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हजारों नम आंखों ने दी शहीद कुलविंदर को अंतिम विदाई, पिता ने कहा-सीने में गोली मारने के आदेश दे सरकार

Sat, 16 Feb 2019 08:12 PM IST
ajay kumar जगजीत सिंह, अमर उजाला, रोपड़ (पंजाब)
जगजीत सिंह, अमर उजाला, रोपड़ (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sat, 16 Feb 2019 08:12 PM IST
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Pulwama martyr Kulwinder Singh funeral with state honors in Ropar
शहीद कुलविंदर सिंह

पुलवामा में आतंकी हमले के दौरान शहीद हुए गांव रौली निवासी शहीद कुलविंदर सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार को जब नूरपुरबेदी से गांव रौली ले जाया जा रहा था तो रास्ते में लोगों ने फूलों की वर्षा की। पार्थिव शरीर के गांव में पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया और सारा गांव रो पड़ा। विवाह के दौरान की जाने वाली रस्म के अनुसार शहीद के शव पर सेहरा और कलगी रखी गई। 

Pulwama martyr Kulwinder Singh funeral with state honors in Ropar
शहीद कुलविंदर सिंह

करीब दो किलोमीटर लंबी अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। शहीद कुलविंदर सिंह की अंतिम यात्रा के दौरान स्थानीय विधायक अमरजीत सिंह संदोआ ने भी उन्हें कंधा दिया। पूर्व सूबेदार गुरचेत सिंह ने अंतिम यात्रा में पीएम मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। श्मशान घाट पहुंचने पर सीआरपीएफ के जवानों ने शहीद को सलामी दी।

इस दौरान विधानसभा के स्पीकर राणा केपी सिंह समेत अकाली दल के सीनियर नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा, जिला कांग्रेस कमेटी के प्रधान बरिंदर सिंह ढिल्लों, आप नेता नरिंदर सिंह शेरगिल, डीसी सुमित जारंगल, एसपी अजिंदर सिंह के अलावा सीआरपीएफ सोनीपत रेंज के डीआईजी अमर सिंह नेगी, कमांडेंट 13 बटालियन हरविंदर सिंह, डिप्टी कमांडेंट 84 बटालियन जीओ राउ, जिला सैनिक भलाई अफसर जरनैल सिंह शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। 

Pulwama martyr Kulwinder Singh funeral with state honors in Ropar
अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब

सीआरपीएफ ने शहीद के पार्थिव शरीर में लिपटे तिरंगे को जब पिता दर्शन सिंह को सौंपा तो उन्होंने तिरंगे को सीने से लगा लिया और कहा अब यही मेरा बेटा है। दर्शन सिंह ने कहा कि अगर उनका बेटा जंग में दुश्मन को मारकर शहीद होता तो उन्हें और गर्व होता। सरकार के प्रति रोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि और भी बेटे देश की सेवा कर रहे हैं पर सरकार ने उनके हाथ बांधे हुए हैं। 

उन्होंने कहा कि सरकार ने जवानों को फायर हवा में और पैरों में करने के लिए बोला है पर छाती पर गोली दागने की इजाजत नहीं दी है। अगर सैनिक अपनी मनमर्जी करता है तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सैनिकों को शूट करने के पूरे अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि कुलविंदर सिंह अपनी शादी के लिए बैंड बाजे और गाड़ियां तक बुक करके गया था।

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Pulwama martyr Kulwinder Singh funeral with state honors in Ropar
नम आंखों से लोगों ने दी विदाई

सरकार की ओर से शहीदों के परिवारों के लिए किए गए एलान पर दर्शन सिंह ने कहा कि सरकारें वादे करके मुकर जाती हैं। उन्होंने बताया कि दो साल पहले 45 हजार रुपये से उनकी आंख का ऑपरेशन हुआ था पर आज तक उन्हें यह पैसा नहीं मिला। शहीद को सलामी देने आए सीआरपीएफ के जवान अविनाश गायकवाड़ ने बताया कि कुलविंदर बहुत शांत स्वभाव के थे। वह ट्रेनिंग के समय कुलविंदर सिंह के साथ लगभग एक साल तक रहे हैं।

कई बार बेहोश हुई मंगेतर
शहीद कुलविंदर की मंगनी गांव लोदीपुर निवासी अमनदीप कौर से लगभग ढाई साल पहले हुई थी। आठ नवंबर को शादी होनी तय थी। अमनदीप कौर भी शनिवार को अपने मंगेतर को अंतिम विदाई देने के लिए गांव पहुंची। इस दौरान अमनदीप कौर कई बार रोते-रोते बेहोश हुईं। दो लोगों ने सहारा देकर उन्हें गुरुद्वारा साहिब से घर तक पहुंचाया।

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Pulwama martyr Kulwinder Singh funeral with state honors in Ropar
शहीद के अंतिम दर्शन में नम हुई आंखें

पुलिस की नौकरी मिली रही थी, कुलविंदर ने देश सेवा को तवज्जो दी 
कुलविंदर सिंह के पिता दर्शन सिंह ट्रक ड्राइवर हैं। लगभग एक माह से लाइसेंस एक्सपायर होने के कारण वह काम नहीं कर रहे हैं। परिवार के पास गांव में जमीन भी केवल एक एकड़ ही है। आर्थिक मजबूरियों में घिरे परिवार को कुलविंदर सिंह की नौकरी से सहारा मिला था। शहीद के रिश्तेदार किरनदीप सिंह ने बताया कि कुलविंदर जब गांव में आता था तो गुरुद्वारा साहिब में सुबह व शाम को पाठ करता था। 

कुलविंदर को क्रिकेट और फुटबाल खेलने का शौक था। उन्होंने बताया कि सीआरपीएफ में भर्ती के बाद कुलवदिंर को पंजाब पुलिस के जेल विभाग से भी नौकरी का पत्र आ गया था लेकिन उसने देश सेवा को तवज्जो दी। जानकारी के अनुसार कुलविंदर सिंह 92 बटालियन में कांस्टेबल थे। 92 बटालियन की बस खराब होने के कारण इस बस में बैठे जवानों को पांच-पांच कर अन्य बसों में बिठाया गया था।

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