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Chandigarh News: कार्तिकेय मंदिर में भगवान सूर्य को अर्पित किया पोंगल
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चंडीगढ़। सेक्टर 31 के कार्तिकेय मंदिर में वीरवार को पोंगल पर्व मनाया। तमिल समाज के बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुंचकर भगवान की पूजा की। सभी ने मिलकर पोंगल प्रसाद बनाया। भगवान सूर्य को अर्पित करने बाद सामूहिक रूप से भोजन किया।
कार्तिकेय मंदिर कमेटी के महासचिव राज शेखरण ने बताया कि इस मौके पर तमिल समाज के लोग पारंपरिक परिधान धारण कर मंदिर पहुंचे। उन्होंने बताया कि पूजा के लिए मद्रास से 250 गन्ना मंगवाया गया। गन्ने के रस से खीर बनाकर भगवान सूर्य को अर्पित की। उन्होंने बताया कि गन्ना और गुड़ के अलावा विविध प्रकार की सब्जियां भगवान सूर्य को अर्पित की गईं। पूजा के बाद प्रीति भोज हुआ। केले के पत्ते पर लोगों ने पारंपरिक लजीज व्यंजन परोसे गए।
उन्होंने बताया कि पोंगल का त्योहार चार दिनों का होता है। पोंगल पर्व चार दिनों का होता है। चंडीगढ़ में ऐसा संभव नहीं है इसलिए यहां पर तमिलनाडु के ट्राइसिटी में रहनेवाले लोग एक जगह एकत्र होकर पर्व मनाते हैं। यह पर्व इसलिए मनाया जाता है ताकि हमारे बच्चे सीख सकें और अपनी पुरानी परंपराओं को जीवित रख सकें।
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चार दिनों के पोंगल में पहला दिन बोगी पोंगल में घर की साफ-सफाई कर खराब और पुरानी चीजों को जलाते हैं। दूसरे दिन सभी नए कपड़े पहनकर पूजा कर सूर्य देवता की पूजा करते हैं। इस मौके पर सूर्य देवता को नया फसल अर्पित करते हैं। तीसरे दिन मटटू पोंगल में पशुओं को स्नान कराके धन्यवाद करते हैं कि उनके कारण ही घर में नया फसल आया है। चौथे दिन कन्नम पोंगल होता है। इस दिन समुद्र या नदी के किनारे लोग जाते हैं। वहां अपने रिश्तेदारों से मिलते हैं।
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कार्तिकेय मंदिर कमेटी के महासचिव राज शेखरण ने बताया कि इस मौके पर तमिल समाज के लोग पारंपरिक परिधान धारण कर मंदिर पहुंचे। उन्होंने बताया कि पूजा के लिए मद्रास से 250 गन्ना मंगवाया गया। गन्ने के रस से खीर बनाकर भगवान सूर्य को अर्पित की। उन्होंने बताया कि गन्ना और गुड़ के अलावा विविध प्रकार की सब्जियां भगवान सूर्य को अर्पित की गईं। पूजा के बाद प्रीति भोज हुआ। केले के पत्ते पर लोगों ने पारंपरिक लजीज व्यंजन परोसे गए।
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उन्होंने बताया कि पोंगल का त्योहार चार दिनों का होता है। पोंगल पर्व चार दिनों का होता है। चंडीगढ़ में ऐसा संभव नहीं है इसलिए यहां पर तमिलनाडु के ट्राइसिटी में रहनेवाले लोग एक जगह एकत्र होकर पर्व मनाते हैं। यह पर्व इसलिए मनाया जाता है ताकि हमारे बच्चे सीख सकें और अपनी पुरानी परंपराओं को जीवित रख सकें।
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चार दिनों के पोंगल में पहला दिन बोगी पोंगल में घर की साफ-सफाई कर खराब और पुरानी चीजों को जलाते हैं। दूसरे दिन सभी नए कपड़े पहनकर पूजा कर सूर्य देवता की पूजा करते हैं। इस मौके पर सूर्य देवता को नया फसल अर्पित करते हैं। तीसरे दिन मटटू पोंगल में पशुओं को स्नान कराके धन्यवाद करते हैं कि उनके कारण ही घर में नया फसल आया है। चौथे दिन कन्नम पोंगल होता है। इस दिन समुद्र या नदी के किनारे लोग जाते हैं। वहां अपने रिश्तेदारों से मिलते हैं।