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पीयू ने पीएचडी प्रवेश परीक्षा की तिथि तय नहीं की, कक्षाएं लगाने का कार्यक्रम कर दिया जारी

Sat, 02 Jan 2021 02:14 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 02 Jan 2021 02:14 AM IST
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PU did not set date for PhD entrance exam, schedule of classes to continue
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी ने पीएचडी प्रवेश परीक्षा कराने की तिथि तो तय नहीं की, लेकिन एमफिल व पीएचडी के विद्यार्थियों की कक्षाएं लगाने का कार्यक्रम जारी कर दिया। इस कार्यक्रम की जानकारी विद्यार्थियों व शिक्षकों को हुई तो वह हैरान हैं। उनका कहना है कि पहले प्रवेश परीक्षा आयोजित करनी चाहिए थी और उसके बाद कार्यक्रम जारी होता। कक्षाएं सभी की साथ लगाई जानी चाहिए थी। कुछ शिक्षकों व विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि अब प्रवेश परीक्षा होगी। पीयू के इस निर्णय से उन्हें नुकसान हुआ है। साथ ही पीयू को भी एकेडमिक नुकसान होगा। इसका असर रैंकिंग पर भी पड़ेगा। हालांकि पीयू प्रशासन का कहना है कि प्रवेश परीक्षा होगी या नहीं, इस पर निर्णय लिया जाना अभी बाकी है, लेकिन जिनके दाखिले हो गए हैं या हो रहे हैं उनकी कक्षाएं लगाना जरूरी है।
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इस तरह होता है विद्यार्थियों का चयन
पीयू हर साल पीएचडी प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है। इस परीक्षा में पांच हजार से अधिक विद्यार्थी शामिल होते हैं। पीयू कैंपस व कॉलेजों से भी लगभग दो हजार विद्यार्थी इस परीक्षा में हिस्सा लेते हैं। हर साल इस परीक्षा के जरिये पीयू के 100 से अधिक विद्यार्थी पीएचडी के लिए चयनित होते हैं। इस बार कोरोना के कारण पीएचडी प्रवेश परीक्षा को लेकर संशय बरकरार रहा। पहले पीयू प्रशासन ने प्रवेश परीक्षा कराने की बात कही, लेकिन बाद में नेट और जेआरएफ विद्यार्थियों के दाखिले शुरू कर दिए गए। पीयू के अपने विद्यार्थी परीक्षा के इंतजार में थे। अब पीयू ने एमफिल व पीएचडी की कक्षाओं का कार्यक्रम जारी कर दिया। 18 जनवरी से कक्षाएं लगने लगेंगी। यानी गाइड इन्हें मिल जाएंगे और रिसर्च का कार्य शुरू हो जाएगा।
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छात्रों को लगा झटका, शिक्षकों ने भी सवाल उठाए
पढ़ाने का कार्यक्रम जब विद्यार्थियों को पता लगा तो वह हैरान हो गए। एमए के विद्यार्थी सुमित शर्मा, राजेश्वर सिंह, एमएससी के विद्यार्थी अनुज कुमार का कहना है कि पहले पीयू ने यह कहा था कि प्रवेश परीक्षा पीएचडी के लिए करवाएंगे, लेकिन अब कार्यक्रम कक्षा लगाने का जारी कर दिया। इससे उन्हें झटका लगा है। उन्होंने कहा कि जेआरएफ व नेट परीक्षा पास करने वालों के तो सीधे प्रवेश हो जाएंगे, लेकिन पीयू को अपने विद्यार्थियों की चिंता करनी चाहिए थी। शिक्षकों ने भी इस बात को लेकर हैरानी जताई है। उनका कहना है कि इसका नुकसान एकेडमिक होगा। पीयू में यदि हर विभाग से एक-एक विद्यार्थी का भी चयन परीक्षा के जरिए होता तो हर साल कम से कम एक रिसर्च पेपर पब्लिश होता और इसका प्रभाव नैक रैंकिंग पर दिखता, लेकिन अब यह नुकसान पीयू को भुगतना होगा। कुछ शिक्षकों का कहना है कि यह परीक्षा आसानी से करवाई जा सकती थी। हालांकि अभी पीयू को अंतिम निर्णय लेना है।
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छात्रवृत्ति की रकम कहां खर्चेंगे
पीयू पीएचडी प्रवेश परीक्षा में हर विभाग के टॉपर को छात्रवृत्ति देती है। इस रकम के जरिए विद्यार्थी आगे बढ़ते हैं। पीयू के सकारात्मक बिंदुओं में यह बात शामिल होती है, लेकिन इस बार यह बजट कहां खर्च होगा, यह किसी को पता नहीं है। हालांकि पीयू अलग से विद्यार्थियों के लिए स्कॉलरशिप देने की योजना बना चुकी है।
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