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पंजाब के किसान करेंगे 'रेल रोको आंदोलन', जानिए क्या है कृषि बिल और क्यों हो रहा विरोध

Fri, 18 Sep 2020 10:02 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 18 Sep 2020 10:02 AM IST
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Punjab Farmers Announced Rail Roko Andolan Against Agriculture Ordinance
धरने पर बैठे किसान - फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार के किसान संबंधी तीन विधेयकों के खिलाफ पंजाब में 24 से 26 सितंबर तक किसान रेल रोको आंदोलन करेंगे। किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव स्वर्ण सिंह पंधेर ने यह जानकारी दी। विधेयकों का विरोध कर रहे पंजाब के अलग-अलग किसान संगठनों ने पहले ही 25 सितंबर को राज्य में बंद बुलाया है।
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ये हैं तीन अध्यादेश
- कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020
- मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता अध्यादेश, 2020
- आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020

इन बिंदुओं का हो रहा विरोध
- पहले अध्यादेश के अनुसार अब व्यापारी मंडी से बाहर भी किसानों की फसल खरीद सकेंगे। पहले किसानों की फसल को सिर्फ मंडी से ही खरीदा जा सकता था।
- केंद्र सरकार ने अब दाल, आलू, प्याज, अनाज इत्यादि आदि को आवश्यक वस्तु नियम से बाहर कर इसकी स्टॉक सीमा खत्म कर दी।
- केंद्र सरकार कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य का कोई जिक्र नहीं। खरीद के पैसे व्यापारी से आने की कोई गारंटी नहीं दी।

हरसिमरत का इस्तीफा, बोलीं- किसान विरोधी फैसले में सहयोगी नहीं बन सकते

वरिष्ठ अकाली नेता हरसिमरत कौर बादल ने वीरवार को यह कहते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया कि वह और उनकी पार्टी किसी भी किसान विरोधी फैसले में सहयोगी नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि मेरा फैसला शिरोमणि अकाली दल की उस पवित्र सोच, विरासत और समर्पण की भावना का प्रतीक है, जिसके अनुसार अकाली दल किसानों के हित की लड़ाई में किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटा है और न हटेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने चार पेज के इस्तीफे में हरसिमरत बादल ने कहा कि उन्हें इस बात पर बेहद गर्व है कि आज वह अकाली दल के गौरवमयी विरासत को आगे बढ़ाने में अपना रोल निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात पर गर्व है कि हमारे किसान हमेशा ही सबसे ज्यादा उम्मीद शिरोमणि अकाली दल पर करते आए हैं और पार्टी उनकी उम्मीदों एवं विश्वास पर खरी उतरी है।

जो मर्जी हो जाए, हम पार्टी की इस विरासत और किसानों के इस भरोसे को कोई ठेस नहीं पहुंचने देंगे। उनका फैसला केंद्र द्वारा किसानों को विश्वास में लेने और उनकी शंकाओं को दूर किए बिना बिल लाने के फैसले और शिअद द्वारा इस किसान विरोधी बिल का विरोध करने के परिणामस्वरूप उठाया गया कदम है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि वह उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लें।
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कांग्रेस विधायक ने दिया इस्तीफा

कृषि बिलों को लेकर पंजाब में बवाल बढ़ता ही जा रहा है। पहले केंद्र सरकार में मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने अपना इस्तीफा दिया, अब पंजाब के फतेहगढ़ साहिब से कांग्रेस विधायक कुलजीत सिंह नागरा ने भी विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बात की जानकारी कुलजीत सिंह ने ट्वीट कर दी।

उन्होंने लिखा कि - ''भाजपा-अकाली सरकार द्वारा किसान विधेयक पारित किए जाने से गहरा दुख हुआ। मैं किसानों के समर्थन में विधायक फतेहगढ़ साहिब के रूप में अपना इस्तीफा देता हूं। मैंने अपना इस्तीफा पंजाब विधानसभा अध्यक्ष को भेज दिया है।''

कुलजीत ने आगे लिखा- ''मैं भी किसान परिवार से ताल्लुक रखता हूं, इसलिए मैं इस काले कानून को पारित करने के बाद किसानों का दर्द जानता हूं। एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में मेरी चेतना मुझे इस कृषि विधेयक का हिस्सा बनने की अनुमति नहीं देती है। मैं हमेशा अपने किसान भाइयों के साथ इस विधेयक के खिलाफ खड़ा हूं।''
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