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पंजाब में धार्मिक स्थलों में प्रसाद-लंगर बांटने की अनुमति मिली, गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना

Wed, 10 Jun 2020 12:32 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 10 Jun 2020 12:32 AM IST
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Punjab government allows langar, prasad distribution at religious places

पंजाब सरकार ने सूबे के धार्मिक स्थलों में प्रसाद और लंगर बांटने पर लगी पाबंदी हटा ली है। राज्य के गृह विभाग ने इस संबंध मंगलवार को अधिसूचना जारी कर दी। सरकार ने यह फैसला केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद लिया है। 

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अनलॉक 1.0 के तहत केंद्र सरकार ने धार्मिक स्थल खोलने की अनुमति तो दी थी लेकिन वहां एक समय में 20 से अधिक लोगों के जमा होने और किसी तरह का लंगर-प्रसाद आदि बांटने पर रोक लगा दी थी। पंजाब सरकार की ओर से यह रोक हटाने के लिए केंद्र से आग्रह किया गया, जिसके जवाब में केंद्र ने प्रसाद और लंगर बांटने की अनुमति दे दी है।
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पंजाब के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि धार्मिक स्थलों में सामुदायिक रसोई, लंगर और प्रसाद बांटने की अनुमति इन शर्तों पर दी गई है कि धार्मिक स्थल में सोशल डिस्टेंसिंग और लंगर व प्रसाद तैयार करने समय सफाई का पूरा ध्यान रखा जाए। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 4 जून से धार्मिक स्थलों के संबंध में लागू किए गए अन्य नियम और बंदिशें पहले की तरह प्रभावी रहेंगी। कंटेनमेंट जोन में स्थापित धार्मिक स्थल फिलहाल बंद रहेंगे।
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पंजाब में राजनीतिक मुद्दा बन गया था प्रसाद
केंद्र सरकार द्वारा प्रसाद और लंगर वितरण पर रोक लगाने का फैसला पंजाब में राजनीतिक मुद्दा बन गया था। कांग्रेस और अकाली दल ने जहां इस फैसले पर सवाल खड़े किए, वहीं इसे लेकर दोनों दलों में एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी भी शुरू हो गई थी। अकाली दल ने कैप्टन सरकार पर आरोप लगाए कि राज्य में धार्मिक स्थलों में प्रसाद व लंगर का वितरण नहीं करने दिया जा रहा। 


केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने पाबंदी पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दोषी ठहराया, जिसके जवाब में कैप्टन ने कहा कि हरसिमरत बादल को केंद्र के इस फैसले का विरोध करना चाहिए था। कैप्टन ने कहा कि वे खुद भी केंद्र के इस फैसले के खिलाफ हैं और इस पाबंदी को हटाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखेंगे। इसके बाद कैप्टन ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को इस संबंध में केंद्र से संपर्क साधने की जिम्मेदारी सौंपी थी।

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