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प्रो. वीरेंद्र का रिमांड बढ़ा, पूछताछ में कर रहा गुमराह, नार्को से इंकार
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 20 Mar 2016 04:11 PM IST
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प्रोफसर वीरेंद्र कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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राजद्रोह के आरोपों का सामना कर रहे प्रोफेसर विरेंद्र का पुलिस रिमांड 8 दिन के लिए और बढ़ गया है। वहीं, वे नार्कों टेस्ट से इंकार कर रहे हैं। शनिवार को कोर्ट में विरेंद्र का नार्को टेस्ट करवाने को लेकर बहस हुई। पुलिस ने कहा कि प्रोफेसर बहुत शातिर हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
वहीं, आरोपी के वकील ने कोर्ट में गुहार लगाई कि प्रोफेसर के हाथ-पैर कांपते हैं। इसलिए वे नार्को टेस्ट नहीं करवा सकते हैं। इस पर कोर्ट ने पुलिस को 3 दिन का समय दिया है। 21 मार्च को पुलिस कोर्ट में पक्ष रखेगी कि विरेंद्र सिंह का नार्को टेस्ट क्यों जरूरी है। पुलिस ने शनिवार को कोर्ट में नार्को टेस्ट कराने की अर्जी लगाई थी।
इससे पहले, एसआईटी ने दो दिन का रिमांड पूरा होने के बाद विरेंद्र सिंह को कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने आरोपी को 10 दिन के और रिमांड पर भेजने की मांग की। कोर्ट ने 8 दिन का रिमांड मंजूर किया है। पेशी के दौरान सरकारी वकील और आरोपी के वकीलों की करीब एक घंटे तक बहस हुई। विरेंद्र सिंह को पुलिस 27 मार्च को कोर्ट में पेश करेगी।
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आमने-सामने बैठाकर होगी पूछताछ
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे राजद्रोह के आरोपी प्रोफेसर विरेंद्र सिंह से करीब 350 लोगों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ होगी। जांच में शामिल होने वाले ये वे लोग हैं, जिनसे विरेंद्र सिंह ने उपद्रव के दौरान बातचीत की थी। पुलिस विरेंद्र की कॉल डिटेल निकलवाकर इन लोगों से संपर्क करेगी। फिर इन्हें जांच में शामिल होने के लिए बुलाया जाएगा। विरेंद्र सिंह ने उपद्रव के दौरान प्रयोग किए गए मोबाइल नंबर को भी उपलब्ध करवा दिया है।
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वहीं, आरोपी के वकील ने कोर्ट में गुहार लगाई कि प्रोफेसर के हाथ-पैर कांपते हैं। इसलिए वे नार्को टेस्ट नहीं करवा सकते हैं। इस पर कोर्ट ने पुलिस को 3 दिन का समय दिया है। 21 मार्च को पुलिस कोर्ट में पक्ष रखेगी कि विरेंद्र सिंह का नार्को टेस्ट क्यों जरूरी है। पुलिस ने शनिवार को कोर्ट में नार्को टेस्ट कराने की अर्जी लगाई थी।
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इससे पहले, एसआईटी ने दो दिन का रिमांड पूरा होने के बाद विरेंद्र सिंह को कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने आरोपी को 10 दिन के और रिमांड पर भेजने की मांग की। कोर्ट ने 8 दिन का रिमांड मंजूर किया है। पेशी के दौरान सरकारी वकील और आरोपी के वकीलों की करीब एक घंटे तक बहस हुई। विरेंद्र सिंह को पुलिस 27 मार्च को कोर्ट में पेश करेगी।
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आमने-सामने बैठाकर होगी पूछताछ
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे राजद्रोह के आरोपी प्रोफेसर विरेंद्र सिंह से करीब 350 लोगों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ होगी। जांच में शामिल होने वाले ये वे लोग हैं, जिनसे विरेंद्र सिंह ने उपद्रव के दौरान बातचीत की थी। पुलिस विरेंद्र की कॉल डिटेल निकलवाकर इन लोगों से संपर्क करेगी। फिर इन्हें जांच में शामिल होने के लिए बुलाया जाएगा। विरेंद्र सिंह ने उपद्रव के दौरान प्रयोग किए गए मोबाइल नंबर को भी उपलब्ध करवा दिया है।
यूं हुई बहस नार्कों टेस्ट पर बहस
प्रोफसर वीरेंद्र कुमार
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने कोर्ट में तर्क दिया कि विरेंद्र जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। दो दिनों के रिमांड में पुलिस उन्हें चंडीगढ़ भी लेकर गई, लेकिन कुछ भी फायदा नहीं हुआ। आरोपी के वकील आरसी दलाल ने बताया कि पुलिस ने जांच में सहयोग न करने का तंज कसते हुए कहा कि विरेंद्र बहुत शातिर है। पूछताछ में पुलिस को गुमराह कर रहा है।
पुलिस ने आरोपी के नार्को टेस्ट के लिए भी अर्जी लगाई। विरेंद्र सिंह की बीमारी का हवाला देकर उनके वकील में कोर्ट में कहा कि नार्को टेस्ट की अनुमति नहीं दी जाए। वकील आरसी दलाल ने बताया कि विरेंद्र सिंह के हाथ-पैर कांपते है। वे लगातार बीमार रहते हैं। इसलिए वे नार्को टेस्ट नहीं देना चाहते हैं।
आरोपी पहले ही कह चुका है कि विवादित ऑडियो टेप में उन्हीं की आवाज है। फिर भी पुलिस आवाज के नमूने लेना चाहती है तो ले सकती है। दलाल का कहना है कि आरोपी की सहमति के बिना पुलिस उसका नार्को टेस्ट नहीं करवा सकती। टेस्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट का एक आर्डर भी पेश किया गया। इसके बाद मामले को अगली सुनवाई तक टाल दिया गया।
विरेन्द्र सिंह बीमार रहते हैं। इसलिए वे नार्को टेस्ट देने के लिए शारीरिक तौर पर तैयार नहीं हैं। कोर्ट में भी विरेंद्र सिंह का नार्को टेस्ट न कराने की अपील की गई है। आरोपी ने पुलिस को अपना मोबाइल नंबर मुहैया करवा दिया है। ताकि पुलिस कॉल डिटेल निकलवा सके।
- आरसी दलाल, आरोपी के वकील
पुलिस ने आरोपी के नार्को टेस्ट के लिए भी अर्जी लगाई। विरेंद्र सिंह की बीमारी का हवाला देकर उनके वकील में कोर्ट में कहा कि नार्को टेस्ट की अनुमति नहीं दी जाए। वकील आरसी दलाल ने बताया कि विरेंद्र सिंह के हाथ-पैर कांपते है। वे लगातार बीमार रहते हैं। इसलिए वे नार्को टेस्ट नहीं देना चाहते हैं।
आरोपी पहले ही कह चुका है कि विवादित ऑडियो टेप में उन्हीं की आवाज है। फिर भी पुलिस आवाज के नमूने लेना चाहती है तो ले सकती है। दलाल का कहना है कि आरोपी की सहमति के बिना पुलिस उसका नार्को टेस्ट नहीं करवा सकती। टेस्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट का एक आर्डर भी पेश किया गया। इसके बाद मामले को अगली सुनवाई तक टाल दिया गया।
विरेन्द्र सिंह बीमार रहते हैं। इसलिए वे नार्को टेस्ट देने के लिए शारीरिक तौर पर तैयार नहीं हैं। कोर्ट में भी विरेंद्र सिंह का नार्को टेस्ट न कराने की अपील की गई है। आरोपी ने पुलिस को अपना मोबाइल नंबर मुहैया करवा दिया है। ताकि पुलिस कॉल डिटेल निकलवा सके।
- आरसी दलाल, आरोपी के वकील
प्रोफेसर फिट, नहीं है दाखिल करने की जरूरत
प्रोफसर वीरेंद्र कुमार
- फोटो : अमर उजाला
प्रोफेसर विरेंद्र फिट हैं। फिलहाल उन्हें पीजीआई में दाखिल करने की जरूरत नहीं है। शनिवार को राजद्रोह के आरोपी प्रोफेसर को मेडिकल जांच के लिए पीजीआई में लाया गया था। बताया जा रहा है कि प्रोफेसर की जांच के दौरान डॉक्टरों के एक गुट ने हस्तक्षेप की कोशिश की और चाहा कि प्रोफेसर को दाखिल कर लिया जाए। लेकिन ड्यूटी दे रहे डॉक्टरों ने किसी की भी बात सुनने से इंकार कर दिया और प्रोफेसर को फिट घोषित कर दिया।
इससे पहले, पीजीआई के आपातकालीन विभाग के कमरा नंबर 5 में प्रोफेसर को जांच के लिए लाया गया था। मेडिसन विभाग के डॉक्टरों ने बीपी, इसीजी व अन्य जांच के बाद उन्हें फिट बता दिया।। वहीं संस्थान के एक अन्य डॉक्टर भी मौके पर पहुंच गए। सूत्रों की मानें तो वे उन्हें दाखिल करने के पक्ष में थे। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात स्टाफ ने आपत्ति जताई कि दूसरा डॉक्टर फिलहाल ड्यूटी पर नहीं है और अन्य किसी की सलाह पर वे किसी को दाखिल करने वाले नहीं हैं।
यदि उन पर अधिक दबाव बनाया गया तो वे अधिकारियों के समक्ष बात रखेंगे। इस पर उक्त डॉक्टर लौट गए। वहीं, आपातकालीन कक्ष की गैलरी, कक्ष नंबर पांच और आसपास के एरिया को पूरी तरह सील कर दिया गया था। हर आने जाने वाले पर सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी गई। मौके पर तैनात डॉक्टरों ने साफ कर दिया कि वे किसी बहकावे या दबाव में आकर कोई रिपोर्ट नहीं बनाएंगे।
इससे पहले, पीजीआई के आपातकालीन विभाग के कमरा नंबर 5 में प्रोफेसर को जांच के लिए लाया गया था। मेडिसन विभाग के डॉक्टरों ने बीपी, इसीजी व अन्य जांच के बाद उन्हें फिट बता दिया।। वहीं संस्थान के एक अन्य डॉक्टर भी मौके पर पहुंच गए। सूत्रों की मानें तो वे उन्हें दाखिल करने के पक्ष में थे। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात स्टाफ ने आपत्ति जताई कि दूसरा डॉक्टर फिलहाल ड्यूटी पर नहीं है और अन्य किसी की सलाह पर वे किसी को दाखिल करने वाले नहीं हैं।
यदि उन पर अधिक दबाव बनाया गया तो वे अधिकारियों के समक्ष बात रखेंगे। इस पर उक्त डॉक्टर लौट गए। वहीं, आपातकालीन कक्ष की गैलरी, कक्ष नंबर पांच और आसपास के एरिया को पूरी तरह सील कर दिया गया था। हर आने जाने वाले पर सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी गई। मौके पर तैनात डॉक्टरों ने साफ कर दिया कि वे किसी बहकावे या दबाव में आकर कोई रिपोर्ट नहीं बनाएंगे।
ये है मामला
प्रोफसर वीरेंद्र कुमार
- फोटो : अमर उजाला
आरोप है कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रोफेसर विरेंद्र ने जाट आरक्षण आंदोलन को भड़काया। उनका एक विवादित ऑडियो टेप सामने आया था, जिसमें वे आंदोलन को दूसरी जगह भी शुरू करने की बात कह रहे हैं। इस टेप के आधार पर भिवानी के रिटायर्ड कैप्टन पवन कुमार ने प्रोफेसर विरेंद्र सिंह और दलाल खाप के प्रवक्ता कैप्टन मानसिंह के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया था।
ये है नियम
आपातकालीन विभाग में हर मरीज की जांच ड्यूटी पर तैनात टीम करती है। यदि मौके के डॉक्टरों को लगता है कि किसी एक्सपर्ट को बुलाया जाना चाहिए तो इसके लिए कॉल की जाती है। मरीज को दाखिल करने या न करने का अधिकार मौके के डॉक्टर का होता है। यदि मरीज कोर्ट से या पुलिस से संबंधित होता है तो उसे दाखिल करने के लिए सीएमओ की मंजूरी भी जरूरी होती है। इसके अलावा यदि कोई अन्य डॉक्टर बीच में कुछ करता है तो वह नियमों के खिलाफ है।
बोले अधिकारी
पीजीआई के आपात विभाग में नियमों के अनुसार ही काम होगा। हमारे लिए मरीज सिर्फ मरीज है और कुछ नहीं। मरीज का स्टेटस देखते हुए अब उसे स्पेशल ऐसा बेड दिया जाएगा, जिससे उसके आसपास आने जाने वालों पर सीसीटीवी से भी नजर रखी जा सके। प्रोफेसर विरेंद्र सिंह की सुरक्षा के लिए उनके साथ पुलिस थी। हमने अपने निजी सुरक्षा तंत्र को भी अलर्ट कर दिया था।
- डॉ. संदीप, डीएमएस, आपातकालीन विभाग, पीजीआइएमएस, रोहतक
ये है नियम
आपातकालीन विभाग में हर मरीज की जांच ड्यूटी पर तैनात टीम करती है। यदि मौके के डॉक्टरों को लगता है कि किसी एक्सपर्ट को बुलाया जाना चाहिए तो इसके लिए कॉल की जाती है। मरीज को दाखिल करने या न करने का अधिकार मौके के डॉक्टर का होता है। यदि मरीज कोर्ट से या पुलिस से संबंधित होता है तो उसे दाखिल करने के लिए सीएमओ की मंजूरी भी जरूरी होती है। इसके अलावा यदि कोई अन्य डॉक्टर बीच में कुछ करता है तो वह नियमों के खिलाफ है।
बोले अधिकारी
पीजीआई के आपात विभाग में नियमों के अनुसार ही काम होगा। हमारे लिए मरीज सिर्फ मरीज है और कुछ नहीं। मरीज का स्टेटस देखते हुए अब उसे स्पेशल ऐसा बेड दिया जाएगा, जिससे उसके आसपास आने जाने वालों पर सीसीटीवी से भी नजर रखी जा सके। प्रोफेसर विरेंद्र सिंह की सुरक्षा के लिए उनके साथ पुलिस थी। हमने अपने निजी सुरक्षा तंत्र को भी अलर्ट कर दिया था।
- डॉ. संदीप, डीएमएस, आपातकालीन विभाग, पीजीआइएमएस, रोहतक