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हाईकोर्ट का सवाल, 90 फीसदी यात्री पंजाबी तो फ्लाइट्स दिल्ली से क्यों?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 21 Nov 2017 04:26 PM IST
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flight
- फोटो : getty images
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हाईकोर्ट का सवाल है कि दिल्ली से बर्मिंघम और टोरंटो जाने वाली फ्लाइट्स में 90 प्रतिशत यात्री पंजाब के होते हैं, फिर भी उड़ान दिल्ली से क्यों है। इसे पंजाब से क्यों नहीं उड़ाया जाता। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यह जवाब एयर इंडिया से मांगा है। कोर्ट को बताया गया था कि एयर इंडिया न तो खुद अमृतसर से सीधे बर्मिंघम और टोरंटों के लिए फ्लाइट्स शुरू कर रही है और न ही किसी अन्य एयरलाइन को यह फ्लाइट्स शुरू करने की इजाजत दे रही है।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन को हाईकोर्ट ने प्रतिवादी बनाते हुए दिल्ली से इंटरनेशनल फ्लाइट्स लेने वाले पंजाब के लोगों की पूरी जानकारी मांग ली है। जनहित याचिका सुनने वाली खंडपीठ ने कहा कि यह साफ है कि पंजाब के अधिकतर लोगों को दिल्ली से इंटरनेशनल फ्लाइट्स लेनी पड़ रही है। एयर इंडिया नेशनल कैरियर है तो अमृतसर से ही यह फ्लाइट्स शुरू क्यों नहीं कर सकता। इस पर एयर इंडिया ने कहा इसमें काफी घाटा हुआ था इसीलिए यह फ्लाइट्स बंद की गई थी।
हाईकोर्ट ने घाटे के आंकड़ों के बारे में पूछा तो बताया गया कि यह आंकड़े 2013 के हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इतने पुराने आंकड़ों पर फ्लाइट्स बंद नहीं की जा सकती। एयर इंडिया को इस पर दोबारा गौर करना चाहिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता संस्था अमृतसर विकास मंच ने अमृतसर से इंटरनेशनल फ्लाइट्स चलाने पर होने वाले घाटे का खर्च उठाने की पेशकश कर दी। मंच ने कहा कि वह यह घाटा पूरा करने को तैयार हैं। एक बार यहां से इंटरनेशनल फ्लाइट्स शुरू तो की जाए।
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संस्था के वकील अंकुर सोनी ने बताया कि जब अधिक धुंध के कारण दिल्ली की फ्लाइट्स को अमृतसर उतरना पड़ता है तो हैरत की बात है कि उस फ्लाइट के 80 प्रतिशत लोग अमृतसर में ही उतर जाते हैं। इससे साफ है कि ये लोग पंजाब के ही हैं। वह सप्ताह में बस तीन दिन इन फ्लाइट की मांग कर रहे हैं
दिल्ली एयरपोर्ट अधिक ले रहा फीस
अमृतसर विकास मंच ने हाईकोर्ट में एक अर्जी दायर कर यह भी बताया कि अमृतसर एयरपोर्ट यूडीएफ (यूजर डेवलपमेंट फीस) के रूप में 950 रुपये लेता है जबकि दिल्ली एयरपोर्ट 1500 रुपये। बावजूद इसके फ्लाइट्स का लाभ दिल्ली को मिल रहा है और बाकी एयरपोर्ट घाटे में चल रहे हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि दिल्ली ही एक ऐसा एयरपोर्ट है जो अराइवल और डिपार्चर दोनों के लिए यूडीएफ वसूल रहा है।
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डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन को हाईकोर्ट ने प्रतिवादी बनाते हुए दिल्ली से इंटरनेशनल फ्लाइट्स लेने वाले पंजाब के लोगों की पूरी जानकारी मांग ली है। जनहित याचिका सुनने वाली खंडपीठ ने कहा कि यह साफ है कि पंजाब के अधिकतर लोगों को दिल्ली से इंटरनेशनल फ्लाइट्स लेनी पड़ रही है। एयर इंडिया नेशनल कैरियर है तो अमृतसर से ही यह फ्लाइट्स शुरू क्यों नहीं कर सकता। इस पर एयर इंडिया ने कहा इसमें काफी घाटा हुआ था इसीलिए यह फ्लाइट्स बंद की गई थी।
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हाईकोर्ट ने घाटे के आंकड़ों के बारे में पूछा तो बताया गया कि यह आंकड़े 2013 के हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इतने पुराने आंकड़ों पर फ्लाइट्स बंद नहीं की जा सकती। एयर इंडिया को इस पर दोबारा गौर करना चाहिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता संस्था अमृतसर विकास मंच ने अमृतसर से इंटरनेशनल फ्लाइट्स चलाने पर होने वाले घाटे का खर्च उठाने की पेशकश कर दी। मंच ने कहा कि वह यह घाटा पूरा करने को तैयार हैं। एक बार यहां से इंटरनेशनल फ्लाइट्स शुरू तो की जाए।
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संस्था के वकील अंकुर सोनी ने बताया कि जब अधिक धुंध के कारण दिल्ली की फ्लाइट्स को अमृतसर उतरना पड़ता है तो हैरत की बात है कि उस फ्लाइट के 80 प्रतिशत लोग अमृतसर में ही उतर जाते हैं। इससे साफ है कि ये लोग पंजाब के ही हैं। वह सप्ताह में बस तीन दिन इन फ्लाइट की मांग कर रहे हैं
दिल्ली एयरपोर्ट अधिक ले रहा फीस
अमृतसर विकास मंच ने हाईकोर्ट में एक अर्जी दायर कर यह भी बताया कि अमृतसर एयरपोर्ट यूडीएफ (यूजर डेवलपमेंट फीस) के रूप में 950 रुपये लेता है जबकि दिल्ली एयरपोर्ट 1500 रुपये। बावजूद इसके फ्लाइट्स का लाभ दिल्ली को मिल रहा है और बाकी एयरपोर्ट घाटे में चल रहे हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि दिल्ली ही एक ऐसा एयरपोर्ट है जो अराइवल और डिपार्चर दोनों के लिए यूडीएफ वसूल रहा है।