पुलवामा में हुए आतंकी हमले में पंजाब का एक और 'शेर' शहीद हो गया। हमले में सीआरपीएफ की जो बस उड़ाई गई, उसे यही बहादुर जवान चल रहा था। शहादत की खबर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया।
शहीद की पहचान पंजाब के मोगा जिले के कस्बा कोटइसेखां निवासी जवान जैमल सिंह के रूप में हुई। जैमल ड्राइवर थे और जब यूनिट एक से दूसरी जगह शिफ्ट की जा रही थी, तब सीआरपीएफ की बस को वही चला रहे थे। जैसे ही काफिला पुलवामा पहुंची, एक एसयूवी गाड़ी बस से आकर भिड़ गई। टक्कर लगते ही धमाका हो गया और बस के परखच्चे उड़ गए। जैमल सिंह की शहादत की खबर गांव पहुंच चुकी है।
पत्नी सुखजीत कौर को जैसे ही शहादत का पता चला, वह बेहोश हो गई। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार जैमल को लेकर आने की बात कह रही हैं। वहीं जवान का 6 साल का बेटा भी बदहवासी की हालत में है। बताया जा रहा है कि जैमल सिंह 19 साल की उम्र में सीआरपीएफ में भर्ती हो गए थे। उनका जन्म 26 अप्रैल 1974 को हुआ था। वे अपने बेटे के काफी करीब थे और अक्सर बहुत देर तक उससे फोन पर बात किया करते थे।
बता दें कि 14 फरवरी को हुए इस अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ने ली है। हमले को सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया है। इससे घटना वाली जगह का भी चयन किया था, ताकि नुकसान ज्यादा हो। कई दिन बाद जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के खुलने के बाद सीआरपीएफ का यह काफिला वीरवार तड़के करीब 3:30 बजे जम्मू से रवाना हुआ था। शाम तक उसके श्रीनगर पहुंचने की उम्मीद थी।
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- फोटो : अमर उजाला
मगर श्रीनगर से 31 किलोमीटर दूर पुलवामा जिले के लेथपोरा इलाके में आत्मघाती हमलावर ने दोपहर बाद 3:16 बजे काफिले को निशाना बनाया। करीब 300 किलो से अधिक विस्फोटक से लैस एक एसयूवी लेथपोरा में एक मोड पर थी, वहां से गुजर रहे सीआरपीएफ के वाहनों को निशाना बनाया। तीन गाड़ियां बुरी तरह से इस विस्फोट से प्रभावित हुई जिनमें दो गाड़ियां 54 और 35 बटालियन की थी। यदि गाड़ियां नजदीक होतीं तो 10 से 12 निशाने पर आ सकते थे।