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PGI डायरेक्टर की चयन प्रक्रिया पर फिलहाल रोक, लगे गंभीर आरोप

Fri, 11 Nov 2016 09:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 11 Nov 2016 09:25 AM IST
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PGI director selection process on hold, the serious charges
पीजीआई चंडीगढ़
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पीजीआई डायरेक्टर की चयन प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। पीजीआई की एससी-एसटी इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन ने आयोग को शिकायत दी थी कि डायरेक्टर की चयन प्रक्रिया में भेदभाव किया गया है। 
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कैंडिडेट का इंटरव्यू लेने के लिए बनाई गई सेलेक्शन कमेटी में अनुसूचित जाति का एक भी सदस्य शामिल नहीं था, जबकि इंटरव्यू देने वालों में एससी कैटेगिरी के पांच कैंडिडेट शामिल थे। नियम के मुताबिक सलेक्शन कमेटी में अनुसूचित जाति का एक सदस्य होना जरूरी था। एसोसिएशन की शिकायत पर आयोग ने संज्ञान लेते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सेक्रेटरी और पीजीआई प्रशासन को पत्र भेजकर दस नवंबर को हाजिर होने का निर्देश दिया था।
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वीरवार को इस मुद्दे पर नई दिल्ली स्थित आयोग के दफ्तर में सुनवाई हुई। किसी कारणवश सुनवाई के दौरान हेल्थ सेक्रेटरी मौजूद नहीं थे। उनकी जगह मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी शामिल हुए। आयोग के सदस्यों ने ज्वाइंट सेक्रेटरी से चयन प्रक्रिया की पूरी कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी। ज्वाइंट सेक्रेटरी की ओर से कहा गया कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई है। हालांकि इंटरव्यू के दौरान वे मौजूद नहीं थे। इस पर आयोग ने कहा कि जब आप मौजूद नहीं थे, तो आपसे बातचीत का कोई फायदा नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब से आयोग संतुष्ट नहीं हुआ।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के जवाब से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग संतुष्ट नहीं हुआ

PGI director selection process on hold, the serious charges
चंडीगढ़ का पीजीआई अस्पताल - फोटो : PTI
आयोग ने हेल्थ सेक्रेटरी को समन कर दोबारा से 17 नवंबर को पेश होने को कहा है। साथ ही निर्देश भी दिए हैं कि जब तक आयोग के सामने पूरी तस्वीर साफ नहीं होती, तब तक डायरेक्टर के चयन प्रक्रिया को रोक दिया जाए।

यह भी आरोप  
पीजीआई की एससी-एसटी इंप्लाइज एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया था कि सलेक्शन कमेटी ने जो तीन नाम फाइनल किए हैं, उनकी वरीयता में भी भेदभाव किया गया है। आरोप के मुताबिक एससी कैटेगिरी के प्रोफेसर जगतराम बाकी दोनों प्रोफेसर अनिल भंसाली और मीनू सिंह के मुकाबले काफी सीनियर हैं। उनके पब्लिकेशन भी काफी अच्छे हैं, इसके बावजूद उन्हें सबसे नीचे रखा गया है। पीजीआई डायरेक्टर की चयन प्रक्रिया पिछले छह महीने से चल रही है।

इंटरव्यू के लिए 29 कैंडिडेट को बुलाया गया था, जिनमें से 26 लोग शामिल हुए थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से गठित सलेक्शन कमेटी ने तीन सदस्य को फाइनल किया। उसके बाद इन नामों पर इंस्टीट्यूट बाडी (आईबी) की मीटिंग में रखा गया। आईबी ने तीनों नामों को आगे बढ़ाकर अप्वाइंटमेंट कमेटी आफ दी कैबिनेट में भेज दिया गया है। ये मीटिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होती है।
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