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एमएससी इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री के छात्रों का प्रस्ताव दूसरी सिंडिकेट बैठक से भी गायब
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय की हीलाहवाली लगातार बढ़ती जा रही है। छात्रों की समस्याओं को दरकिनार किया जा रहा है। एमएससी इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री का प्रकरण 25 जून को होने वाली दूसरी सिंडिकेट बैठक में लाया जाना था लेकिन यह प्रकरण प्रस्ताव से नदारद है। पिछली बार भी इस प्रकरण पर चर्चा नहीं की गई थी। इससे छात्रों में आक्रोश है। वह जुलाई के पहले सप्ताह में वीसी कार्यालय के बाहर आंदोलन की बात कह रहे हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि उनका धरना-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं हो जाता। यह चेतावनी उन्होंने पीयू के अधिकारियों को पत्र भेजकर दी है।
छात्रों ने कहा है कि एमएससी इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री कोर्स का संचालन केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की बजाय केमिस्ट्री डिपार्टमेंट से करवाया जाए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके और सरकारी नौकरियों में उन्हें मौका मिले। इसको लेकर विभाग के एलुमनी, छात्रों, छात्र नेताओं ने पीयू के अधिकारियों को कई मेल व पत्र भी भेजे लेकिन अब तक केवल कमेटी ही बन पाई है। छात्रों का कहना है कि इसी सिंडिकेट की बैठक में यह प्रस्ताव लाया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बिना प्रस्ताव के भी सिंडिकेट के मेंबर को चर्चा करनी चाहिए। साथ ही पूर्व में ऐसे निर्णय कैसे हो गए, गलती कहां रही, इसे भी देखा जाना चाहिए। छात्रों ने कहा कि पीयू इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। अब आंदोलन की रणनीति बनाई जा रही है।
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छात्रों ने कहा है कि एमएससी इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री कोर्स का संचालन केमिकल इंजीनियरिंग विभाग की बजाय केमिस्ट्री डिपार्टमेंट से करवाया जाए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके और सरकारी नौकरियों में उन्हें मौका मिले। इसको लेकर विभाग के एलुमनी, छात्रों, छात्र नेताओं ने पीयू के अधिकारियों को कई मेल व पत्र भी भेजे लेकिन अब तक केवल कमेटी ही बन पाई है। छात्रों का कहना है कि इसी सिंडिकेट की बैठक में यह प्रस्ताव लाया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बिना प्रस्ताव के भी सिंडिकेट के मेंबर को चर्चा करनी चाहिए। साथ ही पूर्व में ऐसे निर्णय कैसे हो गए, गलती कहां रही, इसे भी देखा जाना चाहिए। छात्रों ने कहा कि पीयू इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। अब आंदोलन की रणनीति बनाई जा रही है।
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