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छात्रों के खराब रिजल्ट पर शिक्षक के जवाब सुन अधिकारी अवाक
ब्यूरो/अमर उजाला, पठानकोट(पंजाब)
Updated Tue, 09 Feb 2016 09:30 AM IST
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‘हालात ठीक नहीं थे सर, एग्जाम कंट्रोलर बहुत सख्त था, नकल हुई नहीं और बच्चे फेल हो गए’ यह जवाब एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने डीईओ साहब को तब दिया जब उन्होंने रिजल्ट खराब होने का कारण पूछा।
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जिले के जिन सरकारी स्कूलों का तीन सालों से 10वीं व 12वीं कक्षा का परिणाम अच्छा नहीं रहा उनकी बैठक जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) पवन कुमार ने एवलन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बुलाई थी।
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सोमवार को डीईओ की ओर से बुलाई गई बैठक में सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों के अलावा वह शिक्षक शामिल थे जिनका अपने विषयों में तीन वर्षों का परिणाम 50 प्रतिशत से भी कम रहा है।
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डीईओ (से) ने शिक्षकों से अच्छा परिणाम न आने का कारण पूछा। जवाब में जिले के एक सरकारी स्कूल के इतिहास विषय के शिक्षक बलदेव सिंह ने परीक्षा के समय कंट्रोलर द्वारा सख्ती बरते जाने को ही परिणाम बुरा आने का कारण बता दिया। जवाब सुनकर सभी लोग हक्के-बक्के रह गए।
वहीं डीईओ ने कहा कि शिक्षा विभाग की ओर से बीते दिनों राज्यस्तरीय बैठक भी बुलाई गई थी जिसमें उन शिक्षकों को तलब किया गया था जिनके विषयों का परिणाम बीस प्रतिशत से भी कम रहा था। सोमवार को उसी कड़ी में दूसरी बैठक जिलास्तर पर की गई है। इस दौरान ओंकार सिंह, विकास धवन व स्कूली प्रिंसिपल-अध्यापक उपस्थित थे।
विद्यार्थियों के सिर भी ठीकरा फोड़ा
कुछ अध्यापकों ने मेडिकल छुट्टी का बहाना बनाया तो कुछ ने इसका सारा ठीकरा विद्यार्थियों के सिर फोड़ दिया। शिक्षा अधिकारी भी इन तर्कों को सुनकर हैरान थे। यही नहीं कुछ शिक्षकों ने तो यह भी कहा कि पीएसईबी के नियमों के अनुसार आठवीं तक बच्चों को जैसे तैसे पास कर दिया जाता है लेकिन उन्हीं बच्चों को आगे की पढ़ाई में मुश्किल होती है। इससे स्कूलों का परिणाम प्रभावित होता है। एक शिक्षक ने बताया कि विभाग की ओर से किसी सेमिनार में औचक लगाई जाने वाली ड्यूटी के कारण सिलेबस काफी छूट जाता है।
पवन कुमार, डीईओ बोर्ड ने बताया कि परीक्षाओं में परिणाम अच्छा नहीं आना चिंता का विषय है। इसीलिए यह बैठक बुलाई गई थी कि शिक्षकों की मुश्किलें सुनीं जाएं। शिक्षकों की समस्याएं लिखित रूप में शिक्षा विभाग को भेजी जाएंगी।