राम आएंगे: साध्वी ऋतंभरा की बात सुनते ही विवादित ढांचे की ओर बढ़े थे कार सेवक... चंडीगढ़ का रहा है योगदान
विश्व हिंदू परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष सुरेश राणा ने बताया कि वहां पर का जो दृश्य था वह देखते ही बनता था चारों तरफ राम भक्त ही राम भक्त दिखाई देते थे। भगवान श्रीराम जी के उदघोष ही सुनाई देते थे। उसके बाद चंडीगढ़ वापस आए तो यहां हमारे परिवार के सदस्य बहुत घबराए हुए थे।
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अयोध्या में आगामी 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। राम मंदिर के लिए हुए संघर्ष के साक्षी रहे चंडीगढ़ निवासियों में भी उत्साह का माहौल है।
विश्व हिंदू परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष सुरेश राणा ने बताया कि बात वर्ष 1992 की है। उस वर्ष विश्व हिंदू परिषद ने आह्वान किया कि अयोध्या जी में कारसेवा के लिए राम भक्त पूरे भारतवर्ष से पहुंचे।
मंदिरों में खाते थे लंगर
तब वह सेक्टर 20 के गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 11 वीं कक्षा के छात्र थे। कार सेवा के लिए बड़ी संख्या में रामभक्त चंडीगढ़ से भी गए थे। वे भी अयोध्या जी के लिए निकले। अंबाला से ट्रेन में बैठे और सीधे अयोध्या रेलवे स्टेशन पर उतरे। सुरेश राणा ने बताया कि वहां पहुंचकर एक सराय में रहे। सराय में तीन दिनों तक ठहरे। अयोध्या जी के मंदिरों में लंगर की व्यवस्था थी, वहां जाकर हम लंगर खाया करते थे।
साध्वी ऋतंभरा का प्रबोधन सुन निकल पड़े थे राम सेवक
फिर 6 दिसंबर 1992 का वो ऐतिहासिक दिन आया। उस दिन साध्वी ऋतंभरा का प्रबोधन लाखों भक्त सुन रहे थे। उनके प्रबोधन को सुनते-सुनते ही हमें खुद नहीं पता कि क्या हुआ। उस पंडाल में से राम भक्त उठ कर विवादित ढांचे की तरफ चल पड़े। उसे पंडाल में पूरे भारतवर्ष से लाखों की संख्या में राम भक्त थे। सभी जय श्री राम के उद्घोष लगाते हुए बावरी ढांचे की तरफ चल पड़े।
कोई प्लानिंग नहीं थी
सुरेश राणा ने बताया कि उस समय मैं 11वीं कक्षा का छात्र था। मुझे यह भी नहीं पता था कि हम लोग अयोध्या जा रहे हैं, तो वहां पर क्या होगा, कैसी परिस्थितियों होंगी, कुछ भी मालूम नहीं था। लेकिन इतना था कि संगठन ने निर्देश दिया था तो अयोध्या जी जाना है। मुझे लगता है कि ऐसी कोई हमारी तरफ से प्लानिंग भी नहीं थी कि जाकर विवादित ढांचे को गिराना है। वहां पर ऐसा माहौल तैयार हो गया और करीब 12 बजे बाबरी ढांचे को तोड़ने के लिए राम भक्त पंडाल से निकले और पांच बजे के आसपास गुंबद गिरा दिया गया था।
चंडीगढ़ पुलिस भी अयोध्या गई थी। उन लोगों की तलाश कर रहे थे। चंडीगढ़ के कुछ लोगों पर कानूनी कार्रवाई भी हुई परंतु भगवान श्री राम की कृपा से काफी राम भक्त उसमें से भी बच गए। सुरेश राणा ने बताया कि मेरे पास उस समय बजरंग दल खंड संयोजक के नाते दायित्व था। वह संगठन के साथ 1989 में जुड़ गए थे। हिंदू परिषद विश्व हिंदू परिषद का युवा आयाम बजरंग दल का उनके पास खंड संयोजक, प्रखंड संयोजक, महानगर कार्यकारिणी, महानगर संयोजक, विभाग संयोजक, फिर विश्व हिंदू परिषद चंडीगढ़ मंत्री यह सब दायित्व रहे। वर्तमान में वे विश्व हिंदू परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष हैं।
काम छोड़कर अयोध्या गए थे हरिशंकर मिश्रा
भाजपा चंडीगढ़ प्रदेश के पूर्व उपाध्यक्ष हरिशंकर मिश्रा भी राम मंदिर संघर्ष से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि बात वर्ष 30 अक्तूबर 1990 की है। सामान्य दिनों की तरह अपने काम काज में लगे थे। उन्हें राम मंदिर के संघर्ष के बारे में सूचना मिली। उन्होंने तुरंत अयोध्या जाने का मन बना लिया।
मिश्रा ने बताया कि वे हरियाणा के वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता समेत अन्य के साथ अयोध्या के लिए निकल पड़े। उन्होंने बताया कि जब वह उत्तर प्रदेश के टुंडला पहुंचे तो स्टेशन पर सभी कार सेवक जय श्री राम के नारे लगा रहे थे। यह देखते ही कई सारे पुलिसकर्मी उनके पास आए और सभी को गिरफ्तार कर लिया। जो जो व्यक्ति उनके साथ गए थे उन सभी को आगरा जेल ले जाया गया। तीन दिन तक वह आगरा के जेल में बंद रहे। इस दौरान जेल में मिलने के लिए उनसे आसपास के कई सनातनी पहुंचते थे और अपने अनुभव बताने के साथ अयोध्या में हो रहे घटनाक्रम की जानकारी देते थे। जेल से छूटने के बाद वह वहां के आर्य समाज मंदिर में रहे। हरिशंकर मिश्रा ने कहा कि इस पूरी यात्रा के दौरान कई परेशानियां झेली लेकिन मन एक बार भी नहीं डगमगाया।
उन्होंने बताया कि जिस दिन राम मंदिर को लेकर अदालत का फैसला आया उन्हें ऐसा लगा कि उनका सपना सच होने जा रहा है। इस खबर को सुनने के बाद वह इंडस्ट्रियल एरिया फेस वन स्थित श्री राम मंदिर गए और वहां पर अपने सामर्थ्य अनुसार दान पुण्य किया। अयोध्या जाने के लिए उनके साथ ज्ञानचंद गुप्ता के अलावा अनिल भल्ला, राजेंद्र जैन, पुरुषोत्तम महाजन, देशराज टंडन, आरएन गोयल , मुनीश्वर, चंद्रशेख, तिलकधारी सहित कई कार सेवक गए थे।