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पंजाब विधानसभा में भी गूंजा था बंटवारा, 1937 से अब तक की कार्यवाही ई-पोर्टल पर अपलोड है
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 01 Nov 2018 02:04 PM IST
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फाइल फोटो
देश के बंटवारे से पहले संयुक्त पंजाब की विधानसभा लाहौर में थी और इसमें देश के बंटवारे की आवाज गूंजी थी। 1937 से लेकर अब तक का रिकॉर्ड ई-पोर्टल पर अपलोड है। बंटवारे से दस साल पहले तक पंजाब विधानसभा के विभिन्न सत्रों की कार्यवाही को खंगाले तो भारत के विभाजन के पक्ष और विपक्ष में सदन के भीतर जबरदस्त बहस चलती थी।
11 मार्च, 1941 को संयुक्त पंजाब के मुख्यमंत्री सर सिकंदर हयात खान ने विधानसभा में कहा कि उनका पाकिस्तान का नजरिया जिन्ना के सिद्धांत मुख्य रूप से अलग है। वह भारत में एक ओर हिंदू राज और दूसरी ओर मुस्लिम राज के आधार पर वितरण के सख्त खिलाफ हैं। सदन की कार्यवाही के रिकार्ड में दर्ज ऐसी कई बहस को मौजूदा भारतीय पंजाब की विधानसभा के ई-पोर्टल पर पढ़ा जा सकता है।
पेपरलेस कार्यप्रणाली की ओर कदम बढ़ा रही पंजाब विधानसभा ने राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन पोर्टल पर डाटा आनलाइन करने में न सिर्फ देश की अन्य विधानसभाओं को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि पंजाब विधानसभा में 1937 से लेकर अब तक के सत्रों की कार्यवाही को ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया है।
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इसमें सदन में विभिन्न मुद्दों पर हुई बहस, सदन के सदस्यों की जानकारी व उनके संपर्क नंबर, सदन की कार्यप्रणाली के नियम व शर्तें, सदन में पेश किए जाने वाले कागजात, प्रश्नकाल में रखे गए प्रश्न और उनके जवाब, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और स्थगनादेश आदि सभी कार्यवाही के हिस्सों को पोर्टल पर दस्तावेज के रूप में अपलोड किया जा रहा है। खास बात है कि इस पोर्टल को विधानसभा के सदस्यों के अलावा आम लोग भी अपने मोबाइल पर एप डाउनलोड कर पढ़ सकते हैं।
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11 मार्च, 1941 को संयुक्त पंजाब के मुख्यमंत्री सर सिकंदर हयात खान ने विधानसभा में कहा कि उनका पाकिस्तान का नजरिया जिन्ना के सिद्धांत मुख्य रूप से अलग है। वह भारत में एक ओर हिंदू राज और दूसरी ओर मुस्लिम राज के आधार पर वितरण के सख्त खिलाफ हैं। सदन की कार्यवाही के रिकार्ड में दर्ज ऐसी कई बहस को मौजूदा भारतीय पंजाब की विधानसभा के ई-पोर्टल पर पढ़ा जा सकता है।
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पेपरलेस कार्यप्रणाली की ओर कदम बढ़ा रही पंजाब विधानसभा ने राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन पोर्टल पर डाटा आनलाइन करने में न सिर्फ देश की अन्य विधानसभाओं को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि पंजाब विधानसभा में 1937 से लेकर अब तक के सत्रों की कार्यवाही को ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया है।
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इसमें सदन में विभिन्न मुद्दों पर हुई बहस, सदन के सदस्यों की जानकारी व उनके संपर्क नंबर, सदन की कार्यप्रणाली के नियम व शर्तें, सदन में पेश किए जाने वाले कागजात, प्रश्नकाल में रखे गए प्रश्न और उनके जवाब, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और स्थगनादेश आदि सभी कार्यवाही के हिस्सों को पोर्टल पर दस्तावेज के रूप में अपलोड किया जा रहा है। खास बात है कि इस पोर्टल को विधानसभा के सदस्यों के अलावा आम लोग भी अपने मोबाइल पर एप डाउनलोड कर पढ़ सकते हैं।
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इस संबंध में पंजाब विधानसभा की सचिव शशि लखनपाल मिश्रा ने बताया कि ई-विधान प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार द्वारा संसदीय मामलों के मंत्रालय को नोडल मंत्रालय बनाया गया है। उन्होंने कहा कि चूंकि पंजाब विधानसभा ने डिजिटलाइजेशन का काम काफी पहले शुरू कर दिया था, इसलिए उसे ई-विधान पोर्टल से जुड़ने में कोई कठिनाई नहीं हुई और तैयार डाटा तुरंत अपलोड करने का काम शुरू कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि गोवा और हिमाचल प्रदेश को छोड़ देश के अन्य राज्यों में यह काम अभी आरंभिक चरण में जबकि पंजाब में जल्दी ही पोर्टल को अब तक जानकारी से अपडेट दिया जाएगा। देश की आजादी के पहले की पंजाब विधानसभा से जुड़ा कार्यवाही रिकार्ड भी डाटा के रूप में तैयार किए जाने के बारे में विधानसभा सचिव ने बताया कि पुराने सारे दस्तावेज उर्दू भाषा है, जिन्हें पंजाबी में अनुवाद करके पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि एनआईसी के जरिए कार्यान्वित किए जा रहे इस प्रोजेक्ट के लिए राज्यों को 40-50 कर्मचारियों का स्टाफ भी मुहैया कराया जाएगा और राज्यों को इस प्रोजेक्ट के लिए 60:40 के अनुपात में फंड दिया जाएगा। पंजाब विधानसभा ई-विधान पोर्टल से जुड़ने में भले ही सबसे आगे रही है, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक उसे निर्धारित फंड मुहैया नहीं कराया है। विधानसभा सचिव ने बताया कि रिकार्ड और दस्तावेज को डाटा में तबदील करने का सारा काम पंजाब विधानसभा द्वारा अपने संसाधनों से ही किया गया है।
डाटा और अन्य दस्तावेज़ ऑनलाइन करने से जहां समय और मानवीय साधनों की बचत होगी, वहीं काम करने की क्षमता भी बढ़ेगी। पंजाब विधानसभा को इस कार्य के लिए पुरस्कृत किया गया है। विधानसभा का पूरा स्टाफ इस काम को जल्द पूरा करने के लिए सहयोग दे रहा है।
राणा केपी सिंह
- स्पीकर, पंजाब विधानसभा
उन्होंने बताया कि गोवा और हिमाचल प्रदेश को छोड़ देश के अन्य राज्यों में यह काम अभी आरंभिक चरण में जबकि पंजाब में जल्दी ही पोर्टल को अब तक जानकारी से अपडेट दिया जाएगा। देश की आजादी के पहले की पंजाब विधानसभा से जुड़ा कार्यवाही रिकार्ड भी डाटा के रूप में तैयार किए जाने के बारे में विधानसभा सचिव ने बताया कि पुराने सारे दस्तावेज उर्दू भाषा है, जिन्हें पंजाबी में अनुवाद करके पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि एनआईसी के जरिए कार्यान्वित किए जा रहे इस प्रोजेक्ट के लिए राज्यों को 40-50 कर्मचारियों का स्टाफ भी मुहैया कराया जाएगा और राज्यों को इस प्रोजेक्ट के लिए 60:40 के अनुपात में फंड दिया जाएगा। पंजाब विधानसभा ई-विधान पोर्टल से जुड़ने में भले ही सबसे आगे रही है, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक उसे निर्धारित फंड मुहैया नहीं कराया है। विधानसभा सचिव ने बताया कि रिकार्ड और दस्तावेज को डाटा में तबदील करने का सारा काम पंजाब विधानसभा द्वारा अपने संसाधनों से ही किया गया है।
डाटा और अन्य दस्तावेज़ ऑनलाइन करने से जहां समय और मानवीय साधनों की बचत होगी, वहीं काम करने की क्षमता भी बढ़ेगी। पंजाब विधानसभा को इस कार्य के लिए पुरस्कृत किया गया है। विधानसभा का पूरा स्टाफ इस काम को जल्द पूरा करने के लिए सहयोग दे रहा है।
राणा केपी सिंह
- स्पीकर, पंजाब विधानसभा