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Chandigarh: अनुकंपा के आधार पर विवाहित बेटी भी नौकरी के लिए पात्र, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

Wed, 08 Feb 2023 10:11 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 08 Feb 2023 10:11 AM IST
सार

कई याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि सरकार को अपनी नीति तैयार करने का हक है और न्यायपालिका उससे यह हक नहीं छीनती लेकिन जब नीति में भेदभाव हो तो न्यायपालिका को दखल देना पड़ता है।

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Punjab-Haryana High Court that married daughter is equally eligible for job on compassionate ground
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद अहम फैसला सुनाते हुए पंजाब सरकार के उस फैसले को असांविधानिक करार दिया जिसके तहत विवाहित बेटी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए अपात्र करार दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि विवाहित बेटी भी उतनी ही पात्र है जितना विवाहित बेटा।

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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष ऐसी याचिकाएं बड़ी संख्या में पहुंच रहीं थी जहां विवाहित बेटी को पंजाब सरकार द्वारा अपात्र घोषित करने के चलते उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही थी। हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करने का फैसला लिया और सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया।
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सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अपनी नीति का समर्थन करते हुए कहा कि विवाहित बेटी अपने पिता पर आश्रित नहीं होती है और ऐसे में वह अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए पात्र नहीं है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि विवाहित बेटा परिवार से अलग होकर अपनी पत्नी के साथ रह तो वह पात्र और जब बेटी अपने पति के साथ रहे तो अपात्र कैसे।
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सरकार जब भेदभाव करती है तो न्यायपालिका को दखल देना पड़ता है
कोर्ट ने कहा कि सरकार को अपनी नीति तैयार करने का हक है और न्यायपालिका उससे यह हक नहीं छीनती लेकिन जब नीति में भेदभाव हो तो न्यायपालिका को दखल देना पड़ता है। इस मामले में केवल लिंग के आधार पर विवाहित बेटी को सरकार ने अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए अयोग्य करार दिया है। यदि विवाहित बेटे को भी अयोग्य करार दिया गया होता तो पंजाब सरकार की यह नीति संविधान के अनुरूप सही होती।

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