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Chandigarh: अब लिफाफे में चिट्ठी की तरह आएगा खून का नमूना, महज एक बूंद से होगी मरीज की जांच

Thu, 19 Oct 2023 02:52 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 19 Oct 2023 02:52 PM IST
सार

प्रो. स्मिता ने बताया कि मौजूदा समय में मरीज के हाथ से खून लेकर जांच की जा रही है लेकिन उन जांचों के लिए फिंगर पिक से खून की एक बूंद भी पर्याप्त है। इस सिद्धांत को लागू करने पर भी व्यापक स्तर पर प्रयास शुरू कर दिया गया है। इसके लिए पीजीआई प्रशासन को प्रस्ताव दिया गया है।

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Patient blood samples will come to doctor sealed in an envelope like letter to test effect of medicine
डिवाइस के बारे में जानकारी देतीं डॉ. स्मिता। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश में दवा के असर की जांच के लिए बहुत जल्द मरीज के खून के नमूने लिफाफे में चिट्ठी की तरह बंद होकर डॉक्टर के पास आएंगे। इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ ड्रग मैनेजमेंट ने व्यापक स्तर पर काम शुरू कर दिया है। इस सुविधा के शुरू होने पर मरीजों को बार-बार जांच के लिए खून का नमूना देने अस्पताल आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 
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वॉल्यूमैट्रिक डिवाइस वाले कागज पर खून की महज एक बूंद लेकर लिफाफे में बंद कर अपने डॉक्टर के पास भेज देना होगा। इस कागज पर खून के नमूने से मरीज पर दवा के असर का पता लगाया जा सकेगा। यह जानकारी एसोसिएशन की चांसलर व पीजीआई फार्माकोलॉजी विभाग की प्रो. स्मिता पटनायक ने नर्सिंग इंस्टीट्यूट में आयोजित फार्माकोलॉजी के राष्ट्रीय कार्यशाला में बुधवार को बतौर मुख्य वक्ता दी।
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प्रो. स्मिता ने बताया कि फार्माकोलॉजी में दवाओं के प्रभाव के आकलन के लिए अलग-अलग तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। विश्वभर में पेशेंट केयर में कई आधुनिक तकनीक को जोड़कर उसे और बेहतर बनाया जा रहा है। प्रोफेसर ने कहा कि एसोसिएशन की चांसलर होने के नाते उनका दायित्व बनता है कि भारत में भी आधुनिक तकनीक को व्यापक स्तर पर लागू करने में सहयोग करें।

फिर एक बूंद खून ही होगा काफी
प्रो. स्मिता ने बताया कि मौजूदा समय में मरीज के हाथ से खून लेकर जांच की जा रही है लेकिन उन जांचों के लिए फिंगर पिक से खून की एक बूंद भी पर्याप्त है। इस सिद्धांत को लागू करने पर भी व्यापक स्तर पर प्रयास शुरू कर दिया गया है। इसके लिए पीजीआई प्रशासन को प्रस्ताव दिया गया है। इसमें डिवाइस और अन्य उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद पेशेंट केयर में इजाफा करने की बात की गई है। इस तकनीक से जांच शुरू होने पर मरीज को तकलीफ कम और फायदा ज्यादा होगा।


आंसू और सलाइवा भी बताता है दवा का परिणाम
मरीज के खून के साथ उसके आंसू, सलाइवा और यूरिन से भी शरीर में दवाओं के प्रभाव का पता लगाया जा सकता है। प्रो. स्मिता ने बताया कि छोटे बच्चों में सलाइवा (लार) से इसकी जांच की जाती है। ठीक ऐसे ही मनोचिकित्सा वाले मरीजों में भी यह तकनीक काफी आसान मानी जाती है। वहीं, कुछ दवाइयां ऐसी हैं जिसका प्रभाव मरीज के आंसू की जांच से भी जाना जा सकता है। क्लीनिकल टॉक्सिकोलॉजी के मामले में बॉडी के फ्लूएड की जांच से भी दवा के परिणाम सामने आते हैं। इसके लिए मरीज के यूरिन का नमूना लिया जाता है।

फिर उतना ही खून जितनी जरूरत
वॉल्यूमैट्रिक डिवाइस से तैयार कागज पर मरीज का उतना ही खून का नमूना आएगा, जितने की जांच में जरूरत होगी। प्रो. स्मिता ने बताया कि मरीजों को राहत देने के लिए इंजीनियरिंग और मेडिकल साइंस को जोड़कर यह डिवाइस तैयार किया गया है। इसे देश में लागू करवाने के लिए मेजरमेंट को लेकर शोध शुरू करने की प्रक्रिया पर फोकस किया जा रहा है।


 
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