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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab-Haryana High Court disposed probe petition in leak of information withdrawal of VIP security in Punjab

Highcourt News: वीआईपी सुरक्षा कटौती की जानकारी लीक होने के मामले की याचिका का निपटारा, डीजीपी लेंगे निर्णय

Fri, 22 Jul 2022 10:01 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 22 Jul 2022 10:01 AM IST
सार

याची ने कहा कि सरकार ने सुरक्षा में कटौती के मामले को राजनीतिक रूप से भुनाने का प्रयास किया। ऐसा करके सरकार ने इन वीआईपी लोगों के साथ ही पंजाब की सुरक्षा को भी खतरे में डाला। जिन लोगों को खतरा था उन्हें ही सुरक्षा दी गई थी।

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Punjab-Haryana High Court disposed probe petition in leak of information withdrawal of VIP security in Punjab
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

पंजाब सरकार द्वारा 400 से अधिक वीआईपी लोगों की सुरक्षा वापस लेने से जुड़ी जानकारी लीक करने के मामले में सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निपटारा कर दिया। हाईकोर्ट ने याची की मांग पर पंजाब के डीजीपी को दो माह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है।

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चंडीगढ़ निवासी सतबीर सिंह वालिया ने हाईकोर्ट को बताया कि चुनाव के बाद आई नई सरकार ने वीवीआईपी कल्चर में कटौती के नाम पर बिना तय प्रक्रिया का पालन किए कई वीआईपी लोगों की सुरक्षा में कटौती कर दी। इसके बाद कटौती से जुड़ी जानकारी लीक हो गई और इसका तत्काल प्रभाव गीतकार सिद्धू मूसेवाला की हत्या के रूप में देखा गया। 
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याची ने कहा कि सरकार ने सुरक्षा में कटौती के मामले को राजनीतिक रूप से भुनाने का प्रयास किया। ऐसा करके सरकार ने इन वीआईपी लोगों के साथ ही पंजाब की सुरक्षा को भी खतरे में डाला। जिन लोगों को खतरा था उन्हें ही सुरक्षा दी गई थी और बाद में सुरक्षा में कटौती कर दी गई। इस कटौती के बारे में जानकारी मीडिया तक में साझा हुई जिसके कारण इन लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। 
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याची ने कहा कि इस सूचना को लीक करने की जांच होनी चाहिए। इस बारे में याची ने मांगपत्र भी सौंपा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में याची को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। याचिका का निपटारा करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के डीजीपी को याची की मांग पर दो माह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है।

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