{"_id":"5f49de8e8ebc3e3cea202c5d","slug":"punjab-assembly-session-was-only-a-formaility","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पंजाब विधानसभा सत्र में खाली सदन के साथ सरकार ने निभाई औपचारिकता, नदारद रहे अकाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब विधानसभा सत्र में खाली सदन के साथ सरकार ने निभाई औपचारिकता, नदारद रहे अकाली
Sat, 29 Aug 2020 10:21 AM IST
खुशबू गोयल
हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 29 Aug 2020 10:21 AM IST
सार
- प्रश्नकाल हुआ न ध्यानाकर्षण प्रस्ताव आया
- सत्र से नदारद रहा अकाली दल, भाजपा हाजिर
- आप के 7 और लिप के दोनों विधायक रहे मौजूद
विज्ञापन
पंजाब विधानसभा सत्र में मौजूद कैप्टन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब विधानसभा का शुक्रवार को बुलाया गया एक दिवसीय सत्र अब तक के सभी सत्रों से अलग रहा। एक दिन का सत्र केवल 2.47 घंटे चला, जिसमें एक घंटे कार्यवाही स्थगित भी रही। कोविड संकट को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक बेंच पर केवल एक सदस्य के बैठने की व्यवस्था के बावजूद पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ ज्यादातर सीटें खाली रहीं और पूरा सदन खाली-खाली सा दिखाई दिया।
हालांकि इस सत्र को लेकर राज्य सरकार ने पहले ही साफ कर दिया था कि सांविधानिक शर्त को पूरा करने के लिए यह सत्र बुलाया जा रहा है, इसलिए सरकार का सारा ध्यान सामान्य कामकाज और बिल आदि पारित कराने पर रहा। संभवत : यह पहला सत्र रहा, जिसमें प्रत्यक्ष तौर पर जनता के मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हुई। वहीं, विपक्षी खेमे में, अकाली दल से सभी सदस्य इस सत्र से नदारद रहे। आम आदमी पार्टी के भी केवल सात विधायक सदन में मौजूद रहे। इनके अलावा भाजपा और लोक इंसाफ पार्टी (लिप) के 2-2 सदस्यों ने हिस्सा लिया।
दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के बेंचों पर 15 से अधिक मंत्रियों-विधायकों के कोरोना की चपेट में आने के कारण सीटें खाली रहीं। मात्र पौने तीन घंटे की अवधि में सदन में तो प्रश्नकाल हुआ और न ही निर्धारित कार्यसूची के अनुसार ध्यानाकर्षण प्रस्ताव ही लाया गया। दिवंगतों को श्रद्धांजलि के बाद सदन एक घंटे के लिए स्थगित किया गया। इसके बाद कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर ने प्रश्नकाल के बजाय नियम 16 के अधीन प्रस्ताव पेश करने के लिए मंत्री को पुकारा। इसके साथ ही अन्य बिल पेश करने की कार्यवाही भी शुरू हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
हालांकि इस सत्र को लेकर राज्य सरकार ने पहले ही साफ कर दिया था कि सांविधानिक शर्त को पूरा करने के लिए यह सत्र बुलाया जा रहा है, इसलिए सरकार का सारा ध्यान सामान्य कामकाज और बिल आदि पारित कराने पर रहा। संभवत : यह पहला सत्र रहा, जिसमें प्रत्यक्ष तौर पर जनता के मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं हुई। वहीं, विपक्षी खेमे में, अकाली दल से सभी सदस्य इस सत्र से नदारद रहे। आम आदमी पार्टी के भी केवल सात विधायक सदन में मौजूद रहे। इनके अलावा भाजपा और लोक इंसाफ पार्टी (लिप) के 2-2 सदस्यों ने हिस्सा लिया।
विज्ञापन
दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के बेंचों पर 15 से अधिक मंत्रियों-विधायकों के कोरोना की चपेट में आने के कारण सीटें खाली रहीं। मात्र पौने तीन घंटे की अवधि में सदन में तो प्रश्नकाल हुआ और न ही निर्धारित कार्यसूची के अनुसार ध्यानाकर्षण प्रस्ताव ही लाया गया। दिवंगतों को श्रद्धांजलि के बाद सदन एक घंटे के लिए स्थगित किया गया। इसके बाद कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर ने प्रश्नकाल के बजाय नियम 16 के अधीन प्रस्ताव पेश करने के लिए मंत्री को पुकारा। इसके साथ ही अन्य बिल पेश करने की कार्यवाही भी शुरू हो गई।
विज्ञापन
टीका-टिप्पणी हुई लेकिन उनमें विरोध का सुर नहीं था
अकाली दल के हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा का मुख्यमंत्री राहत कोष और पंजाब राज्य आपदा राहत कोष संबंधी ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी पेश नहीं हुआ, क्योंकि सदन में न तो चंदूमाजरा ही मौजूद थे और न ही इस मामले से संबंधित मंत्री ही हाजिर थे। सदन में बिल पेश किए जाने के दौरान आप के विधायकों ने कुछ टीका-टिप्पणी की लेकिन उनमें विरोध का सुर नहीं था।
लोक इंसाफ पार्टी के सिमरजीत सिंह बैंस पंजाबी में दस्तावेज न मिलने और बोलने का पर्याप्त समय नहीं दिए जाने का विरोध करते हुए वेल में पहुंचे और काफी देर तक नारेबाजी करते रहे और धरने पर बैठ गए। इस दौरान स्पीकर सदन की कार्यवाही जारी रखते हुए विभिन्न बिलों को पारित कराते रहे।
लोक इंसाफ पार्टी के सिमरजीत सिंह बैंस पंजाबी में दस्तावेज न मिलने और बोलने का पर्याप्त समय नहीं दिए जाने का विरोध करते हुए वेल में पहुंचे और काफी देर तक नारेबाजी करते रहे और धरने पर बैठ गए। इस दौरान स्पीकर सदन की कार्यवाही जारी रखते हुए विभिन्न बिलों को पारित कराते रहे।