पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट खत्म नहीं होगी, जनवरी में हो सकते हैं चुनाव
पंजाब विश्वविद्यालय में सीनेट चुनाव को लेकर चल रहा घमासान फिलहाल शांत है। यह शांति कुछ नया रूप लेकर आ सकती है। जानकारों का कहना है कि सीनेट को खत्म नहीं किया जाएगा। सीनेट रहेगी, लेकिन इसमें आमूलचूल परिवर्तन होंगे।
बाहरी लोगों का दखल कम किया जाएगा और पीयू के शिक्षकों को अधिक जगह मिलेगी। इसका खाका तैयार हो रहा है। जनवरी में सीनेट के चुनाव करवाए जा सकते हैं, तब तक सिंडिकेट का कार्यकाल भी पूरा हो जाएगा।
सीनेट का कार्यकाल खत्म हो गया है। सभी को ऐसे लग रहा है कि सीनेट को खत्म किया जा रहा है। पीयू के इस लोकतांत्रिक ढांचे को हटाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि हकीकत कुछ अलग है। किसी भी विश्वविद्यालय के इतने पुराने ढांचे को एक साथ नहीं बदला जा सकेगा। इसमें धीरे-धीरे बदलाव होंगे।
बोर्ड ऑफ गवर्नेंस की संभावनाएं भी अब कम दिख रही हैं। यदि लागू होगा तो यह सभी विश्वविद्यालयों में लागू होगा। इसी के तहत पीयू को सीनेट को रखना होगा ताकि उसका संचालन हो सके। पीयू को ऊपर से इशारा फिलहाल यही मिला है कि चुनाव न करवाए जाएं। सिंडिकेट का कार्यकाल पूरा हो जाए, उसके बाद ही कुछ निर्णय होगा।
सूत्रों का कहना है कि जिस तरह देश का एक संविधान होता है, उसी तरह हर विश्वविद्यालय का भी होता है और उसका पालन एक कमेटी करवाती है। इसी तरह सीनेट पीयू के लिए है। सीनेट में वर्षों से कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब मांग उठी है तो जहां-जहां संभावनाएं होंगी, उन नियमों को बदला जा सकेगा। 91 सदस्यों में से सीटों की संख्या 55-60 के मध्य रखी जा सकती हैं।
स्नातक वर्ग की सीटों की संख्या आधी हो सकती है। इसके अलावा स्नातक वर्ग की योग्यता को बढ़ाकर परास्नातक किया जा सकता है। यही बात पीयू के पूर्व सीनेटर भी कह रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि यदि सीनेट चुनाव के लिए प्रदर्शन आदि कांग्रेसी सदस्यों की ओर से लंबा किया जाता है तो फिर मामला प्रतिष्ठा से जुड़ेगा और उसके बाद सीनेट को खत्म भी किया जा सकता है।
दूसरे राज्यों के सदस्यों की संख्या हो सकती है कम
पीयू की सीनेट में दूसरे राज्यों के अधिकारी या नेताओं को जगह मिलती थी। इनका मनोनयन होता था, लेकिन अब योजना बन रही है कि बाहरी लोगों के मनोनयन की जगह उसी प्रदेश के लोगों को सीनेट में जगह दी जाएगी। नेताओं को इससे बाहर किया जा सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में जिन लोगों का योगदान है या रहा है, उनको जगह मिल सकती है।