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Chandigarh News: पेक के छात्र ने बनाया खास माइक्रोस्कोप, आसानी से हो सकेगी बैक्टीरिया की जांच

Mon, 21 Oct 2024 05:54 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 21 Oct 2024 05:54 AM IST
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PEC student created a special microscope, bacteria can be easily examined
चंडीगढ़। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) के एक छात्र ने खास फ्लोरोसेंस माइक्रोस्कोप बनाया है, जो स्मार्ट मोबाइल फोन से कनेक्ट हो जाएगा। यह माइक्रोस्कोप आम फ्लोरोसेंस माइक्रोस्कोप से बिल्कुल अलग है और बेहद हलका है। खास बात यह है कि इससे बेहद सूक्ष्म बैक्टीरिया को भी आसानी से देखा जा सकेगा। इसकी मदद से बैक्टीरिया के विकास, वृद्धि और रोगजनन के विभिन्न पहलुओं को समझने में मदद मिलेगी। अब इस उपकरण को पेटेंट कराने की तैयारी है। पेक से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर पासआउट और मूलरूप से जिला चंपारण (बिहार) के रहने वाले छात्र सूरज कुमार तिवारी ने बताया कि उन्होंने कड़ी मेहनत कर इस माइक्रोस्कोप को बनाया है। पेक की प्रोफेसर उमा बत्रा और जर्मनी के कई शोधकर्ताओं ने इसमें उनकी मदद की। यह माइक्रोस्कोप खासकर देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद मददगार साबित होगा क्योंकि इन इलाकों में बड़े डायग्नोस सेंटर नहीं होते, जिससे लोगों को विभिन्न बीमारियों की जांच के लिए शहर तक की दाैड़ लगानी पड़ती है। अब कम खर्च में ग्रामीण इलाकों के डायग्नोस सेंटरों पर इस माइक्रोस्कोप की मदद से बैक्टीरिया जनित रोगों की आसानी से पहचान हो सकेगी। खास बात यह है कि यह माइक्रोस्कोप बेहद हल्का और पोर्टेबल भी है। सूरज ने बताया कि अगर इस उपकरण से मोबाइल को हटा दें तो इसका वजन सिर्फ 400 ग्राम रह जाएगा जबकि आम फ्लोरोसेंस माइक्रोस्कोप काफी भारी होता है। सूरज ने बताया कि इसे बनाने का खर्च 70 से 72 हजार रुपये की लागत आई है। उन्होंने बताया कि अभी मार्केट में जो मशीनें उपलब्ध हैं, उनकी कीमत लाखों रुपये में है लेकिन उनके द्वारा बनाई मशीन की कीमत काफी कम होगी। इसका फायदा गांव और छोटे शहरों के लोगों को होगा। सूरज के मुताबिक, यह माइक्रोस्कोप हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के बच्चों के प्रैक्टिकल में भी बेहद काम आएगा क्योंकि कीमत ज्यादा होने के कारण फ्लोरोसेंस माइक्रोस्कोप स्कूलों में उपलब्ध नहीं होता। ऐसे में बच्चों को केवल उसके फीचर बताए जाते हैं, बच्चे उसे देख नहीं पाता और न ही उससे प्रैक्टिकल कर पाते हैं। वह अपने बनाए गए माइक्रोस्कोप को स्कूलों तक पहुंचाएंगे ताकि बच्चे भी उससे प्रैक्टिकल कर सकें।
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