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Hindi News ›   Chandigarh ›   Police personnel who help drug smugglers in Punjab will be dismissed

Punjab: नशा तस्करों की मदद पड़ेगी भारी, तुरंत बर्खास्त होंगे पुलिस अधिकारी, गृह सचिव ने दाखिल किया हलफनामा

Thu, 02 Nov 2023 07:23 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 02 Nov 2023 07:23 PM IST
सार

पंजाब सरकार ने बताया कि जिन अधिकारियों पर एनडीपीएस मामलों को लेकर विभागीय जांच जारी है या ऐसे मामलों की जांच में देरी के दोषी हैं या आरोपी की मदद के दोषी हैं तो उन्हें किसी भी थाने में एसएचओ नहीं बनाया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें राज्य में किसी भी मामले की जांच की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

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Police personnel who help drug smugglers in Punjab will be dismissed
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब में नशे के मामलों में अपराधी का सहयोग करना पुलिस अधिकारियों को महंगा पड़ेगा। सरकार ने ऐसे पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त करने का निर्णय लिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इन पुलिस अधिकारियों की मदद करने वालों के लिए भी यही सजा होगी। पंजाब के गृह सचिव ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर यह जानकारी दी है।

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हलफनामे में बताया गया कि नशा तस्करी के मामलों में पुलिस कर्मियों के आधिकारिक गवाह के रूप में उपस्थित न होने के कारण मुकदमे का निपटारा करने में देरी होती है। पंजाब सरकार ने भविष्य में ऐसे पुलिसकर्मियों और आरोपियों की मदद करने वाले पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त करने समेत सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। एनडीपीएस मामलों के आरोपी को शरण देने/सहायता करने के मामले में पुलिस अधिकारी को बर्खास्त कर दिया जाएगा।
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कोई पुलिस अधिकारी जो ऐसे मामलों में आरोपी पुलिस अधिकारी के सहयोग का प्रयास करेगा, वह भी उसी दंड का पात्र होगा। गृह विभाग ने 28 अक्तूबर को डीजीपी पंजाब को इस मुद्दे के समाधान के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी करने के लिए विभिन्न निर्देश और अनुरोध जारी किया है।

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नशा तस्करों से संपर्क पड़ेगा भारी, नहीं मिलेगी जांच की जिम्मेदारी

पंजाब सरकार ने बताया कि जिन अधिकारियों पर एनडीपीएस मामलों को लेकर विभागीय जांच जारी है या ऐसे मामलों की जांच में देरी के दोषी हैं या आरोपी की मदद के दोषी हैं तो उन्हें किसी भी थाने में एसएचओ नहीं बनाया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें राज्य में किसी भी मामले की जांच की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

हजारों की संख्या में लटक रहे मामले

हाईकोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में 16149 मामले ऐसे हैं जिनमें दो साल पहले चालान पेश किया जा चुका है लेकिन अभी तक उनका ट्रायल पूरा नहीं हुआ है। अमृतसर की अदालत में 1596, जालंधर में 1254, मोगा में 1082, पटियाला में 979 और कपूरथला की अदालत में 975 मामले विचाराधीन हैं।

हलफमाने के अनुसार ये निर्देश जारी

  • ड्रग मामलों में कोई भी पुलिस अधिकारी गवाही के लिए कोर्ट से एक से ज्यादा मौका नहीं मांगेगा
  • जमानती व गैर-जमानती वारंट से बुलाए गए गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र के डीएसपी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे
  • कोई भी पुलिस अधिकारी या सरकारी अधिकारी, जो स्वेच्छा से गवाह के रूप में उपस्थित होने में विफल रहता है तो उसके आचरण की जांच की जाएगी
  • जांच की रिपोर्ट के आधार पर निलंबन या एफआईआर दर्ज करने का निर्णय लिया जाएगा
  • एफआईआर की स्थिति में जांच पंजाब पुलिस की एक अलग शाखा करेगी
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