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Punjab Budget Session: सरकार ने पेश किया श्वेत पत्र, मुफ्त तोहफों और सब्सिडी से कर्ज जाल में फंसा पंजाब

Sat, 25 Jun 2022 10:09 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 25 Jun 2022 10:09 PM IST
सार

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने श्वेत पत्र में प्रदेश की राजकोषीय गड़बड़ी के लिए पिछली सरकारों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। श्वेत पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि आज पंजाब आर्थिक संकट और कर्ज के जाल में फंस गया है।

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Punjab Government present white paper on state financial situation 
पंजाब विधानसभा में बोलते सीएम मान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब राज्य आर्थिक संकट और कर्ज के गंभीर जाल में फंस गया है। यह बात शनिवार को राज्य विधानसभा में सरकार की ओर से राज्य की वित्तीय स्थिति पर पेश किए गए श्वेत पत्र में कही गई। सरकार ने इसके लिए जहां पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं प्रदेश के सीएलयूज में धन का दुरुपयोग और आम जनता को चुनावों के दौरान मुफ्त तोहफे के अलावा विभिन्न मदों में सब्सिडी को भी बड़ा कारण माना है। उल्लेखनीय है कि पिछली सरकारों की भांति ही आम आदमी पार्टी की सरकार भी जनता को मुफ्त तोहफे दे रही है। पंजाब में किसानों को मुफ्त बिजली की सुविधा प्रकाश सिंह बादल ने अपने मुख्यमंत्री काल में दी थी, जिसे बाद में आई सभी सरकारों ने भी जारी रखा।

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वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने श्वेत पत्र में प्रदेश की राजकोषीय गड़बड़ी के लिए पिछली सरकारों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। श्वेत पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि आज पंजाब आर्थिक संकट और कर्ज के जाल में फंस गया है। आवश्यक सुधारों को लागू करने के बजाय पिछली सरकारें राजकोषीय लापरवाही में व्यस्त रहीं, जैसा कि गैर-उत्पादक राजस्व व्यय में अनियंत्रित बढ़ोतरी, मुफ्त तोहफे और गैर-सब्सिडी। पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान विकास और इसके संभावित कर व गैर-कर राजस्व की वसूली के लिए पूंजी और सामाजिक क्षेत्र के निवेश में लगातार गिरावट दर्ज हुई। यह भी गौरतलब है कि सोमवार को हरपाल चीमा सदन में वर्ष 2022-23 का बजट पेश करने वाले हैं। उनका कहना है कि वित्तीय प्रबंध सही ढंग से न चलाने, आमदनी के स्रोत न बढ़ाने और केंद्रीय करों पर ही निर्भरता बनाए रखने के कारण राज्य कर्ज के जाल में फंस गया है।
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73 पन्नों के इस दस्तावेज में कहा गया है कि राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र, पंजाब सरकार के जटिल मुद्दों व समस्याओं को सरल बनाने का एक प्रयास है, जो अतीत की सरकारों की नासमझी के कारण समय के साथ गंभीर हो गए हैं। इसमें कहा गया है कि पंजाब का मौजूदा प्रभावी बकाया कर्ज 2.63 लाख करोड़ रुपये है, जो एसजीडीपी का 45.88 फीसदी है। यह भी कहा गया है कि राज्य के मौजूदा कर्ज इंडिकेटर शायद देश में सबसे खराब हैं, जो इसे अत्यंत गहरे कर्ज के जाल में धकेल रहे हैं।

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पांच वर्षों में 44.23 फीसदी बढ़ा राज्य का कर्ज

श्वेत पत्र में बताया गया है कि राज्य का बकाया कर्ज 1980-81 में 1009 करोड़ रुपये से बढ़कर 2011-12 में 83099 करोड़ रुपये और 2021-22 में 263265 करोड़ रुपये हो गया है। बीते पांच वर्षों में राज्य का कर्ज 44.23 फीसदी बढ़ा है, जो प्रति वर्ष 7.60 फीसदी की चक्रवृद्धि विकास दर में तब्दील हो गया है। 


पंजाब पर चढ़े कर्ज के साथ ही विभिन्न बोर्ड-निगमों ने जो 55000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया हुआ है, उसमें से 22294 करोड़ रुपये के कर्ज पर सरकार ने गारंटी दी हुई है। श्वेत पत्र में कहा गया है कि 14वें वित्तीय आयोग के अनुसार, पंजाब का कर्ज हर साल 10 फीसदी की सालाना दर से बढ़ रहा है। उदय योजना में 15268 करोड़ रुपये के पावरकॉम के कर्ज व ब्याज को अपने ऊपर लेने से 2030-31 तक 19605 करोड़ रुपये अदा करने होंगे। इसी तरह कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) के गैप को बादल सरकार की ओर से पंजाब पर ही डलवा देने से 57358 करोड़ रुपये अदा करना होंगे। 

जीएसटी लागू होने से पंजाब को वित्तीय नुकसान हुआ है। खरीद कर, बुनियादी ढांचा विकास फीस आदि बंद हो गई हैं, जिससे यह लगभग 6791 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जीएसटी मुआवजा राशि जून 2022 में खत्म होने के कारण अब पंजाब को प्रति वर्ष 14 से 15 हजार करोड़ रुपये कम मिलेंगे। श्वेत पत्र में अंगुली उठाते हुए कहा गया है कि पिछली सरकारों ने राज्य के वित्त के प्रबंधन में राजकोषीय विवेकशीलता का दावा तो किया, लेकिन सरकार की लंबित देनदारियों के निर्वहन की जिम्मेदारी कभी नहीं उठाई। यह भी कहा गया है कि राज्य एक शास्त्रीय कर्ज जाल में फंसा है और सरकार की ओर से अनुबंधित वार्षिक सकल ऋण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पुराने कर्ज और ब्याज भुगतान में चला जाता है, न कि राज्य के भावी विकास और समृद्धि में।

प्रति व्यक्ति आय में 11वें स्थान पर पिछड़ा पंजाब

लंबे समय तक पूरे देश में प्रति व्यक्ति आय में नंबर वन रहा पंजाब श्वेत पत्र के अनुसार अब यह कई अन्य राज्यों से पीछे है और शीर्ष से 11 वें स्थान पर आ गया है। पंजाब को उसके पुराने गौरव के दिनों में पुनर्जीवित करने के लिए, प्रत्यक्ष राजस्व वृद्धि उपायों के साथ-साथ व्यय प्रतिबद्धताओं पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। श्वेत पत्र सुधारात्मक उपायों के बीच यह सुझाव भी देता है कि राज्य के वित्त को मजबूत करने, आर्थिक पुनरुद्धार और विकास को बढ़ावा देने और कर्ज पर निर्भरता कम करने के लिए जमीनी स्तर पर संरचनात्मक और नीतिगत पहल की आवश्यकता है। 

पिछली सरकार छोड़ गई 24351.29 करोड़ की देनदारी

श्वेत पत्र में कहा गया है कि यह दुखद है कि पिछली सरकार ने भी अपने पूर्ववर्तियों का ही अनुसरण किया और सत्ता छोड़ते समय 24351.29 करोड़ रुपये की तत्काल व मध्यम अवधि की चौंका देने वाली देनदारियां छोड़ दीं, जिन्हें आने वाले वर्षों में नई सरकार को वहन करना होगा। इस 24351.29 करोड़ की कुल देनदारियों में 13759 करोड़ रुपये तो केवल छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक कर्मचारियों की बढ़े वेतन के हैं, जो 2016 से देय हैं। इसके अलावा 7117 करोड़ रुपये पावरकॉम को दी जाने वाली सब्सिडी के हैं। श्वेत पत्र में कहा गया है कि पिछली सरकार को 2021-22 में खनन नीति से मात्र 137 करोड़ रुपये की ही आमदनी हुई। वहीं आटा दाल योजना के तहत 1747.57 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया। अब यह राशि 2274.43 करोड़ रुपये हो गई है। इन देनदारियों में पनसप का 1395 करोड़, मार्कफैड का 554.43 करोड़ रुपये और पंजाब एग्रो का 325 करोड़ रुपये शामिल है।
 

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