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लापरवाही : एकांतवास में गंभीर होने पर पहुंच रहे अस्पताल, चंडीगढ़ के लिए खतरा बन रहे ऐसे मरीज

Sat, 03 Apr 2021 04:18 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 03 Apr 2021 04:18 PM IST
सार

  • कोरोना संक्रमित अस्पताल जाने के डर से घर में रहकर खुद खतरा मोल ले रहे
  • मरीज अपनी बीमारी को छिपाएं नहीं, यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है

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Patients of Corona go to Hospital in Very serious conditions in Chandigarh
चंडीगढ़ में जल्दी अस्पताल नहीं जा रहे कोरोना के मरीज। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

चंडीगढ़ में कोरोना संक्रमितों के घर में एकांतवास में रहने का मोह उन्हें गंभीर स्थिति में पहुंचा रहा है। ये मरीज अपनी पुरानी बीमारी छिपा रहे हैं। यही स्थिति जानलेवा साबित हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ऐेसे मरीजों की हालत दो से तीन दिनों में गंभीर हो रही है। उन्हें आईसीयू तक में भर्ती कराना पड़ रहा है। 

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विशेषज्ञों का कहना है कि एकांतवास में रहने के बजाय पहले से गंभीर बीमार मरीजों को तत्काल अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए, ताकि उनका ऑक्सीजन का स्तर गिरने पर तत्काल बचाव कार्य किया जा सके। 60 साल से ज्यादा उम्र के गंभीर मरीजों की तेजी से हो रही मौत पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने यह तय किया है कि ऐसे मरीजों को अब होम आइसोलेशन में नहीं रखा जाएगा।

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कई केस आए सामने

सेक्टर-15 निवासी धर्मेंद्र (60) पांच दिन पहले कोरोना संक्रमित पाए गए। डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी तो उन्होंने साफ मना कर दिया। महज 3 दिन बाद ऑक्सीजन का स्तर तेजी से नीचे गिरने लगा। रैपिड रिस्पांस टीम पहुंची तो पता चला कि धर्मेंद्र को शुगर भी है। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी गई थी। आनन-फानन में जीएमएसएच-16 के कोविड वार्ड में भर्ती कर स्थिति पर नियंत्रण किया गया।

केस -2
ठीक ऐसी ही स्थिति का सामना मनीमाजरा निवासी 72 वर्षीय मनदीप सिंह को करना पड़ा। उन्होंने भी डॉक्टरों के बार-बार कहने के बावजूद अस्पताल जाना ठीक नहीं समझा। संक्रमित होने के 48 घंटे बाद स्थिति गंभीर हो गई। आनन-फानन में उन्हें पीजीआई में भर्ती करना पड़ा। इससे उनके साथ परिजनों को भी परेशानी का सामना पड़ा।

हेल्प डेस्क को दी जा रही गलत सूचना
अस्पताल आने के डर से बचने के लिए संक्रमित हेल्प डेस्क को गलत सूचनाएं दे रहे हैं। यही वजह है कि स्थिति अचानक गंभीर हो जा रही है। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. अमनदीप कंग ने कहा कि जिन मरीजों को पहले से गंभीर बीमारी है, वह छिपाएं नहीं। गलत सूचना देना उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

जिन संक्रमित मरीजों को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, वह घर पर रहने की गलती न करें। क्योंकि उनकी स्थिति अचानक गंभीर हो सकती है। खास तौर पर 60 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों को घर की बजाय अस्पताल में एकांतवास में रखने का प्रयास किया जा रहा है। -डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक 

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