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हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी- पंचायत स्वतंत्र संस्था, सरकार की भूमिका केवल निरीक्षक की
Mon, 11 Jan 2021 11:21 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 11 Jan 2021 11:21 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : amar ujala
हरियाणा सरकार द्वारा 19 नवंबर, 2020 को आदेश जारी कर पंचायतों के विकास कार्य के लिए एफडी से पैसे निकालने पर रोक लगाने पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि पंचायत स्वतंत्र संस्था है और उसे निर्णय लेने का हक है कि कौन सा विकास कार्य करना है और कहां पैसा खर्च करना है। सरकार का काम केवल निगरानी रखने का है।
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फरीदाबाद की छह ग्राम पंचायतों ने याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। पंचायतों का कहना था कि सरकार के इस निर्णय के चलते गांव के विकास कार्य रुक गए हैं और ऐसे में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने जब सरकार से जवाब मांगा तो सरकार ने कहा कि लगातार पंचायतों द्वारा पैसे के दुरुपयोग की शिकायतें मिल रही थी। इन मामलों की जांच के लिए ऐसा आदेश जारी किया गया था।
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हाईकोर्ट ने कहा कि पंचायत फंड का दुरुपयोग न करें इसके लिए पहले से व्यवस्था मौजूद है और ऐसे आदेश की जरूरत नहीं है। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को पंचायतों के काम में दखल देने की जरूरत नहीं है क्योंकि नियम के अनुसार आज भी सरकार बस पंचायतों की निरीक्षक है।
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हाईकोर्ट की फटकार के बाद सरकार की ओर से कहा गया कि पंचायत विकास कार्य के लिए प्रस्ताव डीसी को सौंप सकती हैं। डीसी इस पर विचार करके सात दिन के भीतर निर्णय लेंगे। सरकार के विश्वास दिलाने पर हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। हालांकि हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार को अपने वादे पर कायम रहना होगा।