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पंजाब में अपनी झोपड़ी की जमीन के मालिक होंगे 60 हजार झुग्गीवासी, 30 साल तक नहीं बदलेगा
Wed, 11 Mar 2020 11:19 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 11 Mar 2020 11:19 AM IST
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पंजाब सरकार द्वारा पंजाब स्लम डवैलर्स (स्वामित्व अधिकार) एक्ट 2020 लागू करने से राज्य भर के लगभग 60,000 झुग्गी-झोपड़ी वालों को स्वामित्व अधिकारों के साथ-साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। हाल ही में विधानसभा में पास किया गया यह कानून शहरी झुग्गी-झोपड़ियों वाले क्षेत्रों की सूरत बदल देगा।
प्रवक्ता के अनुसार राज्य सरकार ने झुग्गी-झोपड़ी वालों को कानूनी प्रक्रिया द्वारा बेदखल करने की महंगी और भारी प्रक्रिया को चुनने के बजाय उनके लिए नागरिक सुविधाओं को यकीनी बनाने संबंधी कानून लाने का फैसला किया था। इसके अलावा झुग्गी-झोपड़ी वालों के कब्जे वाली जमीन के बड़े हिस्से से कोई राजस्व पैदा न होने से सरकार ने महसूस किया कि इसे खाली करना जरूरी नहीं है। इस समय राज्य के 29 शहरों में लगभग 60,000 झुग्गी-झोपड़ी हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि यह कानून शहरी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने में सहायक सिद्ध होगा। नया कानून किसी भी शहरी क्षेत्र में झुग्गी में रहने वालों को उनके कब्जे के अधीन जमीन पर निवास का अधिकार देगा। अगर जमीन के उसी टुकड़े पर उनका निपटारा नहीं हुआ तो उन्हें राज्य सरकार द्वारा वैकल्पिक जमीन पर सेटल किया जाएगा।
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प्रवक्ता के अनुसार राज्य सरकार ने झुग्गी-झोपड़ी वालों को कानूनी प्रक्रिया द्वारा बेदखल करने की महंगी और भारी प्रक्रिया को चुनने के बजाय उनके लिए नागरिक सुविधाओं को यकीनी बनाने संबंधी कानून लाने का फैसला किया था। इसके अलावा झुग्गी-झोपड़ी वालों के कब्जे वाली जमीन के बड़े हिस्से से कोई राजस्व पैदा न होने से सरकार ने महसूस किया कि इसे खाली करना जरूरी नहीं है। इस समय राज्य के 29 शहरों में लगभग 60,000 झुग्गी-झोपड़ी हैं।
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प्रवक्ता ने कहा कि यह कानून शहरी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने में सहायक सिद्ध होगा। नया कानून किसी भी शहरी क्षेत्र में झुग्गी में रहने वालों को उनके कब्जे के अधीन जमीन पर निवास का अधिकार देगा। अगर जमीन के उसी टुकड़े पर उनका निपटारा नहीं हुआ तो उन्हें राज्य सरकार द्वारा वैकल्पिक जमीन पर सेटल किया जाएगा।
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30 साल तक मालिकाना हक नहीं बदल सकेंगे
एक्ट के अनुसार, झुग्गी-झोपड़ी वालों को जमीन के स्वामित्व अधिकार विरासत में मिलेंगे लेकिन 30 साल के लिए तब्दील नहीं किए जा सकेंगे। इस एक्ट की एक खास विशेषता यह है कि अगर विवाह हुआ है तो उस केस में जमीन का मालिकाना हक पति-पत्नी के साझे नाम पर तबदील किया जाएगा।
इसके अलावा एक्ट के अनुसार यदि इस समय झुग्गी-झोपड़ी वालों के कब्जे वाली जमीन, राज्य सरकार या इसके कानूनी बोर्ड या निगम की है, तो सरकार की सहमति के बाद उन्हें वहां बसाया जा सकेगा। अगर झुग्गी निवासी ईडब्ल्यूएस श्रेणी से संबंधित है तो जमीन का राजस्व अधिकार मुफ्त दिया जाएगा जबकि गैर ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए स्वामित्व संबंधी अधिकार सरकार द्वारा समय-समय पर तय रेटों के अनुसार दिया जाएगा।
इसके अलावा एक्ट के अनुसार यदि इस समय झुग्गी-झोपड़ी वालों के कब्जे वाली जमीन, राज्य सरकार या इसके कानूनी बोर्ड या निगम की है, तो सरकार की सहमति के बाद उन्हें वहां बसाया जा सकेगा। अगर झुग्गी निवासी ईडब्ल्यूएस श्रेणी से संबंधित है तो जमीन का राजस्व अधिकार मुफ्त दिया जाएगा जबकि गैर ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए स्वामित्व संबंधी अधिकार सरकार द्वारा समय-समय पर तय रेटों के अनुसार दिया जाएगा।