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सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से सेना के छोटे रैंक के पेंशनर्स निराश

Fri, 01 Jul 2016 01:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 01 Jul 2016 01:37 AM IST
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pensioners of small rank of former army personnel unhappy with 7th pay commission
भारतीय सेना - फोटो : DEMO Pics

सेना के छोटे रैंक के पेंशनर्स को वन रैंक वन पेंशन के बाद सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से झटका लगा है। छोटे रैंक के पेंशनर्स का कहना है कि उनके हाथ कुछ भी नहीं आया है। उनकी पेंशन में सिर्फ 1125 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जो वक्त के मुताबिक काफी कम है। इसमें सेना के पूर्व नायक, हवलदार, सिपाही, सेना के आर्डिनेरी फैमिली पेंशन धारक और रिजर्विस्ट पेंशनधारक शामिल हैं।

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जानकारों ने बताया कि एक जनवरी 2006 को सेना के छोटे रैंक के पेंशनर्स की न्यूनतम पेंशन 1275 रुपये से करकर 3500 रुपये कर दी गई थी। उसके बाद चार प्रतिशत के हिसाब से महंगाई भत्ता बढ़ता रहा, जो मौजूदा समय में 125 प्रतिशत हो गया है। इस हिसाब से पूर्व सैनिकों को करीब 7875 रुपये की पेंशन मिल रही थी। सातवे3 वेतन आयोग में न्यूनतम पेंशन नौ हजार रुपये की गई है। इस हिसाब से उनकी सैलरी में 1125 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
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आल इंडिया एक्स सर्विसमैन वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन भीम सेन सहगल ने बताया कि देश में छोटे रैंक के सैनिक और पेंशनधारकों की संख्या लाखों में है। सैनिकों का यह तबका सबसे ज्यादा प्रभावित है। एसोसिएशन की मांग है कि इस तबके की न्यूनतम बेसिक पेंशन 15 हजार होनी चाहिए। एसोसिएशन का कहना है कि वे सेंट्रल कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन करेंगे।
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वन रैंक वन पेंशन का भी नहीं मिला लाभ
छोटे रैंक के पेंशनरों में शामिल रिजर्विस्ट पेंशनधारकों को वन रैंक वन पेंशन का लाभ नहीं मिल पाया था। वन रैंक वन पेंशन की नोटिफिकेशन के पैरा नंबर 4.1 में उल्लेख किया गया था कि इस योजना का लाभ रिजर्व फोर्स के सिपाहियों को नहीं मिलेगा। उन्हें जो भी पेंशन मिल रही है, उसमें कोई इजाफा नहीं होगा। इसके लिए उन्होंने चंडीगढ़ आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल में दस्तक दी। इसमें कई सैनिकों ने याचिका डाली थी। सभी याचिका को ट्रिब्यूनल ने स्वीकार कर लिया था। इस मामले में अगली सुनवाई चार जुलाई को होनी है।

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