{"_id":"60b0aa36ac55ad3cf819f210","slug":"punjab-and-haryana-high-court-orders-private-schools-of-chandigarh-to-upload-their-balance-sheet-on-website","type":"story","status":"publish","title_hn":"निजी स्कूलों को हाईकोर्ट का झटका: चंडीगढ़ के स्कूलों को अपलोड करनी ही होगी बैलेंस शीट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निजी स्कूलों को हाईकोर्ट का झटका: चंडीगढ़ के स्कूलों को अपलोड करनी ही होगी बैलेंस शीट
Fri, 28 May 2021 02:01 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 28 May 2021 02:01 PM IST
सार
इससे पहले केंद्र ने कहा था कि निजी स्कूल छात्रों के अभिभावकों से ली गई फीस पर ही चलते हैं तो अभिभावकों को यह अधिकार है कि वह स्कूल की बैलेंस शीट देख सकें।
विज्ञापन
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
चंडीगढ़ के निजी स्कूलों को बड़ा झटका देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन के उस फैसले पर मुहर लगा दी है जिसके तहत निजी स्कूलों के लिए बैलेंस शीट वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया था। हाईकोर्ट ने यह फैसला निजी स्कूलों द्वारा प्रशासन के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं को खारिज करते हुए लिया है।
विज्ञापन
इस मामले में जहां चंडीगढ़ प्रशासन ने अपने फैसले को सही बताया था वहीं केंद्र सरकार ने भी चंडीगढ़ प्रशासन का समर्थन किया था। केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ प्रशासन का बचाव करते हुए कहा था कि केंद्र के पास यह अधिकार है कि वह किसी भी एक्ट में संशोधन और बदलाव के साथ उसे लागू कर सकता है, ऐसे में निजी स्कूलों की दलील, पंजाब के एक्ट में बदलाव कर इसे चंडीगढ़ में लागू कर दिया गया, पूरी तरह से गलत है। जब निजी स्कूल छात्रों के अभिभावकों से ली गई फीस पर ही चलते हैं तो अभिभावकों को यह अधिकार है कि वह स्कूल की बैलेंस शीट देख सकें।
विज्ञापन
प्रशासन ने कहा था कि चंडीगढ़ प्रशासन के नियम के तहत निजी स्कूलों को 8 प्रतिशत से अधिक की फीस बढ़ोतरी का अधिकार नहीं है। साथ ही स्कूलों को निर्देश दिए गए थे कि वह अपने वार्षिक खर्च और आय की बैलेंस शीट अपलोड करेंगे। दो वर्षों तक किसी भी निजी स्कूल ने इस एक्ट को चुनौती नहीं दी। अब दो वर्षों बाद निजी स्कूल इसे चुनौती दे रहे हैं जो सही नहीं है। जबकि शहर के 40 के करीब निजी स्कूल अपनी बैलेंस शीट अपलोड कर चुके हैं।
विज्ञापन
फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि शिक्षा कोई व्यवसाय नहीं है यह समाज के प्रति सेवा है। हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूलों को पहले अपने इस प्राथमिक दायित्व के बारे में सोचना चाहिए उसके बाद फीस के बारे में। अधिक फीस तय करके स्कूल अपने प्राथमिक उद्देश्य से भटक रहे हैं जिस पर रोक लगाना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से चंडीगढ़ प्रशासन ने स्कूलों को बैलेंस शीट अपलोड करने का आदेश दिया था जो सही है। हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन के आदेश पर मोहर लगाते हुए स्कूलों को अपनी बैलेंस शीट अपलोड करने का आदेश दिया है। साथ ही प्रशासन को कहा कि वह स्कूलों को कुछ समय दें ताकि वह अपनी बैलेंस शीट अपलोड कर सकें।
यह था मामला
चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूट एक्ट में संशोधन कर 24 अप्रैल को आदेश जारी किया था कि सभी निजी स्कूलों को अपनी आय-व्यय का ब्योरा वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। इसके खिलाफ याचिका दाखिल करते हुए इंडिपेंडेंट स्कूल्स एसोसिएशन सहित शहर के 3 निजी स्कूलों ने प्रशासन के इस फैसले को खारिज करने की अपील की थी । याची ने कहा था कि प्रशासन ने बैलेंस शीट अपलोड न करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई का फैसला लिया है । ऐसे में उन्हें डर है कि प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है जबकि उन्होंने पहले ही अकाउंट स्टेटमेंट प्रशासन के पास जमा करवा दी है ।