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हाईकोर्ट की टिप्पणी, महिला की शिकायत पर ससुराल वालों को आरोपी बनाने की प्रवृत्ति बंद हो
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 13 Oct 2018 03:03 PM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
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अंडे बनवाना, वीरवार का व्रत नहीं रखने देना, टीवी देखने से मना करना व घर में बाहरी लोगों के आने पर रोक लगाने जैसे आरोप लगाकर ननद के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना के आरोप में दर्ज एफआईआर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नियों द्वारा प्रताड़ना के मामले में दर्ज एफआईआर में ससुराल के ज्यादा से ज्यादा लोगों को लपेटने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए। इसके लिए पुलिस को जागरूक करने की जरूरत है।
मामले में जींद निवासी महिला ने याचिका दाखिल करते हुए कहा कि उसका भाई व भाभी उसके सरकारी आवास में दिल्ली में रहते थे और इसी दौरान उसकी भाभी ने याची के भाई और याची पर क्रूरता मामले में एफआईआर दर्ज करवा दी। शिकायत में भाभी ने कहा कि याची उसके मामले में क्रूर थी। वह प्रताड़ित करती थी। घर में बाहरी लोगों को आने से रोकती थी। घर का लैंड लाइन नंबर देने से मना कर दिया था।
टीवी नहीं देखने देती थी, मंगलवार को अंड़े बनाने को मजबूर करती थी तथा वीरवार का व्रत नहीं रखने देती थी। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए एफआईआर रद्द करने की याची ने अपील की थी। हाईकोर्ट ने याचिका को मंजूर करते हुए कहा कि जो आरोप लगाए गए हैं उसे कैसे क्रूरता कहा जा सकता है। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर चालान भी पेश कर दिया। इस मामले में पुलिस संवेदनहीन रही और अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रही।
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हाईकोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा के मामले में घर के सभी सदस्यों को लपेटने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए। इन आरोपों से साफ साबित होता है कि ये आरोप केवल ज्यादा से ज्यादा लोगों के नाम एफआईआर में शामिल करने के लिए लगाए गए हैं। पुलिस ने भी बिना जांच के इस प्रकार के केस को आगे बढ़ाया जो गलत है। कोर्ट ने इस याचिका को मंजूर करते हुए पुलिस को संवेदनशील होने और इस तरह की प्रवृत्ति पर रोक की नसीहत दी।
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मामले में जींद निवासी महिला ने याचिका दाखिल करते हुए कहा कि उसका भाई व भाभी उसके सरकारी आवास में दिल्ली में रहते थे और इसी दौरान उसकी भाभी ने याची के भाई और याची पर क्रूरता मामले में एफआईआर दर्ज करवा दी। शिकायत में भाभी ने कहा कि याची उसके मामले में क्रूर थी। वह प्रताड़ित करती थी। घर में बाहरी लोगों को आने से रोकती थी। घर का लैंड लाइन नंबर देने से मना कर दिया था।
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टीवी नहीं देखने देती थी, मंगलवार को अंड़े बनाने को मजबूर करती थी तथा वीरवार का व्रत नहीं रखने देती थी। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए एफआईआर रद्द करने की याची ने अपील की थी। हाईकोर्ट ने याचिका को मंजूर करते हुए कहा कि जो आरोप लगाए गए हैं उसे कैसे क्रूरता कहा जा सकता है। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर चालान भी पेश कर दिया। इस मामले में पुलिस संवेदनहीन रही और अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रही।
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हाईकोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा के मामले में घर के सभी सदस्यों को लपेटने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए। इन आरोपों से साफ साबित होता है कि ये आरोप केवल ज्यादा से ज्यादा लोगों के नाम एफआईआर में शामिल करने के लिए लगाए गए हैं। पुलिस ने भी बिना जांच के इस प्रकार के केस को आगे बढ़ाया जो गलत है। कोर्ट ने इस याचिका को मंजूर करते हुए पुलिस को संवेदनशील होने और इस तरह की प्रवृत्ति पर रोक की नसीहत दी।