वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाले अंकुल मित्तल के परिवार की कहानी भी शानदार है। अंकुर मित्तल के परिवार के नाम भी कई रिकॉर्ड है। आइए जानते हैं देश के सबसे उम्दा डबल ट्रैप शूटर अंकुर मित्तल के परिवार के बारे में...
इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन की रैंकिंग में पहले स्थान पर आने वाले शूटर अंकुर मित्तल के नाम ही रिकार्ड नहीं है, बल्कि उनके परिवार के नाम भी रिकार्ड है। अंकुर के पिता अशोक मित्तल व बड़ा भाई अजय मित्तल भी इंटरनेशनल शूटर रह चुके है और अंकुर भी अपने पिता व भाई से प्रेरणा लेकर शूटर बना है। उसके पिता अशोक मित्तल ही अंकुर के कोच है जो इस समय हरियाणा राइफल एसोसिएशन में जनरल सेक्रेटरी व नेशनल राइफल एसोसिएशन में सेक्रेटरी हैं।
अंकुर, उनके भाई अजय व पिता अशोक ने रांची में 2011 में हुए नेशनल गेम्स में टीम इवेंट में एक साथ खेलते हुए कांस्य पदक भी जीता हुआ है। अंकुर के पिता अशोक मित्तल ने लगभग 20 साल पहले शूटिंग करनी शुरू की थी, लेकिन उनके नाम कोई इंटरनेशनल मेडल नहीं हो सका। इस कारण ही उन्होंने अपने बेटों को शूटिंग के लिए तैयार किया और पहले बड़े बेटे अजय मित्तल को शूटिंग कराई।
वह 2007 में कुवैत में नेशनल चैंपियन बना तो 2010 में मैक्सिको में रजत पदक जीता। वह 2012 का नेशनल चैंपियन भी रह चुका है। इस बीच ही अंकुर को शूटिंग खेलने के लिए उतारा गया और अब वह देश के लिए मेडल जीतकर विदेशों में झंडे गाड़ रहा है। वर्ल्ड रैंकिंग में पहले नंबर पर आने पर उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भी बहुत बड़ी है और इसके लिए पिता व भाई दोनों का बराबर का सहयोग है।
प्रदेश में 2000 शूटर, 80 मेडल, फिर भी शूटिंग रेंज नहीं
हरियाणा राइफल एसोसिएशन में जनरल सेक्रेटरी व नेशनल राइफल एसोसिएशन में सेके्रटरी अशोक मित्तल को इस बात का मलाल है कि हरियाणा से इस समय बड़ी संख्या में शूटर निकल रहे है। अशोक मित्तल ने बताया कि प्रदेश में इस समय लगभग 2 हजार शूटर है और इनमें से लगभग 80 ने नेशनल गेम्स में मेडल जीते है। इसके बावजूद प्रदेश में एक भी शूटिंग रेंज नहीं है, जबकि सरकार को शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए रेंज खुलवानी चाहिए।