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Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab bandh today: Punjab Finance Minister Manpreet Singh Badal statement over MSP

वित्तमंत्री का आरोप- किसानों को एमएसपी से वंचित करना चाहता है केंद्र, शिअद ने किया पलटवार

Fri, 25 Sep 2020 01:41 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 25 Sep 2020 01:41 AM IST
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Punjab bandh today: Punjab Finance Minister Manpreet Singh Badal statement over MSP
पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल - फोटो : फाइल फोटो

पंजाब सरकार के किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने का भरोसा देते हुए पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा है कि किसान विरोधी कृषि विधेयकों के खिलाफ खिलाफ वह आखिरी दम तक लड़ेंगे।वीरवार को पंजाब भवन में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि विधेयकों का मुख्य मकसद किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के सुरक्षा कवच से वंचित करना और देश के अन्नदाता को बर्बाद करना है।

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यह विधेयक केवल किसानों को ही नहीं बल्कि सभी पंजाबियों को बुरी तरह प्रभावित करेंगे। संकट की इस घड़ी में सभी पंजाबियों को समझदारी से काम लेने की अपील करते हुए मनप्रीत बादल ने कहा कि पंजाबियों को सख्त मेहनत और किसी भी जबर, अन्याय और बेइंसाफी के खिलाफ संघर्ष में निर्भिक रहने का वरदान है।
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किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले कदमों को कभी भी बर्दाश्त नहीं करेंगे और पंजाब सरकार की तरफ से भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों का डट कर विरोध करेगी। उन्होंने किसी को भी किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाने की आज्ञा नहीं दी जाएगी।

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‘एमएसपी राज्य के विकास का भी अहम साधन है’

मनप्रीत बादल ने कहा कि यह कृषि विधेयक किसानों को एमएसपी के रूप में मिले सुरक्षा कवर से वंचित कर देंगे। हाल ही में मोदी सरकार की तरफ से गेहूं के एमएसपी में 50 रुपये की वृद्धि का एलान किया गया है, जोकि पिछले एक दशक का सबसे कम (केवल 2.6 प्रतिशत) है। कृषि लागत और मूल्य कमीशन (सीएसीपी) ने खाद्य वस्तुओं की 8.4 प्रतिशत महंगाई के मद्देनजर एमएसपी में 6 प्रतिशत वृद्धि की सिफारिश की थी। इससे संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने से पैर पीछे खींच रही है।

किसानों के लिए एमएसपी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि अन्नदाता की भलाई यकीनी बनाने के अलावा एमएसपी राज्य के विकास का अहम जरिया है। पंजाब में हर साल 70,000 करोड़ रुपये के अनाज की खरीद होती है, जिससे राज्य को 3900 करोड़ रुपये सालाना मंडी फीस मिलती है। इस राशि से राज्य की 65000 किलोमीटर लिंक सड़कों, पुलों, मंडियों और अन्य बुनियादी ढांचे की संभाल और मरम्मत की जाती है।

भाजपा के पंजाब विरोधी पैंतरों में हिस्सेदार है शिअद 
भाजपा सरकार के पंजाब विरोधी पैंतरों की तीन उदाहरणों का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि पंजाब को हमेशा केंद्र के इस सौतेले रवैये का सामना करना पड़ा है। पहाड़ी राज्यों को विशेष टैक्स रियायतें देने, जीएसटी लागू करने और अब इन कृषि विधेयकों ने पंजाब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ दी है। यह उससे बड़ा सितम है कि इन पंजाब विरोधी नीतियों में शिअद हमेशा भाजपा का हिमायती रहा है। इस मुद्दे पर शिअद प्रधान सुखबीर बादल की निंदा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सुखबीर लोगों को जवाबदेह हैं कि वे क्यों भाजपा के हर पंजाब विरोधी पैंतरों में हिस्सेदार हैं? हरसिमरत कौर बादल ने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक शब्द तक नहीं बोला। 

कृषि विधेयकों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी कांग्रेस 

वित्त मंत्री ने कहा कि कांग्रेस हमेशा पंजाब और पंजाबियों के हितों की रक्षा के लिए वचनबद्ध है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान राज्य के पानी की रक्षा की और अब किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर हर संभव कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही किसानी विरोधी कृषि विधेयकों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। कांग्रेस राज्य के किसानों के भलाई के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी। 

केंद्रीय उच्चस्तरीय कमेटी पर उठाए सवाल
केंद्र सरकार की तरफ से बनाई गई उच्चस्तरीय कमेटी के विवरण मीडिया को जारी करते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कमेटी केंद्र सरकार की तरफ से किसानों की आमदन दोगुनी करने के लिए कायम की गई थी। पहली मीटिंग में पंजाब को बुलाया ही नहीं गया, लेकिन जब पंजाब की तरफ से कमेटी से बाहर रखने के कदम का विरोध किया गया तो राज्य को कमेटी में शामिल कर लिया गया। दूसरी और तीसरी मीटिंग में कृषि आमदन बढ़ाने के अलावा किसी एजेंडे पर विचार-विमर्श नहीं किया गया।

किसानों की पीठ में छुरा घोंपकर मनप्रीत किसान हितैषी होने का दावा न करें : शिअद
किसानों को लेकर एक बार फिर शिअद के नेता मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री पर हमलावर दिखे। शिअद प्रवक्ता ने वित्त मंत्री पर किसानों की पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री को 10 सितंबर को ही किसानों के लिए आने वाले नए केंद्रीय विधेयकोें की जानकारी मिल गई थी।

शिअद प्रवक्ता एनके शर्मा ने कहा कि हैरानी बाली बात है कि नीति आयोग द्वारा बनाई गई मुख्यमंत्रियों की उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री की जगह वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह शामिल हुए थे। इस बैठक में उन्होंने विधेयक तैयार करने के लिए अपनी तथा मुख्यमंत्री की सहमति दी थी। इसके साथ ही पंजाब सरकार ने लिखित तौर पर अलग नोट भेजकर अपनी सहमति के साथ सुझाव भी दिए थे। 

अब मनप्रीत बादल कृषि विधेयकों को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं, जो न्यायोचित नहीं है। यदि मुख्यमंत्री तथा मनप्रीत सिंह बादल ने पहले यह सच बताया होता तो फिर यह विधेयक कभी तैयार ही नहीं होने थे, क्योंकि शिअद ने इसका विरोध करना था तथा अन्य हमख्याली पार्टियों भी इसके साथ होनी थी। कांग्रेस की इस दोहरी नीति को शिअद बेनकाब करके ही रहेगी।

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