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Chandigarh News: विभाजन के दंगों से भी अछूता नहीं रहा पीयू, दफ्तर में हुई थी प्रो. एमजी की हत्या

Sun, 13 Oct 2024 03:47 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Oct 2024 03:47 AM IST
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Prof. MG was murdered in the office
चंडीगढ़। सन 1947 में देश के विभाजन के समय पंजाब क्षेत्र में हुए दंगों से पंजाब विश्वविद्यालय अछूता नहीं रहा। देश बंटने के बाद पंजाब विश्वविद्यालय के बंटवारा होना था। प्रो. एमजी सिंह को ईस्ट पंजाब में बनने वाले नए विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार बनाना तय हुआ लेकिन उससे पहले ही सांप्रदायिक दंगों ने उनकी जान ले ली। यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब, लाहौर के दफ्तर में उनकी हत्या कर दी गई। 1946 में विश्वविद्यालय में पंजाब क्षेत्र के करीब 52 हजार विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। उस समय विश्वविद्यालय से 100 कॉलेजों को मान्यता प्राप्त थी, तीन कॉन्स्टिट्युएंट कॉलेज ओर 17 टीचिंग विभाग कार्य में रहे। 52 हजार में से 45 हजार छात्र मैट्रिकुलेशन परीक्षा और सात हजार फर्स्ट डिग्री की पढ़ाई कर रहे थे। सिंडिकेट ने विश्वविद्यालय के करीब एक करोड़ की संपत्ति के विभाजन के लिए 30 जून 1947 को विभाजन समिति का गठन किया। समिति ने ईस्ट और वेस्ट पंजाब की जनसंख्या के अनुसार संपत्ति को 60:40 प्रतिशत अनुपात में बांटने की रिपोर्ट दी, जिसे सिंडिकेट ने कुछ बदलावों के साथ माना। इसमें 60 प्रतिशत संपत्ति वेस्ट पंजाब (पाकिस्तान) और 40 प्रतिशत ईस्ट पंजाब (भारत) को देने का निर्णय हुआ। सीनेट ने इस निर्णय का समर्थन किया लेकिन उस समय वायसराय माउंटबेटन द्वारा गठित पार्टिशन कमेटी ने संपत्ति के बंटवारे की अनुमति नहीं दी और यह फैसला दोनों देश की सरकारों पर छोड़ दिया। हालांकि कमेटी ने इस बात का आश्वासन जरूर दिया कि ईस्ट पंजाब में नए विश्वविद्यालय का गठन किया जाएगा। नए विश्वविद्यालय के गठन होने तक यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब, लाहौर से ही पूरे पंजाब के छात्रों की परीक्षा का संचालन होना था। ईस्ट पंजाब सरकार ने परीक्षा रजिस्ट्रार प्रो. एमजी सिंह को लाहौर के यूनिवर्सिटी दफ्तर में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी नियुक्त किया। दंगों के चलते 1947 में यूनिवर्सिटी, लाहौर में ड्यूटी के दौरान उनका कत्ल कर दिया।
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एक अक्तूबर 1947 से इसकी कार्यकारिणी शुरू हुई : आरआर सेठी अपनी पुस्तक ए हिस्ट्री ऑफ द पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ 1947-67 में लिखते हैं कि प्रो. एमजी की हत्या के बाद ईस्ट पंजाब सरकार को पाकिस्तान की सरकार से कोई भी सहयोग मिलने की उम्मीद टूट गई। पीयू कुलपति प्रो. रेनू विग ने हाल ही में पीयू के भारत के स्थापना दिवस भाषण में बताया कि विभाजन के कारण हुई अशांति के कारण ईस्ट पंजाब में छात्रों की मई 1947 की परीक्षा नहीं हो पाई। पाकिस्तान सरकार से सहयोग न मिलने पर ईस्ट पंजाब सरकार ने ऑर्डिनेंस के जरिए ईस्ट पंजाब विश्वविद्यालय की स्थापना की और एक अक्तूबर 1947 से इसकी कार्यकारिणी शुरू हुई। प्रो. विग बताती हैं कि विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग विभिन्न कॉलेजों के जरिए चले, जिसमें डीएवी कॉलेज जालंधर, खालसा कॉलेज अमृतसर, गवर्नमेंट कॉलेज होशियारपुर और केमिकल इंजीनियरिंग विभाग पॉलिटेक्निक दिल्ली से चला। विश्वविद्यालय का प्रशासनिक कार्यालय शिमला में बनाया गया।
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