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दुर्लभ मामला: 43 साल वेतन और पेंशन के लिए लड़ी लड़ाई, हाईकोर्ट ने बैंक पर ठोका 10 लाख जुर्माना

Wed, 22 May 2024 08:54 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 22 May 2024 08:54 PM IST
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Rare case: fought for salary and pension for 43 years, High Court imposed fine of Rs 10 lakh on the bank.
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आश्रितों को 29 साल का वेतन और 10 साल की पेंशन राशि जारी करने का बैंक को आदेश दिया


चंडीगढ़। अपनी तरह के अनोखे और दुर्लभ मामले में कर्मचारी की मौत के दो साल बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 43 साल कानूनी लड़ाई लड़ने वाले को 29 साल के वेतन और 10 साल की पेंशन जारी करने का आदेश दिया है। कर्मचारी को इतने लंबे समय तक वेतन और पेंशन से महरूम रखने को दुर्लभ मामला मानते हुए हाईकोर्ट ने बैंक पर 10 लाख रुपये जुर्माना लगाते हुए कर्मी के कानूनी वारिसों में बराबर बांटने का आदेश दिया है।




विरेंद्र कुमार 1976 में द हिसार डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कॉ ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में सचिव के तौर पर नियुक्त हुए थे। आठ जनवरी 1981 में उन्हें 13,000 रुपये के घोटाले में बर्खास्त किया था। 1981 से लेकर 2017 तक याची को 3 बार बर्खास्त किया गया और तीनों बार आदेश रद्द हो गया। बैंक ने जांच के दौरान तीनों बार न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया, जिसके चलते आदेश रद्द होते गए। याचिका लंबित रहते 2022 में याची की मौत हो गई। हाईकोर्ट ने अब अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिका लंबित रहते न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए बैंक फैसला सुनाने में नाकाम रहा, अब याची मर चुका है और उसके खिलाफ जांच नहीं हो सकती। हाईकोर्ट ने कहा कि यह एक दुर्लभ मामला है जिसमें कर्मचारी को बिना गलती 43 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। इस दौरान वह वेतन और रिटायरमेंट के बाद की पेंशन से महरूम रहा और अपनी जान गंवा दी। इन 40 साल में केवल बैंक की गलती के कारण मामला लटकता रहा क्योंकि न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं हुआ। मामला सिविल कोर्ट, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न स्तरों पर लड़ा गया, इस दौरान याची के पास आय का कोई साधन नहीं था। उसने अभाव में जिंदगी बिताई और अपने परिवार को सुख सुविधाएं नहीं दे सका। याची को सम्मानजनक जीवन के अधिकार से वंचित किया गया और ऐसे में बैंक को इसका भुगतान करना होगा। हाईकोर्ट ने बैंक पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए यह राशि याची के कानूनी वारिसों को सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही 1983 से 2012 तक का पूरा वेतन और 2012 से 2022 तक की पेंशन की राशि भी आश्रितों को चार माह में देने का आदेश दिया है।
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