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विरोध के बाद बदलाव, पीजीआई चंडीगढ़ की इमरजेंसी में सीनियर डॉक्टर शाम को भी देखेंगे मरीज
Fri, 07 Feb 2020 12:18 PM IST
खुशबू गोयल
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 07 Feb 2020 12:18 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
चंडीगढ़ पीजीआई प्रशासन ने इमरजेंसी में सीनियर डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने के निर्देश जारी किए थे। इसके तहत प्रोफेसर से नीचे रैंक के सीनियर डॉक्टर सुबह आठ से 12 बजे तक इमरजेंसी में रोस्टर के हिसाब से ड्यूटी देंगे, लेकिन इस निर्देश का पीजीआई की फेकल्टी एसोसिएशन ने विरोध जताया। विरोध के बाद नया सिस्टम बनाया गया है।
इसके तहत अब सीनियर डॉक्टर शाम के वक्त भी इमरजेंसी का दौरा करेंगे और मरीज को स्थिति के मुताबिक सीनियर रेजिडेंट को इलाज का निर्देश देंगे। बताया जा रहा है कि इससे इमरजेंसी में कुछ सुधार आने की गुंजाइश है। पीजीआई इमरजेंसी में मरीज ज्यादा होने की वजह से हालात खराब रहते हैं। जितनी इमरजेंसी की क्षमता है, उससे तीन गुना ज्यादा मरीजों का इलाज इमरजेंसी में होता है।
अक्सर मरीजों की शिकायत रहती है कि रेजिडेंट डॉक्टर उनसे सही व्यवहार नहीं करते हैं। इलाज में देरी करते हैं। इससे मरीजों की हालत बिगड़ जाती है। पिछले दिनों ऐसे कई लापरवाही के मामले सामने आए। मरीज के परिजनों ने भी इस बारे में पीजीआई प्रशासन को शिकायत दी।
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उसके बाद पीजीआई प्रशासन ने इंटरनल मेडिसिन को इमरजेंसी में सुबह आठ से रात 12 बजे तक सीनियर डॉक्टर की ड्यूटी लगाने के निर्देश जारी किए, लेकिन इस फैसले का पीजीआई फेकल्टी एसोसिएशन ने विरोध जताया।
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इसके तहत अब सीनियर डॉक्टर शाम के वक्त भी इमरजेंसी का दौरा करेंगे और मरीज को स्थिति के मुताबिक सीनियर रेजिडेंट को इलाज का निर्देश देंगे। बताया जा रहा है कि इससे इमरजेंसी में कुछ सुधार आने की गुंजाइश है। पीजीआई इमरजेंसी में मरीज ज्यादा होने की वजह से हालात खराब रहते हैं। जितनी इमरजेंसी की क्षमता है, उससे तीन गुना ज्यादा मरीजों का इलाज इमरजेंसी में होता है।
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अक्सर मरीजों की शिकायत रहती है कि रेजिडेंट डॉक्टर उनसे सही व्यवहार नहीं करते हैं। इलाज में देरी करते हैं। इससे मरीजों की हालत बिगड़ जाती है। पिछले दिनों ऐसे कई लापरवाही के मामले सामने आए। मरीज के परिजनों ने भी इस बारे में पीजीआई प्रशासन को शिकायत दी।
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उसके बाद पीजीआई प्रशासन ने इंटरनल मेडिसिन को इमरजेंसी में सुबह आठ से रात 12 बजे तक सीनियर डॉक्टर की ड्यूटी लगाने के निर्देश जारी किए, लेकिन इस फैसले का पीजीआई फेकल्टी एसोसिएशन ने विरोध जताया।
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एसोसिएशन के प्रेसिडेंट जेएस ठाकुर का कहना था कि डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने के बजाय एक ऐसा सिस्टम बनाना होगा, जिससे मरीजों को इमरजेंसी में परेशान न होना पड़े। इसके लिए सिर्फ पीजीआई नहीं बल्कि चंडीगढ़ और आसपास के अस्पतालों को प्रयास करना होगा। डॉक्टरों पर पहले से ही काम का दबाव काफी है।
यदि वे इमरजेंसी में भी ड्यूटी देंगे तो रिसर्च व टीचिंग का काम कब करेंगे। इसके बाद पीजीआई प्रशासन ने इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट व स्टाफ को-ऑर्डिनेटर कमेटी के चेयरमैन डॉ. राकेश कोचर को बातचीत कर नया सिस्टम बनाने के निर्देश दिए।
कोचर के मुताबिक बातचीत के बाद तय किया गया कि अब अलग-अलग डिपार्टमेंट के सीनियर डॉक्टर शाम को भी इमरजेंसी का दौरा करेंगे और मरीज की स्थिति देखने के बाद तय करेंगे कि मरीज को ओपीडी भेजना है या इमरजेंसी में ही उसका इलाज करेंगे।
इमरजेंसी में अभी यह था सिस्टम
पीजीआई की इमरजेंसी में मौजूदा समय में सीनियर व जूनियर रेजिडेंट की ड्यूटी लगती है। इसके अतिरिक्त सीनियर डॉक्टर ऑन काल मौजूद रहते हैं। इसका मतलब है कि यदि कोई केस गंभीर लगता है तो फोन कर सीनियर डॉक्टर को इमरजेंसी में बुलाया जा सकता है। सुबह के वक्त अलग-अलग डिपार्टमेंट के सीनियर डॉक्टर इमरजेंसी का राउंड लगाते हैं।
यदि वे इमरजेंसी में भी ड्यूटी देंगे तो रिसर्च व टीचिंग का काम कब करेंगे। इसके बाद पीजीआई प्रशासन ने इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट व स्टाफ को-ऑर्डिनेटर कमेटी के चेयरमैन डॉ. राकेश कोचर को बातचीत कर नया सिस्टम बनाने के निर्देश दिए।
कोचर के मुताबिक बातचीत के बाद तय किया गया कि अब अलग-अलग डिपार्टमेंट के सीनियर डॉक्टर शाम को भी इमरजेंसी का दौरा करेंगे और मरीज की स्थिति देखने के बाद तय करेंगे कि मरीज को ओपीडी भेजना है या इमरजेंसी में ही उसका इलाज करेंगे।
इमरजेंसी में अभी यह था सिस्टम
पीजीआई की इमरजेंसी में मौजूदा समय में सीनियर व जूनियर रेजिडेंट की ड्यूटी लगती है। इसके अतिरिक्त सीनियर डॉक्टर ऑन काल मौजूद रहते हैं। इसका मतलब है कि यदि कोई केस गंभीर लगता है तो फोन कर सीनियर डॉक्टर को इमरजेंसी में बुलाया जा सकता है। सुबह के वक्त अलग-अलग डिपार्टमेंट के सीनियर डॉक्टर इमरजेंसी का राउंड लगाते हैं।