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Chandigarh News: एसजीपीसी अध्यक्ष चुनाव की तैयारी तेज, धामी को दोबारा उम्मीदवार बनाने की चर्चा

Sun, 26 Oct 2025 08:48 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Oct 2025 08:48 PM IST
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Preparations for SGPC president election intensify, talks on re-nominating Dhami
-3 नवंबर को होगा चुनाव, शिरोमणि अकाली दल पुनर्गठित भी उतार सकता है उम्मीदवार
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पंकज शर्मा
अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के 3 नवंबर में होने वाले वार्षिक चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आगामी दिनों में एसजीपीसी अध्यक्ष के साथ कार्यकारिणी कमेटी के सदस्यों का चुनाव होना है। इसी को लेकर शिरोमणि अकाली दल (बादल) और नवगठित शिरोमणि अकाली दल (पुनर्गठित) ने अपनी-अपनी रणनीति बढ़ा दी है।
शिरोमणि अकाली दल खेमे में चर्चा है कि मौजूदा अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी को एक बार फिर कमान सौंपने पर सहमति लगभग बन चुकी है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि पिछले कार्यकाल के दौरान धामी ने संगठनात्मक स्तर पर तालमेल बनाकर रखा और महत्वूपर्ण मौकों पर पंथक मुद्दों पर अपनी पकड़ बनाए रखी। यही कारण है कि बादल खेमे में धामी को दोबारा कमान सौंपने के पक्ष में आवाज बुलंद है।
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दूसरी ओर शिअद से अलग होकर पूर्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह की अगुआई में गठित शिरोमणि अकाली दल (पुनर्गठित) भी इस बार चुनावी मुकाबले में अपनी मौजूदगी मजबूत तरीके से दर्ज कराना चाहता है। संगठन की ओर से अध्यक्ष पद के लिए प्रमुख नामों पूर्व एसजीपीसी अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल, बीबी जगीर कौर, अमरीक सिंह शाहपुर और संत तरलोकीवाला के नामों पर विचार-विमर्श जारी है। हालांकि बीबी जगीर कौर ने फिलहाल उम्मीदवार बनने से इन्कार कर दिया है लेकिन पुनर्गठित ग्रुप के भीतर उनकी स्वीकार्यता और अनुभव को देखते हुए उनके नाम पर अंतिम समय तक समीकरण बनते रहने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा।
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सूत्रों के अनुसार एसजीपीसी की आंतरिक राजनीति में दल-बदल, निष्ठाओं के परीक्षण और सदस्यों पर पकड़ जैसे कारक इस बार भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे। दोनों गुटों की ओर से सदस्य संपर्क अभियान तेज हो चुका है और सभी सदस्यों तक पहुंच बनाकर समर्थन जुटाने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि पुनर्गठित अकाली दल ने अब तक अपने आधिकारिक उम्मीदवार का एलान नहीं किया है परंतु पार्टी नेतृत्व का कहना है कि नाम पर अंतिम फैसला जल्द घोषित कर दिया जाएगा।

पंथक राजनीति
सरगर्म

शिरोमणि कमेटी के आगामी चुनाव को लेकर पंथक हलकों में दिलचस्पी बढ़ चुकी है क्योंकि यह मुकाबला अब सिर्फ पद की दौड़ नहीं बल्कि सियासी भविष्य और पंथक नेतृत्व की दिशा तय करने वाला चुनाव माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में एसजीपीसी के भीतर सत्ता संतुलन, धार्मिक मुद्दों पर रुख और सिख संस्थाओं पर नियंत्रण का संघर्ष लगातार उभरता रहा है जिसके कारण इस चुनाव के नतीजे राजनीतिक स्तर पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं। कुल मिलाकर नवंबर में होने वाले चुनाव ने एसजीपीसी मुख्यालय श्री हरिमंदिर साहिब परिसर से लेकर पार्टी दफ्तरों तक राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुनर्गठित अकाली दल किन नामों को अंतिम रूप देता है और क्या बादल दल धामी की ताजपोशी दोबारा सुनिश्चित कर पाता है। संवाद
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