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पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को दी जानकारी, बताया- 822 पुलिस मुलाजिमों पर दर्ज हैं एफआईआर
Sat, 10 Oct 2020 11:15 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 10 Oct 2020 11:15 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब पुलिस की विडंबना देखिए, जिसने एक एफआईआर दर्ज होने पर सिपाही को बर्खास्त कर दिया। जबकि उसके 822 पुलिस मुलाजिमों और अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज है और वे नौकरी कर रहे हैं। इनमें 30 से अधिक इंस्पेक्टर व एसआई तथा 170 से अधिक एएसआई हैं। शुक्रवार को पंजाब सरकार ने यह जानकारी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को सौंपी।
पंजाब पुलिस से बर्खास्त मोगा निवासी सुरजीत सिंह एक अपने खिलाफ विभाग द्वारा की गई कार्रवाई को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी। उसने बताया कि उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के चलते मोगा के एसएसपी ने उसे नौकरी से बर्खास्त करने के आदेश दिए, जबकि आईजी फिरोजपुर रेंज ने उसे बहाल कर दिया था। इसके बावजूद उसे बर्खास्त कर दिया गया।
याची ने हाईकोर्ट को बताया था कि पुलिस में ऐसे कई अधिकारी हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं और फिर भी वे सेवा में हैं। ऐसे में उसे बर्खास्त किया जाना पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है। याची ने कहा कि यदि अन्य पुलिसकर्मी और अधिकारी एफआईआर दर्ज होने के बावजूद सेवा में रह सकते हैं तो उसके साथ इस तरह का भेदभाव करना उसके सांविधानिक अधिकारों का हनन है।
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इसके बाद हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से ऐसे सभी पुलिस अधिकारी और कर्मियों की जानकारी मांगी थी जो अभी सेवा में हैं और उनके खिलाफ मामले दर्ज हैं। इसके साथ ही यह बताने को भी कहा गया था कि वह इस समय कहां तैनात हैं, उनके खिलाफ किस तरह के मामले दर्ज हैं और अब उनका स्टेटस क्या है।
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पंजाब पुलिस से बर्खास्त मोगा निवासी सुरजीत सिंह एक अपने खिलाफ विभाग द्वारा की गई कार्रवाई को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी थी। उसने बताया कि उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के चलते मोगा के एसएसपी ने उसे नौकरी से बर्खास्त करने के आदेश दिए, जबकि आईजी फिरोजपुर रेंज ने उसे बहाल कर दिया था। इसके बावजूद उसे बर्खास्त कर दिया गया।
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याची ने हाईकोर्ट को बताया था कि पुलिस में ऐसे कई अधिकारी हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं और फिर भी वे सेवा में हैं। ऐसे में उसे बर्खास्त किया जाना पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है। याची ने कहा कि यदि अन्य पुलिसकर्मी और अधिकारी एफआईआर दर्ज होने के बावजूद सेवा में रह सकते हैं तो उसके साथ इस तरह का भेदभाव करना उसके सांविधानिक अधिकारों का हनन है।
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इसके बाद हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से ऐसे सभी पुलिस अधिकारी और कर्मियों की जानकारी मांगी थी जो अभी सेवा में हैं और उनके खिलाफ मामले दर्ज हैं। इसके साथ ही यह बताने को भी कहा गया था कि वह इस समय कहां तैनात हैं, उनके खिलाफ किस तरह के मामले दर्ज हैं और अब उनका स्टेटस क्या है।