदानिया का पूरा परिवार आ गया था कोरोना की चपेट में
  • छह सदस्यों की रिपोर्ट पॉजिटिव, चार को एहतियातन करना पड़ा क्वारंटीन
  • पीजीआई में 16 दिन चला इलाज, योग और मेडिटेशन से मिला हौसला

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पीजीआई में भर्ती के दौरान परिवार की फोटो।

विस्तार

हौसले भी किसी हकीम से कम नहीं होते हर तकलीफ में ताकत की दवा देते हैं... इन लाइनों को सच कर दिखाया है बापूधाम निवासी रामनाथ चंदानिया के परिवार ने। इनके घर के 1-2 नहीं 6 सदस्य कोरोना की चपेट में आकर अस्पताल पहुंच गए। चार सदस्यों को जिनकी रिपोर्ट निगेटिव थी, उन्हें दूसरी जगह क्वारंटीन कर दिया गया। हौसला दिखाया और सभी सदस्य कोरोना को हराकर घर पहुंचे। अब खुशी का माहौल है। 

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एक पल को लगा सब खत्म हो गया  
इंश्योरेंस एडवाइजर के पद पर कार्यरत रामनाथ के परिवार में वह, उनकी पत्नी और एक 12 साल की बिटिया के अलावा माता-पिता, उनका भाई और भाई का पूरा परिवार एक साथ एक ही मकान में रहता है। रामनाथ ने बताया कि 3 मई को परिवार के सभी सदस्यों का कोरोना टेस्ट हुआ। इसमें उनके अलावा भाई दीपक, तीन भतीजे क्रमश: यश, शुभम और मुकुल के साथ ही 12 साल की बेटी जिया की रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
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यह सबके लिए सदमे से कम नहीं था। अभी यह संकट टला भी नहीं था कि माता- पिता, भाई की पत्नी, मेरी पत्नी और भाई की बेटी को सेक्टर 47 में क्वारंटीन करने टीम घर पहुंच गई। घर में किसी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था सभी एक दूसरे की तरफ निराशा भरी निगाहों से देख रहे थे। उस समय मेरी बेटी जिया ने मुझे गले लगाया और कहा, चलो पापा कोरोना से जंग जीतकर आते हैं। उसकी वो बातें सुनकर मन में एक आशा की किरण जगी।    

एक दूसरे से करते हैं प्यार हम...

रामनाथ ने बताया कि घर के छह सदस्यों को बापूधाम से जीएमएसएच लाया गया। वहां से चार मई को पीजीआई में शिफ्ट कर दिया। मेरे अनुरोध पर पीजीआई प्रशासन ने मुझे और मेरी बेटी को एक ही कमरे में भर्ती किया था। उस समय हम सबके लिए एक -दूसरे का सहारा बनना सबसे जरूरी था, क्योंकि कोरोना में शारीरिक परेशानी से ज्यादा मरीज को मानसिक तनाव झेलना पड़ता है। कमरे में प्रतिदिन योगा, मेडिटेशन, एक्सरसाइज करते थे। खाली समय में प्रेरक कथाएं सुनते थे। वीडियो कॉल करके एक दूसरे में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते थे ।  

अब जागरूकता फैलाने में जुटा परिवार  
संक्रमित सदस्यों का चार से 20 मई तक पीजीआई में उपचार चला। इसके बाद 7 दिनों के लिए सूद धर्मशाला में क्वारंटीन किया गया। अवधि पूरी कर परिवार के सभी सदस्य 27 मई को घर पहुंचे। अपने आंगन में पहुंचकर सभी की आंखें मारे खुशी के छलक उठीं। उस दिन से हमने लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया। फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम के जरिए हम लोगों ने अपने वीडियो और मैसेज लोगों को शेयर किए। रामनाथ का कहना है कि कोरोना से डरने के बजाय हिम्मत से काम लेने की जरूरत है। क्योंकि डर के आगे ही जीत है। 

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