मुसीबत : हर माह चार हजार का फटका लगा रही किफायती किराया आवासीय योजना, मजदूरों पर भारी पड़ रहा किराया
- चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने शुरू की थी किफायती किराया आवासीय योजना
- चंडीगढ़ के सेक्टर-52 और 56 की टीन कॉलोनी में रहने वाले 1700 परिवारों को मलोया में दिया गया मकान
- किराया, बिजली और पानी का बिल मिलाकर हर महीने देने पड़ रहे 4000 रुपये से ज्यादा
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चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने चंडीगढ़ के सेक्टर-52 और 56 की टीन कॉलोनी में रहने वाले 1700 परिवारों को किफायती किराया आवासीय योजना के तहत मलोया में मकान दिया है। अब यही योजना इनमें से कई लोगों के गले की हड्डी बन गई है। मलोया के मकानों में रहने वाले ज्यादातर लोगों का कहना है कि मकान का किराया, बिजली और पानी का बिल मिलाकर हर महीने 4000 रुपये से ज्यादा देने पड़ रहे हैं, जो बहुत ज्यादा है।
सेक्टर-52 और 56 की टीन कॉलोनी को अब सीएचबी ने तोड़ दिया है और जमीन खाली कराकर अपने कब्जे में ले लिया है। बोर्ड ने टीन कॉलोनी के हर परिवार को मलोया में मकान पाने का मौका दिया। इन मकानों में रहने के लिए 3000 रुपये का मासिक किराया तय किया गया। लोगों के सामने कोई विकल्प नहीं रखा गया है, इसलिए लगभग सभी ने मलोया में किराये पर मकान ले लिया। हालांकि कुछ लोगों ने आवंटन के समय भी यह कहकर मकान लेने से मना कर दिया कि किराया काफी ज्यादा है। बोर्ड ने कालोनी तोड़ने की घोषणा कर दी थी, इसलिए कुछ लोग चंडीगढ़ के दूसरे इलाकों में जाकर बस गए।
मलोया में सीएचबी के मकानों में रहने वाले ज्यादातर लोग दिहाड़ीदार मजदूर हैं। ऐसे में हर महीने मकान का किराया, पानी और बिजली के बिल के लिए 4000 रुपये निकालना मुश्किल हो रहा है। यह मकान 25 साल के लिए आवंटित किए गए हैं। लिहाजा लोगों के पास विकल्प नहीं है लेकिन उनकी मांग है कि किराया कम किया जाए ताकि वह अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मलोया में उन्हें सुविधाएं मिली हैं। सेक्टर-52 और 56 में पीने के पानी और शौचालय की काफी समस्या थी, जो यहां बिल्कुल नहीं है। इसके अलावा घर के बाहर खुले पार्क हैं। बच्चों के पढ़ने के लिए पड़ोस में स्कूल है। घर भी पक्के हैं। यहां की सड़कें भी ठीक हैं लेकिन किराया ज्यादा होने की वजह से उन्हें गुजर-बसर करने में समस्या हो रही है।
लोगों ने यह भी कहा कि यहां आने के बाद उनके खर्चे भी बढ़ गए हैं, इसलिए बोर्ड को किराया कम करना चाहिए। गौरतलब है कि मलोया में दो योजनाओं के तहत लोगों को मकान दिए गए हैं। एक पुनर्वास योजना है, जिसके तहत करीब 2300 परिवारों को मकान मिला है। इनसे 800 रुपये प्रति महीने किराया लिया जा रहा है। दूसरा किफायती किराया आवासीय योजना है, जिसके तहत 3000 रुपये प्रति महीना किराया लिया जाता है।
खाली पड़े सरकारी मकानों को भी आवंटित करने की योजना
शहर के विभिन्न सेक्टरों में कई छोटे सरकारी मकान ऐसे हैं, जो सालों से खाली पड़े हैं और कर्मचारियों को आवंटित भी नहीं किए जा रहे हैं। यूटी प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, वह एक योजना बना रहे हैं, जिसके तहत जो भी छोटे सरकारी मकान खाली पड़े हैं, उन्हें ठीक कराकर किफायती किराया आवासीय योजना के तहत आवंटित किया जाए। हालांकि कब तक यह प्रक्रिया शुरू होगी, यह स्पष्ट नहीं है।
बीते दिनों यूटी प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा की अध्यक्षता में एक से 10 वार्ड के पार्षदों की बैठक बुलाई गई थी। इसमें पार्षद सुनीता धवन ने सेक्टर-22 के खाली मकानों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि सालों से सैकड़ों मकान खाली पड़े हैं। इन मकानों की हालत जर्जर हो चुकी है। इस पर मनोज परिदा ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वह इन्हें ठीक करा कर, योजना के तहत आवंटित करने के लिए संभावनाएं तलाशें।
मुझे मलोया में दूसरे तल पर मकान मिला है। महीने का किराया काफी ज्यादा है। इसके बाद पानी और बिजली का बिल भी चुकाना होता है। इससे जेब पर काफी बोझ बढ़ गया है। दिहाड़ीदार लोगों के लिए इतना पैसा देना मुश्किल हो रहा है। - संजय, मलोया निवासी
खर्चे कई गुना बढ़े, कमाई वही
यहां आने के बाद से खर्चे कई गुना बढ़ गए हैं, लेकिन कमाई उतनी ही है। किराया काफी ज्यादा है। उसके ऊपर बिजली और पानी का बिल। लोग बहुत परेशान हैं। प्रशासन को किराया कम करना चाहिए ताकि लोग राहत की सांस ले सकें। - रविंदर कुमार, मलोया निवासी
कम होना चाहिए किराया
किराया ज्यादा होने की वजह से कई लोग चुका नहीं पा रहे हैं। किराया नहीं चुकाने की वजह से बोर्ड द्वारा उन्हें डिफॉल्टर की सूची में डाला जा रहा है और मकान के आवंटन को रद्द करने की धमकी दी जा रही है। किराया कम होना चाहिए। - शिव गोपाल, मलोया निवासी
हर महीने 4000 रुपये देना बहुत मुश्किल
ज्यादातर लोग मकान का किराया, बिजली और पानी के हर महीने 4000 रुपये चुकाने में असमर्थ हैं। प्रशासन के अधिकारियों को समझना चाहिए कि मलोया जाने के बाद लोगों के कई तरह के खर्च बढ़ गए हैं। इस वजह से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। - सुरिंदर, मलोया निवासी
किफायती किराया आवासीय योजना के तहत हर महीने तीन हजार रुपये का जो किराया तय किया गया है, वह बाजार दाम के अनुसार है। इसके अलावा एक कमेटी ने लोगों से बातचीत व सर्वे के बाद यह दाम तय किया था। किराये के दाम को प्रशासन ने भी मंजूरी दी है। - यशपाल गर्ग, सीईओ, सीएचबी