फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   PGI Chandigarh saved two lives by transplanting kidney

बेटे ने पेश की मिशाल, किडनी डोनेट करवा दो लोगों को दी नई जिंदगी, बोला- पापा दूसरों की करते थे मदद

Fri, 05 Jun 2020 12:11 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 05 Jun 2020 12:11 AM IST
सार

  • सफल ऑपरेशन के बाद दोनों मरीज डिस्चार्ज, देश में अंग प्रत्यारोपण पर है रोक
  • दोनों मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार के निर्देशों के मुताबिक हुआ प्रत्यारोपण

विज्ञापन
PGI Chandigarh saved two lives by transplanting kidney
पीजीआई चंडीगढ़।

विस्तार

लॉकडाउन के दौरान अंग प्रत्यारोपण पर रोक के बावजूद पीजीआई ने दो गंभीर मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट कर उनकी जान बचा ली। सफल ऑपरेशन के बाद दोनों मरीजों को गुरुवार को पीजीआई से छुट्टी दे दी गई। घर जाते वक्त उन्होंने किडनी दान करने वाले परिवार को धन्यवाद दिया और कहा कि किसी ने जाते-जाते उन्हें जीवनदान दे दिया। उसके इस उपहार को हम जीवन में कभी नहीं भूल सकते। वहीं, पीजीआई के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. एके गुप्ता ने सर्जरी करने वाले डॉक्टरों की टीम के साथ दोनों मरीजों को शुभकामनाएं देकर घर रवाना किया।

विज्ञापन


बता दें कि पीजीआई में इन मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लॉकडाउन के कारण पूरे देश में अंग प्रत्यारोपण पर रोक है लेकिन इन मरीजों की गंभीर हालत को देखते हुए भारत सरकार के दिशा-निर्देश के अनुसार इनमें किडनी प्रत्यारोपण की गई, जो पूरी तरह से सफल साबित हुई है। 
विज्ञापन



यह भी पढ़ें- प्राइवेट ही नहीं सरकारी नौकरी पर भी छाया संकट, पंजाब में इन कर्मचारियों की छंटनी होगी
विज्ञापन
विज्ञापन


शिमला के नरेश ने दिया दोनों को जीवनदान  
पीजीआई रिनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के हेड ऑफ डिपार्टमेंट प्रो. आशीष शर्मा ने बताया कि जिन दो मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की गई है, उनका 3 साल से डायलिसिस चल रहा था। लॉकडाउन के दौरान उनकी स्थिति जब काफी बिगड़ गई तो किडनी ट्रांसप्लांट करने का निर्णय लिया गया। उस समय हिमाचल के शिमला निवासी 50 वर्षीय नरेश कुमार का परिवार उनके लिए वरदान साबित हुआ। 


नरेश कुमार 6 मई को शिमला में अपने काम पर जा रहे थे। इस दौरान दुर्घटना में उनके सिर पर गंभीर चोट आई। 6 मई को इन्हें पीजीआई में भर्ती किया गया। 10 दिनों तक जिंदगी मौत से जूझने के बाद नरेश की 15 मई को मौत हो गई। उनके परिवार की अनुमति के बाद उनकी दोनों किडनी दोनों गंभीर मरीजों में ट्रांसप्लांट की गईं।    

दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे पापा   
नरेश के पुत्र पुनीत का कहना है कि पापा को खोने का दुख किसी भी स्तर पर कम नहीं हो सकता लेकिन एक बात का संतोष है कि पापा की वजह से 2 लोगों को नई जिंदगी मिली है। पुनीत ने बताया कि उनके पिता हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते थे और हम सब को भी ऐसा करने की सीख देते थे। उनके दुनिया से जाने के बाद परिवार हर पल उनकी कमी को महसूस कर रहा है लेकिन उनकी वजह से जिन दो परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लौटी है वह हमारे लिए खुशी की बात है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed