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Loksabha Election: सोशल मीडिया पर प्रचार के लिए मासूमियत बनी मोहरा, ट्रेंडिंग में 'आस्क मोदी अंकल' कैंपेन

Tue, 30 Apr 2024 04:30 PM IST
निवेदिता वर्मा सुमित मलिक, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुमित मलिक, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 30 Apr 2024 04:30 PM IST
सार

चूंकि मामला बच्चों से जुड़ा है और काफी संवेदनशील है, इसलिए कांग्रेस समेत सभी दलों व उनके नेताओं ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर न तो इसे शेयर किया और न इस पर कोई टिप्पणी की, लेकिन फेक अथवा डमी अकाउंट्स और पार्टियों के वालंटियर्स की तरफ से इसे खूब शेयर किया जा रहा है।

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Parties now started taking help of children for campaigning
Loksabha Election - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संसद पहुंचने की लड़ाई में विभिन्न दलों ने अब बच्चों व उनकी मासूमियत का सहारा लेना भी शुरू कर दिया है। रविवार को सोशल मीडिया पर आस्क मोदी अंकल (मोदी से पूछो) नाम से एक कैंपेन शुरू की गई है। इसके तहत 2.18 मिनट का एक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें बच्चे प्रधानमंत्री मोदी से आठ सवाल करते हैं। ये सवाल बेरोजगारी, किसान आत्महत्या, काला धन, महंगाई, धोखेबाजों, चीन व इलेक्ट्रोल बॉन्ड को लेकर है। 
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रविवार को जारी किया गया यह वीडियो खूब ट्रेंड कर रहा है। वहीं, इसके जवाब ने भारतीय जनता पार्टी व उनके समर्थकों ने भी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने वीडियो के जवाब में पीएम मोदी के बच्चों के साथ समय गुजारने के कुछ वीडियो जारी किए हैं जिसमें वे बच्चों से खेलते व मस्ती करते नजर आते हैं। साथ ही लिखा है कि इंडिया गठबंधन इतना नीचे गिर गया है कि वोट के लिए बच्चों का इस्तेमाल कर रहा है जबकि प्रधानमंत्री को सबसे अधिक बच्चे ही प्रिय हैं। वहीं, कुछ लोग वीडियो के हक में इसे अब तक का सबसे बेस्ट विज्ञापन बताकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं।
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खास बात है कि इस वीडियो में न तो किसी पार्टी को वोट देने की अपील की गई और न ही भाजपा का नाम लिया गया। वीडियो कब और किसने जारी किया गया, उसका भी जिक्र नहीं है और न ही इसमें किसी पार्टी अथवा नेता की झलक दिखाई पड़ती, लेकिन सीधे तौर पर उन्हीं सवालों को लेकर पीएम से जवाब मांगा गया है जिन विपक्ष अपने भाषणों में मुद्दा बनाता रहा है।
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सभी की उम्र दस साल से कम 
इस वीडियो में छह से आठ बच्चे नजर आते हैं जिनकी आयु दस साल से कम है। उनको क्लासरूम से लेकर बर्थ-डे पार्टी, पारिवारिक झगड़े, स्टडी टेबल, ग्राउंड, झूले, पार्क व खिलौनों के साथ दिखाया गया है।


चुनाव आयोग दे चुका है स्पष्ट निर्देश...फिर भी बनाया गया मोहरा
दरअसल, बच्चों के मामले को लेकर चुनाव आयोग पहले दिन से सख्त है। आयोग राजनीतिक दलों से पहले ही कह चुका है कि वे पोस्टर और पर्चे बांटने या नारेबाजी सहित ''किसी भी रूप में'' प्रचार में बच्चों का उपयोग न करें। ऐसे मामलों में जीरो टालरेंस की नीति अपनाने की चेतावनी भी दी गई है। फरवरी में मुख्य निर्वाचन आयुक्त इसको लेकर सभी दलों को आगाह भी कर चुके है। बीते शनिवार को ओडिशा में भी आयोग के अधिकारियों को इस संबंधी लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सर्कुलर जारी करना पड़ा था। इसके बावजूद इस चुनावी रण में बच्चों को फिर मोहरा बनाया गया।

 
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