किसानों पर फिर गरमाई सियासत, हुड्डा ने किया पिपली जाने का एलान, दिग्विजय ने जांच की मांग की
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हरियाणा में किसानों के मुद्दे पर फिर राजनीति गरमा गई है। केंद्र सरकार की तरफ से जारी तीन कृषि अध्यादेशों का विरोध कर रहे किसानों पर लाठीचार्ज कर पुलिस ने आग में घी डालने का काम किया है। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट व संपूर्ण कर्ज माफी को लेकर राज्य में लंबे समय से आंदोलनरत हैं।
गुरुवार को पीपली में किसानों पर हुए लाठीचार्ज से विपक्ष को बैठे-बैठाए सरकार को घेरने का मुद्दा मिल गया है। सरकार की परेशानी नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने शुक्रवार को पीपली जाने का एलान कर और बढ़ा दी है। सरकार किसी सूरत में नहीं चाहेगी कि हुड्डा पिपली में किसानों के बीच पहुंचें।
किसानों पर लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष, भाजपा-जजपा दोनों को घेर रहा है। गठबंधन सरकार होने के कारण जजपा नेता व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला तो चुप्पी साधे हुए हैं लेकिन उनके छोटे भाई व इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला ने किसानों पर लाठीचार्ज की जांच कराने की मांग की है।
प्रदेश में कोई भी राजनीतिक दल किसानों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहता है। भाजपा ने तो किसानों को साधने के लिए अब प्रदेशाध्यक्ष की कमान ही किसान नेता ओपी धनखड़ को सौंपी है। एसवाईएल व दादुपुर नलवी नहर को लेकर किसान पहले ही आंदोलनरत रहे हैं। विपक्ष में रहे हर दल ने भी इन मुद्दों को खूब भुनाया। अब विपक्ष के हाथ तीन कृषि अध्यादेशों का मुद्दा लग गया है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने किसानों और व्यापारियों पर लाठीचार्ज की निंदा की है। उन्होंने कहा कि तीनों कृषि अध्यादेश सरकार को तुरंत वापस लेने पड़ेंगे, वरना लोग मोदी-मनोहर सरकार को चलता कर देंगे। किसानों पर लाठियां बरसाने वाले जींस व टीशर्ट में भी थे, वे पुलिस कर्मी थे या कोई और इसकी जांच हो। पुलिस कब से जींस-टीशर्ट पहनने लग पड़ी, ये भी सरकार बताए।
किसानों पर लाठीचार्ज के बाद आज पीपली पहुंचेंगे हुड्डा
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कुरुक्षेत्र के पीपली में होने वाली किसान रैली में जा रहे किसानों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर आक्रोश जाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को लाठी से दबाया नहीं जा सकता। लोकतंत्र में हर किसी को अपनी आवाज उठाने और कहीं भी जाने का अधिकार है। वो खुद शुक्रवार को पीपली जाएंगे और किसान, मजदूर और आढ़तियों से मुलाकात करेंगे।
अन्नदाता अपनी जायज मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं। कोरोना काल में किसान विरोधी तीन अध्यादेश लाकर सरकार ने खुद किसान को सड़क पर आने के लिए मजबूर किया है। बिना सदन में चर्चा और एमएसपी की गारंटी के कोई भी अध्यादेश किसान हित में नहीं हो सकता। अगर सरकार व्यवस्था में कोई परिवर्तन करना चाहती है तो उसे मंडी और एमएसपी व्यवस्था के संरक्षण की गारंटी देनी होगी। बीजेपी को अपने वादे के मुताबिक लागत और स्वामीनाथन के सी-2 फार्मूले पर एमएसपी देनी होगी।
हुड्डा ने कहा कि सरकार कोरोना का हवाला देकर किसान की आवाज दबाना चाहती है। लेकिन वो इसी कोरोना काल में किसानों पर तीनों अध्यादेश थोप रही है। अगर उसे किसान और कोरोना की इतनी ही चिंता है तो वो तीनों अध्यादेशों को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रही है। एक तरफ बीजेपी-जेजेपी गठबंधन सरकार किसानों को चौतरफा मार मारने में लगी है और दूसरी तरफ वो किसान को रोने भी नहीं देती।
अध्यादेश वापस न लिए तो इनेलो सड़कों पर उतरेगी: अभय
इनेलो के प्रधान महासचिव एवं विधायक अभय चौटाला ने किसानों पर लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि किसान शांतिपूर्वक अपना प्रर्दशन करने आए थे, न कि कोई हिंसा करने। किसानों, आढ़तियों एवं मजदूरों को प्रदर्शन करने से रोकना उनके सांविधानिक अधिकारों का हनन है। अगर सरकार ने किसान विरोधी अध्यादेश वापस नहीं लिए तो इनेलो किसानों के साथ सड़क पर उतरेगी।
किसानों पर लाठीचार्ज निंदनीय: दिग्विजय
इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला ने ट्वीट कर कहा है कि किसानों के साथ हुई लाठीचार्ज की घटना बहुत निंदनीय है। किसानों को हुई पीड़ा को हम अपनी पीड़ा मानते हैं। गुरुवार के घटनाक्रम की जांच होनी चाहिए। यह दुखद घटना है, ऐसा नहीं होना चाहिए था।