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पंजाब में राजनीति गर्म, छात्र बोले- पीयू ने नहीं दिखाई इच्छाशक्ति, यहां भी हो सकते थे छात्र संघ चुनाव

Fri, 21 Jan 2022 02:00 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 21 Jan 2022 02:00 AM IST
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Politics heated up in Punjab, students said - PU did not show willpower, student union elections could have been held here too
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी समेत शहर के 10 से अधिक कॉलेजों को दो साल से छात्र प्रतिनिधि नहीं मिल पाए। इस कारण छात्रों के मुद्दे दबे रह गए हैं। उनकी आवाज उठाने वाले छात्र संघ अध्यक्ष नहीं हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि छात्र संघ चुनाव भी हो सकते थे, लेकिन इसके लिए इच्छाशक्ति नहीं दिखाई गई। पीयू केवल सीनेट चुनाव तक ही सीमित रही। अब पंजाब में विधानसभा चुनाव हैं। वहां माहौल गर्म है। मुद्दों की बात हो रही है, पर छात्र अपने शिक्षण संस्थानों में ठगे से महसूस कर रहे हैं। छात्रों का तर्क है कि छात्र संघ चुनाव से ही राजनीति में प्रवेश मिलता है, लेकिन यहां कॉलेज व विश्वविद्यालय में चुनाव नहीं करवाए गए।
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पीयू में हर साल सितंबर माह में छात्र संघ चुनाव होते थे। 16 हजार से अधिक विद्यार्थी अपना छात्र नेता चुनते थे। पीयू की अधिकांश कमेटियों में पीयू छात्र संघ अध्यक्ष को बुलाया जाता था। छात्रों से जुड़े हर मसले में अध्यक्ष की बात सुनी जाती थी। इसी तरह शहर के 10 से अधिक कॉलेजों में भी हजारों विद्यार्थी अपना छात्र प्रतिनिधि चुनते थे। एक ही दिन सभी चुनाव होते थे। कॉलेज अध्यक्ष भी छात्रों के मुद्दों को प्रमुखता से रखते थे। अब दो साल से अफसरशाही हावी है। हर मसले पर अधिकारी निर्णय लेते हैं।
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अपनी बात पहुंचाने के लिए छात्रों को दो साल में करने पड़े 60 से अधिक प्रदर्शन
छात्र अपनी बात छात्र संगठनों तक पहुंचाते हैं, लेकिन उतना प्रभाव नहीं पड़ता। पिछले दो साल में छात्रों को 60 से अधिक धरना प्रदर्शन करने पड़े हैं। यह इसलिए किए गए कि छात्रों के हितों के खिलाफ निर्णय लिए गए या फिर छात्रों ने जो मांग की उस पर काम नहीं किया गया। हालांकि पीयू के अधिकारियों ने कुछ मुद्दों को गहराई से समझा, जिन पर सवाल खड़े नहीं हुए। पीयू का तर्क है कि कोरोना से स्थिति ठीक होने के बाद ही चुनाव की बात हो सकती है।
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छात्रों की समस्याएं हल कर रहे हैं
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छात्र संघ चुनाव दो साल से नहीं हुआ। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। पीयू के अधिकारी सभी निर्णय खुद लेते हैं। छात्र संगठनों को पता लगता है तो विरोध करते हैं, तब जाकर अधिकारी सुनते हैं जबकि यह काम पहले हो जाना चाहिए। हम छात्रों की समस्याएं हल करवा रहे हैं।

- निखिल नरमेटा, अध्यक्ष, एनएसयूआई पीयू
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छात्र प्रतिनिधि होना बेहद जरूरी
छात्र संघ चुनाव कराने के लिए हमने पीयू को राय दी थी, लेकिन इस पर काम नहीं किया। हमारे पास हर दिन छात्रों की समस्याओं के लिए कॉल आती हैं और हम हल करवाते हैं। छात्र प्रतिनिधि होना बेहद जरूरी है। जब तक छात्र संघ चुनाव न हो जाएं पीयू को हर छात्र संगठन से एक-एक प्रतिनिधि अपनी कमेटियों में शामिल करना चाहिए।
- हरीश गुर्जर, पूर्व अध्यक्ष, एबीवीपी पीयू
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