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पंजाब सरकार को हाईकोर्ट से झटका : कोटकपूरा और बहिबल कलां मामले की जांच कर रही एसआईटी की रिपोर्ट खारिज की
Sat, 10 Apr 2021 02:12 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 10 Apr 2021 02:12 AM IST
सार
- हाईकोर्ट ने कहा- कुंवर विजय प्रताप सिंह को हटाकर नए सिरे से गठित की जाए एसआईटी
- आरोपी इंस्पेक्टर ने लगाया था आरोप, आईजी मामले की जांच राजनीतिक संरक्षण में कर रहे
- हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और आईजी की दलीलों को किया खारिज
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बेअदबी से जुड़े कोटकपूरा और बहिबल कलां मामले की जांच कर रही एसआईटी और पंजाब सरकार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा झटका दिया। हाईकोर्ट ने जांच रिपोर्ट सिरे से खारिज करते हुए एसआईटी से आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह को हटाने का फैसला सुनाया। इसके अलावा एसआईटी को नए सिरे से गठित करने का आदेश दिया है जिसमें कुंवर विजय प्रताप शामिल नहीं होंगे। अब इन मामलों की जांच नए सिरे से होगी।
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मामले में आरोपी इंस्पेक्टर गुरदीप सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कुंवर विजय प्रताप सिंह पर आरोप लगाया था कि वे इस पूरे मामले की जांच राजनीतिक संरक्षण में कर रहे हैं। उनका रवैया याचिकाकर्ता के प्रति भेदभावपूर्ण है। जब याचिकाकर्ता ने इस मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी तो आईजी ने उन्हें याचिका वापस लेने की धमकी दी थी। याचिकाकर्ता ने इस मामले की जांच कर रही एसआईटी से कुंवर विजय प्रताप सिंह को हटाने की मांग की थी।
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इस याचिका पर पंजाब सरकार सहित डीजीपी ने कहा था कि याची संगीन मामले में आरोपी है और वह कैसे एसआईटी पर आरोप लगा सकता है। अगर ऐसे आरोपों से एसआईटी में बदलाव किया गया तो इससे न सिर्फ जांच प्रभावित होगी बल्कि एसआईटी का मनोबल भी गिरेगा। कुंवर विजय प्रताप सिंह ने अपना जवाब दाखिल कर कहा था कि उन पर लगाए सभी आरोप गलत हैं और वे पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता और वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रहे हैं।
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पंजाब सरकार और कुंवर विजय प्रताप सिंह की दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले में याची पक्ष से सहमति जताई। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अब एसआईटी की जांच रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। साथ ही हाईकोर्ट ने अब आदेश जारी किया है कि जांच कर रही एसआईटी से कुंवर विजय प्रताप सिंह को हटाया जाए और किसी अन्य अधिकारी को शामिल किया जाए।