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पीयू कर्मचारी को बड़ा झटका, मकान खाली करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
Sat, 20 Jun 2020 12:44 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 20 Jun 2020 12:44 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी से 2018 में रिटायर कर्मचारी द्वारा यूनिवर्सिटी का मकान खाली करने संबंधी यूनिवर्सिटी के आदेश को पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। उसने याचिका में कहा था कि यूनिवर्सिटी जब तक उसे रिटायरमेंट बेनिफिट नहीं दे देती तब तक मकान उसके पास रहना चाहिए। लेकिन उसकी अपील वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए सुरेंद्र कुमार थिंड ने बताया कि वह पंजाब यूनिवर्सिटी में सरकारी मकान में रहता है। पंजाब यूनिवर्सिटी ने अभी तक उसे रिटायरमेंट से जुड़े लाभ जारी नहीं किए हैं। बिना यह लाभ जारी किए उसे मकान खाली करने के आदेश जारी कर दिए हैं, जिसे खारिज किया जाना चाहिए।
जवाब में पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ता के रिटायरमेंट बेनिफिट की राशि लगभग 22 लाख रुपये है, जबकि यूनिवर्सिटी को कोर्ट के आदेश के अनुरूप उससे 39 लाख रुपए वसूल करने हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि वह रिटायरमेंट बेनिफिट और रिकवरी के बीच के झमेले में नहीं फंसना चाहता।
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याचिकाकर्ता ऐसा कोई भी आदेश कोर्ट के समक्ष पेश करने में नाकाम रहा है जिसमें किसी कोर्ट ने ऐसा कहा हो कि जब तक रिटायरमेंट बेनिफिट जारी नहीं किए जाते, तब तक सरकारी मकान पर कर्मचारी कब्जा रख सकता है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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याचिका दाखिल करते हुए सुरेंद्र कुमार थिंड ने बताया कि वह पंजाब यूनिवर्सिटी में सरकारी मकान में रहता है। पंजाब यूनिवर्सिटी ने अभी तक उसे रिटायरमेंट से जुड़े लाभ जारी नहीं किए हैं। बिना यह लाभ जारी किए उसे मकान खाली करने के आदेश जारी कर दिए हैं, जिसे खारिज किया जाना चाहिए।
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जवाब में पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ता के रिटायरमेंट बेनिफिट की राशि लगभग 22 लाख रुपये है, जबकि यूनिवर्सिटी को कोर्ट के आदेश के अनुरूप उससे 39 लाख रुपए वसूल करने हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि वह रिटायरमेंट बेनिफिट और रिकवरी के बीच के झमेले में नहीं फंसना चाहता।
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याचिकाकर्ता ऐसा कोई भी आदेश कोर्ट के समक्ष पेश करने में नाकाम रहा है जिसमें किसी कोर्ट ने ऐसा कहा हो कि जब तक रिटायरमेंट बेनिफिट जारी नहीं किए जाते, तब तक सरकारी मकान पर कर्मचारी कब्जा रख सकता है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।