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अंतिम विदाई में हजारों आंखें नम कर गए शहीद सुखजिंदर सिंह, छोटे भाई ने सैनिक बनने की जताई ख्वाहिश

Sat, 16 Feb 2019 07:50 PM IST
ajay kumar अमित मरवाहा, अमर उजाला, तरनतारन (पंजाब)
अमित मरवाहा, अमर उजाला, तरनतारन (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sat, 16 Feb 2019 07:50 PM IST
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Pulwama martyr Sukhjinder Singh funeral with state honors in Tarn Taran
शहीद की अंतिम विदाई में पहुंचे केंद्रीय मंत्री

पुलवामा आतंकी हमले में शहीद जवान सुखजिंदर सिंह का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने पर शहीद को श्रद्धांजलि देने लोग उमड़ पड़े। इस दौरान शहीद की मां और पत्नी की हालत देखकर हर आंख भीग गई। शनिवार सुबह शहीद के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लिपटे ताबूत में लाया गया। पार्थिव शरीर पहले तरनतारन के सिविल अस्पताल पहुंचा और वहां से श्रद्धांजलि देने के बाद गंडीविंड गांव लाया गया। 

Pulwama martyr Sukhjinder Singh funeral with state honors in Tarn Taran
अंतिम दर्शन में रो पड़े हजारों लोग

दोपहर बाद करीब दो बजे सैनिक सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। शहीद को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, कैबिनेट मंत्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया, विधायक हरमिंदर सिंह गिल, विधायक धर्मवीर अग्निहोत्री, विधायक सुखपाल सिंह, प्रो. लक्ष्मीकांता चावला भी पहुंचीं। कैबिनेट मंत्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया ने कहा कि पंजाब सरकार की तरफ से शहीद के परिवार को 12 लाख रुपये की सहायता और घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी।  

Pulwama martyr Sukhjinder Singh funeral with state honors in Tarn Taran
शहीद सुखजिंदर सिंह

बदहवास मां बार-बार पूछ रहीं थी, कदों वेखांगी आपणे शेर पुत्तर नूं
पट्टी के गांव गंडीविंड (धत्तल) निवासी किसान गुरमेज सिंह के 32 वर्षीय पुत्र सुखजिंदर सिंह सीआरपीएफ की 76वीं बटालियन में बतौर हेड कांस्टेबल तैनात थे। सुखजिंदर सिंह को सात माह पहले ही प्रमोशन मिला था। तरक्की मिलने के बाद घर में बेटे गुरजोत सिंह ने जन्म लिया था। पति को खोने वाली सरबजीत कौर को ढांढस बंधाने वाले सगे संबंधी भी फूट-फूट कर रो रहे थे। शहीद की फोटो हाथ में लिए मां हरभजन कौर बार-बार कह रही थीं, ‘रब्बा कदों वेखांगी आपणे शेर पुत्तर नूं...। रब्बा होर नहीं तां ऐस गुरजोत दे बारे ही कुझ सोच लैंदा।’

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Pulwama martyr Sukhjinder Singh funeral with state honors in Tarn Taran
शहीद का परिवार

शहादत का तोहफा लेकर गया सुखजिंदर, याद करेंगी पीढ़ियां
सुखजिंदर के परिवार को अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। साथ ही गांव गंडीविंड (धत्तल) के लोग भी इस कुर्बानी को आने वाली पीढ़ी के लिए मिसाल करार दे रहे हैं। गांव में गदरी बाबा संता सिंह की यादगार बताती है कि यह गांव ऐसे शहीदों का है जिसका नाम हिंदुस्तान के इतिहास से कभी मिटने वाला नहीं है। गांव की आबादी करीब 1300 है।

 इसमें से 40 युवा सेना और सीआरपीएफ में तैनात हैं। करीब 150 पूर्व सैनिक हैं। गांव के सरपंच अमरजीत सिंह कहते हैं कि गदरी बाबा संता सिंह की तरह शहीद सुखजिंदर सिंह का नाम भी आने वाली पीढ़ी याद रखेगी। शहीद की मां हरभजन कौर ने कहा कि उन्होंने अपने लाल को घर के गुजारे के लिए नहीं बल्कि देश की सेवा के लिए भेजा था। 

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शहीद सुखजिंदर सिंह

गुरजंट का कहना है कि भाई की शहादत ने मुझे बल दिया है। मैं भी सैनिक बनूंगा। घर के कोने में रो रही बहन लखविंदर कौर बार-बार कह रही थी कि अपने लड़के की लोहड़ी मनाने के बाद ड्यूटी पर जाते समय भाई ने कहा था अबकी लौटूंगा तो तोहफा लेकर लौटूंगा।

शहीद के नाम पर होगा स्कूल का नाम : एसडीएम
एसडीएम डॉ. अनुप्रीत कौर ने कहा कि शहीद की यादगार के तौर पर गांव में गेट बनाने, सरकारी स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखने की मंजूरी के लिए फाइल सरकार को भेजी जाएगी।

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